Skip Navigation Links
सायना नेहवाल – रियो ओलिंपिक में पदक की भारतीय उम्मीद


सायना नेहवाल – रियो ओलिंपिक में पदक की भारतीय उम्मीद

कोई भी देश ओलिंपिक में वैसे तो अपने सभी खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद रखता है लेकिन उनमें से भी कुछ स्टार खिलाड़ी होते हैं जिनके प्रदर्शन पर लोगों की विशेष नजर व अपेक्षाएं होती हैं। ऐसी ही एक खिलाड़ी हैं जिन्होंनें बैडमिंटन की दुनिया में अपना नाम कमाया है और लंदन ओलिंपिक में पहले भी कांस्य पदक को भारत की झोली में डाला था । आप समझ ही गये होंगें बात हो रही है भारत की बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल की। सायना नेहवाल 11 अगस्त को ओलिंपिक में अपना जोहर दिखाने के लिये बेताब हैं। ऐसे में एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों ने आकलन किया है उनकी जन्मकुंडली और वर्तमान में उन पर चल रही ग्रहों की दशा का। आइये जानते हैं इस स्टार खिलाड़ी के सितारों के बारे में क्या कहना है एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों का। यदि आप अपने सितारों के बारे में जानने के इच्छुक हैं तो डाउनलोड करें भारत की पहली एस्ट्रोलॉजर ऐप और परामर्श करें अपने पसंदीदा ज्योतिषाचार्यों से। अभी बात करने के लिये लिंक पर क्लिक करें।


नाम : सायना नेहवाल

जन्मतिथि : 17 मार्च 1990

जन्म स्थान : हिसार, हरियाणा

जन्म समय : 12:19


उपरोक्त विवरण के अनुसार सायना नेहवाल की कुंडली मिथुन लग्न की बनती है जिसके अनुसार इनकी चंद्रराशि वृश्चिक है। इनका जन्म अनुराधा नक्षत्र में हुआ जो कि शनिदेव का नक्षत्र है। इस समय इन पर बुध की महादशा चल रही है और अंतर्दशा में गुरु यानि बृहस्पति विराजमान हैं।


पत्रिका के अनुसार उच्च का मंगल राशि का स्वामी है जो कि इन्हें सक्रिय और ऊर्जावान रखता है और प्रगति के पथ पर अग्रसर होने के लिये प्रेरित करता है। इनकी पत्रिका में बुधादित्य योग भी बन रहा है। वर्तमान में बुध की महादशा व गुरु की अंतर्दशा भी इनके लिये बहुत भाग्यशाली साबित हो सकती है। जिसके अनुसार इन्हें अच्छा लाभ मिलने के आसार हैं। उम्मीद की जा सकती है ग्रहों का यह योग इन्हें लक्ष्य प्राप्ति में सहायक सिद्ध हो।


बृहस्पति का गोचर भी हो सकता है सायना के लिये लाभकारी


11 अगस्त को चूंकि बृहस्पति कन्या राशि में गोचर करेंगें यह वृश्चिक राशि के जातकों के लिये विशेष रूप से लाभकारी है। वृश्चिक जातकों के लिये यह वो समय है जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार है। पूर्व में की गई मेहनत का फल इन्हें इस समय मिल सकता है अत: इस लिहाज से यह समय भी सायना के पक्ष में माहौल बना रहा है। बृहस्पति का बदलती चाल का आप पर क्या असर होगा? जानने के लिये लिंक पर क्लिक कर पूरा लेख पढ़ें।


शनि की साढ़ेसाती बढ़ा सकती है परेशानी


सायना नेहवाल पर इस समय शनि की साढ़े साती का द्वीतीय चरण चल रहा है जो कि इनकी सफलता को थोड़ा मुश्किल बना सकता है। 11 अगस्त को ये अपना मुकाबला खेलेंगी लेकिन इस दिन इनकी कुंडली के अनुसार चंद्रमा 12वां है जो कि शुभ नहीं माना जाता।

लेकिन शनि देव न्याय प्रिय देवता माने जाते हैं और सच्ची लगन व मेहनत करने वाले को कभी निराश नहीं करते, दूसरा बुधादित्य योग, गुरु का कन्या में गोचर आदि कई महत्वपूर्ण पहलू हैं जो ईशारा करते हैं कि यदि सायना पूरे जोश व उमंग के साथ आत्मविश्वास से मैदान में उतरी विजयश्री प्राप्त कर सकती हैं।


संबंधित लेख

दीपा करमाकर क्या कहते हैं इस जिमनास्ट के सितारे   |   राहू है बलवान छा सकते हैं नरसिंह पहलवान   |  

रियो ओलिंपिक 2016 - क्या भारतीय खिलाड़ियों को मिलेगा सितारों का साथ   |   युवाओं के लिए कुछ खास है 2016

2016 - क्या खेलों में चमकेगा भारत   |   2016 - क्या कहते हैं भारत के सितारे   |   2016 - क्या कहते हैं आपके सितारे

रियो ओलिंपिक में क्या भारतीय हॉकी टीम की पलटेगी किस्मत क्या कहते हैं सितारे




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

मार्गशीर्ष अमावस्या – अगहन अमावस्या का महत्व व व्रत पूजा विधि

मार्गशीर्ष अमावस्य...

मार्गशीर्ष माह को हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे अगहन मास भी कहा जाता है यही कारण है कि मार्गशीर्ष अमावस्या को अगहन अमावस्य...

और पढ़ें...
कहां होगा आपको लाभ नौकरी या व्यवसाय ?

कहां होगा आपको लाभ...

करियर का मसला एक ऐसा मसला है जिसके बारे में हमारा दृष्टिकोण सपष्ट होना बहुत जरूरी होता है। लेकिन अधिकांश लोग इस मामले में मात खा जाते हैं। अक...

और पढ़ें...
विवाह पंचमी 2017 – कैसे हुआ था प्रभु श्री राम व माता सीता का विवाह

विवाह पंचमी 2017 –...

देवी सीता और प्रभु श्री राम सिर्फ महर्षि वाल्मिकी द्वारा रचित रामायण की कहानी के नायक नायिका नहीं थे, बल्कि पौराणिक ग्रंथों के अनुसार वे इस स...

और पढ़ें...
राम रक्षा स्तोत्रम - भय से मुक्ति का रामबाण इलाज

राम रक्षा स्तोत्रम...

मान्यता है कि प्रभु श्री राम का नाम लेकर पापियों का भी हृद्य परिवर्तित हुआ है। श्री राम के नाम की महिमा अपरंपार है। श्री राम शरणागत की रक्षा ...

और पढ़ें...
मार्गशीर्ष – जानिये मार्गशीर्ष मास के व्रत व त्यौहार

मार्गशीर्ष – जानिय...

चैत्र जहां हिंदू वर्ष का प्रथम मास होता है तो फाल्गुन महीना वर्ष का अंतिम महीना होता है। महीने की गणना चंद्रमा की कलाओं के आधार पर की जाती है...

और पढ़ें...