सत्यनारायण भगवान की व्रत कथा व पूजन विधि

सत्यनारायण व्रत हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। इस व्रत को कोई भी कर सकता है। व्रत को करने मात्र से ही मानव सभी तरह के बंधन से मुक्त हो जाता है। आमतौर पर इस व्रत पूजन को लोग अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए अथवा मनोकामना पूर्ण होने के बाद करते हैं। इस व्रत पूजन के बारे में विस्तार से जानकारी आगे उपलब्ध कराई गई है जो इस प्रकार है, सबसे पहले सत्यनारायण पूजा क्या है, इस पूजन का क्या महत्व है, इस महान व्रत की कथा क्या है, व्रत की पूजा विधि क्या है तथा यह व्रत किस तिथि पर की जानी चाहिए।

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सत्यनारायण पूजा क्या है?

सत्यनारायण पूजा की महिमा से हर सनातन धर्म को मानने वाला भली-भांति जानता है। इस पूजा में जगत के पालनकर्ता व मोक्ष प्रदाता श्री हरि विष्णु की पूजा विधिवत की जाती है। इस व्रत में श्री हरि विष्णु की आराधना सत्य व नारायण के रूप में की जाती है। सत्यनारायण का शाब्दिक अर्थ ही है सत्य को मानने वाला, सत्य को धारण करने वाला महापुरूष। कुल मिलाकर इस संसार में केवल श्री हरि विष्णु ही सत्य हैं। इसलिए इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस व्रत में मानव को प्रसाद तथा संकल्प करने की महत्ता को बतलाया गया है। पूजा को दो चरण में विभाजित किया गया है। पहला चरण है पूजा व दूसरा है कथा है।

 

सत्यनारायण पूजा का महत्व

सत्यनारायण व्रत कथा का विशेष महत्व है। माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को पूरी निष्ठा के साथ करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। इस व्रत कथा को करने का उद्देश्य अधिकतर साधक का किसी मनोकामना का पूर्ण होना या मन इच्छा की पूर्ती हो इसलिए करता है। व्रत का सफलता से पूर्ण होने पर साधक की मनोती हो पूर्ण होती है साथ ही साधक धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है। जीवन में सभी तरह के सुख का भोग करता है। उच्च पद की प्राप्ति करता है। अंत में श्री हरि के चरणों में स्थान पाकर मुक्त हो जाता है। इस व्रत को संतान सुख पाने के लिए भी किया जाता है। माना जाता है कि साधक श्रद्धा के साथ सत्यमरायण कथा का श्रवण तथा पूजन का करता है तो उसके सारे मनोरथ की पूर्ति अवश्य ही होती है।

 

सत्यनारायण व्रत पूजन विधि

सत्यनारायण व्रत पूजन के लिए सबसे पहले साधक को पूर्णिमा के दिन स्नान आदि कर शुद्ध होकर व्रत रखना चाहिए। पूजन के लिए सर्वप्रथम जमीन को गाय के गोबर से लीप कर शुद्ध कर लें। इसके बाद पूजा की चौकी रख दें। अब चौकी के चारों पायों पर केले का वृक्ष बांध दें या जमीन में गाड़ दें। इसके बाद चौकी पर विष्णु जी की प्रतिमा अथवा तस्वीर रखें। सत्यनारायण व्रत पूजन में सबसे पहले श्री गणेश की पूजा की जाती है। क्योंकि भगवान गणेश को सभी देवों का आशीर्वाद प्राप्त है। बिना गणेश की पूजा के किसी भी व्रत व अनुष्ठान का फल नहीं मिलता है। इसलिए इनकी पूजा करना अनिवार्य है। इनके बाद दश दिगपाल, पंच लोकपाल, इंद्रादि के साथ विष्णु अवतार भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण तथा राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है और अंत में भगवान विष्णु व सत्यनारायण की पूजा की जाती है और कथा का श्रवण कर। पंचामृत व पंजीड़ी तथा फलों का प्रसाद वितरण करना चाहिए। इसके बाद ब्राह्मण को यथा शक्ति दान देकर भोजन करवाए और आशीर्वाद लेने के बाद प्रसाद ग्रहण करें।

 

सत्यनारायण की कथा

सत्यनारायण व्रत की कथा का कुल 5 अध्याय हैं जिनमें भगवान नारायण की महिमा का वर्णन किया गया। कथा में व्रत के विधान के साथ संकल्प व प्रसाद के महत्व को बतलाया गया है। कुल मिलाकर आपको कथा का पांचों अध्यायों का श्रवण कर इनके महत्व को अच्छे से समझ सकते हैं।

 

सत्यनारायण पूजन तिथि 2019

इस व्रत को करने के लिए सबसे उत्तम तिथि पूर्णिमा को माना जाता है। इस वर्ष सत्यनारायण पूजा के लिए कौन सी तिथियां श्रेष्ठ होगीं। उसकी जानकारी यहां उपलब्ध कराई गयी है। जो इस प्रकार है-

सत्यनारायण व्रत - पौस पूर्णिमा  – दिन – सोमवार – दिनांक - 21 जनवरी 2019

सत्यनारायण व्रत - माघ पूर्णिमा  – दिन – मंगलवार – दिनांक - 19 फरवरी 2019

सत्यनारायण व्रत – फाल्गुन पूर्णिमा  – दिन – बुधवार – दिनांक - 20 मार्च 2019

सत्यनारायण व्रत – चैत्र पूर्णिमा  – दिन – शुक्रवार – दिनांक - 19 अप्रैल 2019

सत्यनारायण व्रत – वैशाख पूर्णिमा  – दिन – शनिवार – दिनांक - 18 मई 2019

सत्यनारायण व्रत – जेष्ठ पूर्णिमा  – दिन – सोमवार – दिनांक - 17 जून 2019

सत्यनारायण व्रत – आषाढ़ पूर्णिमा  – दिन – मंगलवार – दिनांक - 16 जुलाई 2019

सत्यनारायण व्रत – श्रावण पूर्णिमा  – दिन – बृहस्पतिवार – दिनांक - 15 अगस्त 2019

सत्यनारायण व्रत – भाद्रपद पूर्णिमा  – दिन – शुक्रवार – दिनांक – 13 सितंबर 2019

सत्यनारायण व्रत – अश्विन पूर्णिमा  – दिन – रविवार – दिनांक – 13 अक्टूबर 2019

सत्यनारायण व्रत – कृतिका पूर्णिमा  – दिन – मंगलवार – दिनांक – 12 नवंबर 2019

सत्यनारायण व्रत – मार्गशीर्ष पूर्णिमा  – दिन – बुधवार – दिनांक – 11 दिसंबर 2019

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