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शुक्र अस्त - अब 3 फरवरी के बाद बजेंगी शहनाइयां!


शुक्र अस्त - अब 3 फरवरी के बाद बजेंगी शहनाइयां!

विवाह के लिये सर्दियों का मौसम बहुत ही अच्छा माना जाता है। क्योंकि ऐसा मानना है कि सर्दियों के मौसम खाने पीने से लेकर ओढ़ने पहनने व संजने संवरने के ढेरों विकल्प होते हैं। जबकि गर्मियों में बहता पसीना रूप सज्जा से लेकर खाने पीने की योजनाओं पर पानी फेर देता है। दूसरा विवाह के बंधन में बंधने जा रहे जातकों को भी थकान कम महसूस होती है जबकि गर्मियों में विशेषकर दुल्हनों की तो पारंपरिक व भारी भरकम पहनावों के चलते हालत पतली हो जाती है। तो कुल मिलाकर सर्दियों का मौसम वैवाहिक आयोजन के लिये श्रेष्ठ माना जाता है। लेकिन विवाह जैसे पवित्र आयोजन के लिये सिर्फ मौसम ही नहीं ग्रह, नक्षत्रों, शुभ अशुभ मुहूर्त का भी ध्यान रखा जाता है। यदि विवाह का शुभ मुहूर्त नहीं है तो मौसम कितना ही सुहाना क्यों न हो यदि आप दांपत्य जीवन में सुखी रहना चाहते हैं तो ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आपको शुभ मुहूर्त देखकर ही विवाह की तिथि का निर्धारण करना चाहिये। हाल ही में ज्योतिष की एक ऐसी घटना घट रही है जिससे 3 फरवरी तक वैवाहिक आयोजन सहित कई मांगलिक कार्यों पर विराम लग सकता है। ऐसा क्यों हो रहा है आइये जानते हैं।

खर मास में नहीं होते मांगलिक कार्य

4 दिसंबर से पौष मास की शुरुआत हो चुकी है। मान्यता है कि इस मास में सूर्यदेव का रथ खिंचने वाले घोड़े विश्राम पर होते हैं उनकी जगह पर खर यानि गधे उनके रथ को खींच रहे होते हैं यही कारण है कि इस मास में सूर्य देव के दर्शन भी कम ही होते हैं। लगभग इसी मास में अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 14-15 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे धनु संक्रांति कहा जाता है इसी दिन से खर मास का आरंभ भी माना जाता है। सौर पौष मास को खर मास भी कहा जाता है। खर मास होने के कारण मांगलिक कार्यों की मनाही इस मास में होती है। एक कारण यह भी है कि सूर्य देव इस समय धनु राशि में होते हैं धनु राशि के स्वामी गुरु यानि बृहस्पति माने जाते हैं जो सभी को इस समय धर्म-कर्म की शिक्षा देते हैं। इसलिये यह समय आध्यात्मिक उत्थान के लिये शुभ माना जाता है। 1 जनवरी 2018 को पौष पूर्णिमा के साथ पौष मास की समाप्ति होगी। लेकिन खर मास की समाप्ति 14 जनवरी 2018 को मकर संक्रांति के साथ होगी। 

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शुक्र अस्त होने के कारण 3 फरवरी तक नहीं हो सकते विवाह

विवाह मुहूर्त के लिये शुक्र तारे या कहें की शुक्र ग्रह की शुभता का पूरा ध्यान रखा जाता है। सूर्य के नजदीक आने से शुक्र अस्त हो रहे हैं। इसे तारा डूबना भी कहते हैं। शुक्र तारे के डूबने के कारण विवाह का कोई मुहूर्त नहीं है। हालांकि 29 नवंबर से शुक्र अस्त चल रहे हैं जो कि 19 फरवरी तक रहेंगें। लेकिन विवाह के लिये 15 दिसबंर से 3 फरवरी तक कोई शुभ योग नहीं है। इसलिये 3 फरवरी के बाद जाकर ही मुहूर्त खुलेंगें।

अबूझ मुहूर्त में कर सकते हैं विवाह

भले ही शुक्र अस्त चल रहे हों लेकिन वर्ष में कुछ ऐसे अवसर भी आते हैं जिन्ह विवाह सहित सभी शुभ, मांगलिक कार्यों के लिये सौभाग्यशाली माना जाता है। इन्हें अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं। अत: अबूझ मुहूर्त में विवाह कार्य संपन्न किया जा सकता है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है अत: इस दिन आप विवाह के बंधन में बंध सकते हैं। इसके अलावा 22 जनवरी को बसंत पंचमी का पर्व भी है। बसंत पंचमी को भी अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन भी विवाह के लिये मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं है।

इसके अलावा भी जातक की कुंडली के अनुसार भी ग्रहों के विशेष योग को देखकर विवाह का मुहूर्त निकाला जा सकता है। यदि बहुत ही आवश्यक हो तो कुछ विशेष उपाय अपनाकर भी आयोजन संपन्न किया जा सकता है। लेकिन फिलहाल सामान्य तौर पर देखा जाये तो 15 दिसंबर से 3 फरवरी तक शहनाइयों की गूंज आपको कम ही सुनाई देगी।

यदि आप अपनी कुंडली के अनुसार अपने विवाह योग अथवा अपने भावी जीवनसाथी को लेकर कुछ जानना चाहते हैं हमारे ज्योतिषाचार्य आपका उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं। एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों से परामर्श करने के लिये यहां क्लिक करें।


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