चैत्र मास (Chaitra Maas) का हिंदू धर्म में धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत महत्व है। क्योंकि फाल्गुन और चैत्र ये दो मास प्रकृति के बहुत ही खूबसूरत मास माने जाते हैं। भारत की छह ऋतुओं में से ऋतुराज मानी जाने वाली बसंत ऋतु इन्हीं दो महीनों की होती है। इसलिये इन महीनों में प्रकृति भी खिली-खिली चहकती हुई नजर आती है। जन-जीवन में भी एक नई ऊर्जा, उत्साह व उल्लास का संचार होता है। तो आइये जानते हैं चैत्र मास के बारे में। अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार, साल 2026 में चैत्र मास का आरंभ 04 मार्च से होगा जो कि 02 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा तक रहेगा।
फाल्गुन जो कि हिंदू वर्ष का अंतिम मास होता है। इसके तुरंत बाद ही लगता है चैत्र का महीना (Chaitra Mahina)। इसी महीने से होती है हिंदू नववर्ष की शुरूआत। जिसे संवत्सर कहा जाता है। हिंदू वर्ष का पहला मास होने के कारण चैत्र की बहुत ही अधिक महता होती है। अनेक पावन पर्व इस मास में मनाये जाते हैं। चैत्र मास की पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र में होती है इसी कारण इसका महीने का नाम चैत्र पड़ा। मान्यता है कि सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना आरंभ की थी। वहीं सतयुग की शुरुआत भी चैत्र माह से मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने की प्रतिपदा को भगवान विष्णु के दशावतार से पहले अवतार मतस्यावतार अवतरित हुए एवं जल प्रलय के बीच घिरे मनु को सुरक्षित स्थल पर पंहुचाया था। जिनसे प्रलय के पश्चात नई सृष्टि का आरंभ हुआ।
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास से ही नववर्ष और नए संवत्सर की शुरुआत होती है। यही कारण है कि यह महीना धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मास में कई ऐसे व्रत और पर्व आते हैं, जो जीवन में सुख-समृद्धि, पितृ शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आइए जानते हैं चैत्र मास 2083 (मार्च-अप्रैल 2026) के प्रमुख पर्व-त्योहारों के बारे में विस्तार से —
चैत्र माह की अष्टमी तिथि को देश के कई राज्यों में बसोड़ा या शीतला अष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है और एक दिन पहले बने बासी भोजन (ठंडा भोजन) का प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
मान्यता है कि माता शीतला की कृपा से परिवार को रोगों से मुक्ति और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है।
बसोड़ा – 11 मार्च 2026, बुधवार
चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से पापों के शमन और मानसिक शुद्धि के लिए रखा जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को पिछले जन्मों और वर्तमान जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है।
पापमोचिनी एकादशी – 15 मार्च 2026, रविवार
(व्रत का पारंपरिक समय पंचांग अनुसार निर्धारित किया जाता है, इसलिए स्थानीय समय अवश्य देखें।)
चैत्र मास की अमावस्या को संवत्सर की पहली अमावस्या माना जाता है। इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, दान और श्राद्ध कर्म करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए पितृ कर्म से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं।
चैत्र अमावस्या – 19 मार्च 2026, गुरुवार
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हिंदू नववर्ष या संवत्सर का आरंभ होता है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन घर के बाहर गुड़ी (ध्वज) स्थापित की जाती है, जो विजय और समृद्धि का प्रतीक है।
परंपरा के अनुसार दिन की शुरुआत सूर्य देव को अर्घ्य देकर और पूजा-अर्चना करके करनी चाहिए।
गुड़ी पड़वा – 19 मार्च 2026, गुरुवार
चैत्र नवरात्रि मां दुर्गा की आराधना के नौ दिवसीय पर्व के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तिथि तक चलता है।
इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखकर, जप-पाठ और हवन करके माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
चैत्र नवरात्रि प्रारंभ – 19 मार्च 2026, गुरुवार
चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान श्रीराम की जयंती के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी दिन अयोध्या में रामलला का जन्म हुआ था।
इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और रामायण पाठ का आयोजन किया जाता है।
राम नवमी – 26 मार्च 2026, गुरुवार
चैत्र शुक्ल एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि यह व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
कामदा एकादशी – 29 मार्च 2026, रविवार
चैत्र पूर्णिमा के दिन भगवान हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन माता अंजना और केसरी के घर बाल मारुति का जन्म हुआ था।
इस दिन भक्त हनुमान चालीसा का पाठ, सुंदरकांड का पाठ और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
हनुमान जयंती – 2 अप्रैल 2026, गुरुवार
चैत्र मास की पूर्णिमा को संवत्सर की पहली पूर्णिमा माना जाता है। यह दिन दान-पुण्य, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ होता है।
पूर्णिमा के दिन स्नान-दान और भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
चैत्र पूर्णिमा – 2 अप्रैल 2026, गुरुवार
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हिन्दू पंचांग के अनुसार, चैत्रमास में चैत्र नवरात्रि, रामनवमी, संकष्टी गणेश चतुर्थी, रंग पंचमी, शीतला सप्तमी, पापमोचनी एकादशी, हनुमान जयंती, स्वामीनारायण जयंती, और कामदा एकादशी जैसे त्यौहार और व्रत हैं।
| क्रम संख्या | व्रत / त्योहार | तिथि व दिन |
|---|---|---|
| 1 | चैत्र मास आरंभ | 4 मार्च 2026, बुधवार |
| 2 | होली | 4 मार्च 2026, बुधवार |
| 3 | भाई दूज | 5 मार्च 2026, गुरुवार |
| 4 | रंग पंचमी | 8 मार्च 2026, रविवार |
| 5 | अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस | 8 मार्च 2026, रविवार |
| 6 | शीतला सप्तमी | 10 मार्च 2026, मंगलवार |
| 7 | शीतला अष्टमी | 11 मार्च 2026, बुधवार |
| 8 | बसोड़ा | 11 मार्च 2026, बुधवार |
| 9 | कालाष्टमी | 11 मार्च 2026, बुधवार |
| 10 | मीन संक्रांति | 15 मार्च 2026, रविवार |
| 11 | पापमोचनी एकादशी | 15 मार्च 2026, रविवार |
| 12 | सोम प्रदोष व्रत | 16 मार्च 2026, सोमवार |
| 13 | मासिक शिवरात्रि | 17 मार्च 2026, मंगलवार |
| 14 | दर्श अमावस्या | 18 मार्च 2026, बुधवार |
| 15 | उगादी | 19 मार्च 2026, गुरुवार |
| 16 | गुड़ी पड़वा | 19 मार्च 2026, गुरुवार |
| 17 | चैत्र नवरात्रि प्रारंभ | 19 मार्च 2026, गुरुवार |
| 18 | चैत्र अमावस्या | 19 मार्च 2026, गुरुवार |
| 19 | झूलेलाल जयंती | 20 मार्च 2026, शुक्रवार |
| 20 | मत्स्य जयंती | 21 मार्च 2026, शनिवार |
| 21 | गणगौर (गौरी पूजा) | 21 मार्च 2026, शनिवार |
| 22 | लक्ष्मी पंचमी | 23 मार्च 2026, सोमवार |
| 23 | शहीद दिवस | 23 मार्च 2026, सोमवार |
| 24 | यमुना छठ | 24 मार्च 2026, मंगलवार |
| 25 | रोहिणी व्रत | 24 मार्च 2026, मंगलवार |
| 26 | स्कंद षष्ठी | 24 मार्च 2026, मंगलवार |
| 27 | राम नवमी | 26 मार्च 2026, गुरुवार |
| 28 | राम नवमी (इस्कॉन) | 27 मार्च 2026, शुक्रवार |
| 29 | स्वामीनारायण जयंती | 27 मार्च 2026, शुक्रवार |
| 30 | वामन द्वादशी | 29 मार्च 2026, रविवार |
| 31 | कामदा एकादशी | 29 मार्च 2026, रविवार |
| 32 | सोम प्रदोष व्रत | 30 मार्च 2026, सोमवार |
| 33 | महावीर स्वामी जयंती | 31 मार्च 2026, मंगलवार |
| 34 | चैत्र पूर्णिमा व्रत | 1 अप्रैल 2026, बुधवार |
| 35 | हनुमान जयंती | 2 अप्रैल 2026, गुरुवार |
| 36 | हनुमान जन्मोत्सव | 2 अप्रैल 2026, गुरुवार |
| 37 | चैत्र पूर्णिमा | 2 अप्रैल 2026, गुरुवार |