Holashtak 2026 Upay: होलाष्टक होली से पहले आने वाले आठ खास दिनों को कहा जाता है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, यह समय थोड़ा संवेदनशील माना जाता है, इसलिए इन दिनों में बड़े शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आप होलाष्टक से पहले कुछ सरल और सकारात्मक उपाय कर लें, तो यह समय आपके लिए शांत और लाभकारी बन सकता है। घर की सफाई, पूजा-पाठ, दान और मन को शांत रखना जैसे छोटे कदम आपकी ऊर्जा को संतुलित कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि होलाष्टक से पहले आपको कौन से उपाय जरूर करने चाहिए।
अगर आप चाहते हैं कि होलाष्टक का समय आपके लिए सकारात्मक और शांतिपूर्ण रहे, तो इन आसान उपायों को अपनाएं।
होलाष्टक शुरू होने से पहले अपने घर की अच्छी तरह सफाई करें। अनावश्यक और टूटी-फूटी चीजों को हटा दें। इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और सकारात्मक वातावरण बनता है।
होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और भगवान विष्णु से जुड़ा है। इसलिए आप इस समय विष्णु जी या श्रीकृष्ण की नियमित पूजा करें।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें
पीले फूल और फल अर्पित करें
होलाष्टक से पहले जरूरतमंद लोगों को दान देना शुभ माना जाता है।
अन्न दान
पीले वस्त्र दान
गुड़ और चना दान
दान से आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और ग्रहों का अशुभ प्रभाव कम होता है।
इन दिनों में मन थोड़ा चंचल हो सकता है। इसलिए आप क्रोध, बहस और विवाद से बचें। ध्यान और प्रार्थना का सहारा लें।
अगर आप कोई मंत्र जप या साधना शुरू करना चाहते हैं, तो होलाष्टक से पहले उसका संकल्प लें। यह समय आत्मचिंतन और भीतर की शुद्धि के लिए अच्छा माना जाता है।
कई जगहों पर यह परंपरा है कि नवविवाहिता को होलाष्टक शुरू होने से पहले मायके भेज दिया जाता है। मान्यता है कि होलाष्टक के दिनों में वातावरण की ऊर्जा थोड़ी भारी और अशुभ मानी जाती है, और नई दुल्हन को घर की लक्ष्मी समझा जाता है, इसलिए उसकी सकारात्मक ऊर्जा की रक्षा करना जरूरी माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, विवाह के बाद पहली जलती होली नवविवाहिता को ससुराल में नहीं देखनी चाहिए, क्योंकि उस समय उसकी भावनात्मक और ऊर्जात्मक स्थिति को कोमल माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दौरान नकारात्मक प्रभाव जल्दी पड़ सकता है और सास-बहू के रिश्ते में अनावश्यक तनाव आ सकता है। इसलिए उसे मायके भेजकर अपने परिवार के संरक्षण और स्नेह के बीच रखा जाता है, ताकि वह सुरक्षित और संतुलित रहे।
होलाष्टक के दौरान कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं कौन-कौन से काम आपको नहीं करने चाहिए।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। माना जाता है कि इस समय ग्रहों का प्रभाव स्थिर नहीं रहता।
अगर आप नया बिजनेस या कोई बड़ा निवेश करने की सोच रहे हैं, तो होलाष्टक के बाद का समय चुनें। इन दिनों में आर्थिक फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए।
होलाष्टक के दौरान मानसिक अस्थिरता बढ़ सकती है। इसलिए आप किसी से भी बेवजह बहस या लड़ाई से बचें।
इस समय नकारात्मक सोच जल्दी प्रभाव डाल सकती है। आप अपने मन को सकारात्मक कार्यों में लगाएं।
होलाष्टक प्रकृति से जुड़ा पर्व है। इसलिए आप पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं और पर्यावरण की रक्षा करें।
यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है। वास्तव में, होलाष्टक को पूरी तरह अशुभ नहीं माना जाता। यह समय हमें सावधानी और संयम रखने की सलाह देता है।
ज्योतिष के अनुसार, यह काल कुछ राशियों के लिए अधिक संवेदनशील हो सकता है, जबकि कुछ के लिए सामान्य भी रह सकता है। इसलिए डरने की बजाय जागरूक रहना अधिक जरूरी है।
अगर आप इस समय को आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए उपयोग करते हैं, तो यह आपके लिए लाभकारी भी साबित हो सकता है।
रोज सुबह सूर्य को जल अर्पित करें
घर में शाम को दीपक जलाएं
गाय को हरा चारा खिलाएं
बुजुर्गों का आशीर्वाद लें
होलिका दहन के दिन पुरानी नकारात्मक बातों को मन से निकाल दें
यह छोटे-छोटे कदम आपके जीवन में शांति और संतुलन ला सकते हैं।
होलाष्टक जीवन में रुककर सोचने और खुद को सुधारने का समय है। यह कोई डरने वाला काल नहीं है, बल्कि सावधानी और आत्मचिंतन का अवसर है। अगर आप होलाष्टक से पहले घर की सफाई, पूजा-पाठ और दान जैसे उपाय करते हैं, तो यह समय आपके लिए सकारात्मक बन सकता है। वहीं, विवाह, बड़ा निवेश और मांगलिक कार्यों से कुछ दिन का विराम लेना बेहतर माना जाता है। याद रखें, हर ग्रह दशा और हर काल का एक उद्देश्य होता है। होलाष्टक आपको यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास बनाए रखें।