जन्माष्टमी का पर्व श्री कृष्ण के भक्तों के लिए उत्साह और उल्लास से भरा पल होता है। इस अवसर पर लोग भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना के साथ-साथ व्रत भी रखते हैं। इस साल जन्माष्टमी का पर्व 04 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
इस दौरान उपवास रखने वाले भक्तों को खान-पान को लेकर कुछ खास नियमों का पालन करना होता है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल अक्सर आता है कि जन्माष्टमी के व्रत में क्या खाया जा सकता है और किन चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए। सही ढंग से व्रत पूरा करने के लिए फलाहार से लेकर व्रत से जुड़ी अन्य चीजों तक, सही जानकरी होना जरूरी है। तो चलिए जानते हैं जन्माष्टमी के व्रत में क्या खाएं?
जन्माष्टमी के व्रत में दिनभर बिना कुछ खाए रहना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। इसलिए व्रत की परंपरा के अनुसार फलाहार में ऐसी चीजें शामिल की जाती हैं, जो पेट को बहुत भारी न करें और दिनभर के लिए ऊर्जा देने में मदद करें।
ताजे फल: केला, सेब, पपीता, अनार, संतरा और मौसमी फल फलाहार का आसान विकल्प हैं। फल व्रत के दौरान शरीर को कार्बोहाइड्रेट, पानी और कई जरूरी पोषक तत्व देते हैं।
सूखे मेवे और मखाना: बादाम, अखरोट, काजू, किशमिश और मखाना जैसे विकल्प थोड़ी मात्रा में लिए जा सकते हैं।
दूध और दही: दूध और दही को भी कई व्रतों में फलाहार का हिस्सा बनाया जाता है। दूध को सादा या अपनी व्रत परंपरा के अनुसार किसी उपयुक्त तरीके से लिया जा सकता है। दही को भी हल्के फलाहार के साथ शामिल किया जा सकता है।
कुट्टू का आटा: कुट्टू का आटा व्रत के दौरान इस्तेमाल होने वाले लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। इससे पूरी, रोटी, चीला या पकौड़ी जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं।
सिंघाड़े का आटा: सिंघाड़े के आटे से भी व्रत के लिए अलग-अलग व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इससे रोटी, चीला या हल्के स्नैक्स बनाए जा सकते हैं।
सामक के चावल: सामक को कई जगह व्रत के दौरान चावल के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इससे खिचड़ी या पुलाव जैसी डिश बनाई जा सकती है।
साबूदाना: साबूदाना व्रत के दौरान खाई जाने वाली लोकप्रिय चीजों में शामिल है। इससे साबूदाने की खिचड़ी, टिक्की या दूसरी डिश बनाई जा सकती है।
सेंधा नमक: जिन व्रत परंपराओं में नमक लेने की अनुमति होती है, वहां सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल किया जाता है। इसे फलाहार की सब्जी, साबूदाने की डिश या दूसरे व्रत वाले व्यंजनों में स्वाद के लिए डाला जा सकता है।
नारियल और नारियल पानी: नारियल पानी व्रत के दौरान तरल पदार्थ के रूप में लिया जा सकता है। ताजा नारियल भी फलाहार में शामिल किया जाता है।
आलू और शकरकंद: कई व्रत परंपराओं में आलू और शकरकंद का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें उबालकर, हल्का भूनकर या व्रत के अनुकूल तरीके से तैयार किया जा सकता है।
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जन्माष्टमी के व्रत में खान-पान के कुछ खास नियम माने जाते हैं। अगर आप जन्माष्टमी का व्रत रख रहे हैं, तो इन चीजों को अपनी व्रत की थाली से दूर रखना बेहतर माना जाता है:
अनाज से बनी चीजें: जन्माष्टमी के व्रत में गेहूं, चावल और दूसरे सामान्य अनाज का सेवन नहीं किया जाता। इसलिए रोटी, चावल, सामान्य आटे से बनी चीजें और अनाज से तैयार दूसरे व्यंजन व्रत के दौरान नहीं लिए जाते।
दालें और फलियां: सामान्य भोजन में इस्तेमाल होने वाली दालें और कई तरह की फलियां भी व्रत के भोजन का हिस्सा नहीं मानी जातीं। इसलिए व्रत के दिन दाल वाली सामान्य सब्जी या दाल से बने व्यंजनों से बचना चाहिए।
सामान्य नमक: जिन व्रत परंपराओं में नमक लेने की अनुमति होती है, वहां आमतौर पर साधारण नमक के बजाय सेंधा नमक इस्तेमाल किया जाता है।
प्याज और लहसुन: व्रत के दौरान सात्विक भोजन पर जोर दिया जाता है, इसलिए प्याज और लहसुन से बनी चीजों को आमतौर पर भोजन में शामिल नहीं किया जाता।
मांसाहारी भोजन: जन्माष्टमी का व्रत धार्मिक आस्था से जुड़ा होता है, इसलिए व्रत के दौरान मांस, मछली और अंडे जैसे मांसाहारी खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज किया जाता है।
शराब और अन्य नशीले पदार्थ: व्रत और पूजा के दौरान शराब या किसी भी तरह के नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। यह व्रत की धार्मिक भावना के भी अनुरूप नहीं माना जाता।
बहुत ज्यादा तला-भुना भोजन: व्रत में खाने की अनुमति होने के बावजूद हर चीज को ज्यादा तेल में तलकर खाना सही विकल्प नहीं है। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन पेट पर भारी पड़ सकता है, खासकर तब जब आपने दिनभर सामान्य भोजन नहीं किया हो।
बहुत ज्यादा मसालेदार या पैकेज्ड चीजें: व्रत के नाम पर बाजार में मिलने वाले हर “व्रत स्पेशल” खाद्य पदार्थ को सही मान लेना जरूरी नहीं है। पैकेज्ड स्नैक्स या तैयार खाद्य पदार्थ खरीदते समय सामग्री जरूर देखें, क्योंकि उनमें ऐसी सामग्री हो सकती है जो आपके व्रत के नियमों में मान्य न हो।
बिना जांचे कोई भी तैयार भोजन: बाहर का खाना लेते समय यह पता करना जरूरी है कि उसमें सामान्य आटा, अनाज, साधारण नमक या ऐसी कोई दूसरी सामग्री तो नहीं है जिसे आपके व्रत में खाने की अनुमति नहीं है। घर पर बना ताजा भोजन इस मामले में ज्यादा आसान विकल्प रहता है।
जन्माष्टमी का व्रत पूरा करने के बाद सीधे भारी भोजन करना सही नहीं माना जाता। लंबे समय तक व्रत रखने के बाद शरीर को भोजन की आदत में धीरे-धीरे वापस लाना बेहतर रहता है। इसलिए पारण करते समय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन चुनना चाहिए।
व्रत खोलते समय शुरुआत पानी से करना अच्छा विकल्प है। लंबे समय तक भोजन और पेय से दूर रहने के बाद शरीर को पहले तरल की जरूरत होती है। बहुत ठंडे या बहुत ज्यादा मीठे पेय की जगह सामान्य पानी लिया जा सकता है। पानी लेने के कुछ समय बाद केला, पपीता या सेब जैसे हल्के फल लिए जा सकते हैं। इससे पेट पर अचानक ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा मिलती है।
अगर आपको दूध आसानी से पचता है, तो पारण के बाद थोड़ी मात्रा में दूध लिया जा सकता है। इसे बहुत ज्यादा चीनी या भारी सामग्री के साथ लेने से बचना बेहतर है। इसके बाद अपनी व्रत परंपरा के अनुसार घर पर बना हल्का भोजन लिया जा सकता है। एक साथ बहुत सारी चीजें खाने के बजाय कम मात्रा से शुरुआत करना ज्यादा सहज रहता है।
जन्माष्टमी में पारण का समय केवल अपनी सुविधा के अनुसार तय नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारण का समय तिथि और नक्षत्र की स्थिति से जुड़ा होता है। इसलिए अपने स्थान के पंचांग के अनुसार पारण का समय देखना चाहिए।
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