रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यारे रिश्ते को मजबूत करने वाला और खुशियों से भर देने वाला त्योहार है। इस दिन सभी बहनें बड़े प्यार से अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस प्रक्रिया के दौरान अक्सर यह सवाल मन में उठता है कि आख़िर भाई के किस हाथ में राखी बांधी जाती है ? या किस हाथ को राखी के लिए सबसे शुभ माना जाता है? अब आपको अपने ऐसे सवालों के जवाब इस लेख में एक ही जगह पर मिलेंगे। तो चलिए जानते हैं राखी किस हाथ में बांधनी चाहिए? क्या भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधना सही माना जाता है या बाएं हाथ पर? वहीं, बहन को राखी बांधने की स्थिति में क्या नियम है?
हिंदू परंपरा के अनुसार भाई को राखी उसकी दाहिनी कलाई पर बांधनी चाहिए। रक्षाबंधन के दिन बहन भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती है। इसलिए राखी बांधते समय भाई की दाहिनी कलाई को प्राथमिकता दी जाती है।
हालांकि, अगर किसी वजह से दाहिने हाथ में राखी बांधना संभव न हो, तो ऐसी स्थिति में दूसरे हाथ में राखी बांधी जा सकती है। इसमें घबराने या इसे अशुभ मानने की जरूरत नहीं है।
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रक्षाबंधन पर कुछ परिवारों में भाई के साथ उसकी पत्नी यानी भाभी को भी राखी बांधने की परंपरा है। इसे खास तौर पर लुंबा राखी के नाम से जाना जाता है। यह परंपरा राजस्थान और मारवाड़ी परिवारों में अधिक प्रचलित मानी जाती है।
भाभी के लिए लुंबा राखी सामान्य राखी से थोड़ी अलग होती है। इसे आमतौर पर चूड़ी में लगाया या बांधा जाता है, जिससे यह चूड़ी के साथ लटकती हुई दिखाई देती है। हालांकि, लुंबा राखी बांधने का तरीका परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
दाहिने हाथ को हिंदू परंपरा में शुभ कार्यों से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा-पाठ और कई शुभ कार्यों में दाहिने हाथ का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से रक्षाबंधन पर भी भाई की दाहिनी कलाई को राखी बांधने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
इसके पीछे यह मान्यता भी है कि दाहिना हाथ कर्म और अच्छे कार्यों का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भाई की कलाई पर राखी बांधते समय दाहिने हाथ को प्राथमिकता देने की परंपरा चली आ रही है। रक्षाबंधन पर भाई के लिए कोई खास राखी तलाश रहे हैं? तो एस्ट्रोयोगी की स्पेशल राखी भी देख सकते हैं।
परंपरा के अनुसार, भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। हालांकि, हर स्थिति एक जैसी नहीं होती। अगर भाई के दाहिने हाथ में चोट लगी हो, किसी कारण से वहां राखी बांधना संभव न हो या दाहिनी कलाई पर पहले से कोई ऐसी चीज बंधी हो जिसकी वजह से राखी बांधना मुश्किल हो, तो बाएं हाथ में राखी बांधी जा सकती है।
इसलिए केवल बाएं हाथ में राखी बंध जाने से इसे अशुभ मानकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। दाहिनी कलाई का नियम मुख्य रूप से परंपरागत मान्यता से जुड़ा है, इसे ऐसी कठोर नियम नहीं समझना चाहिए कि किसी विशेष परिस्थिति में राखी बांधना ही गलत हो जाए।
अगर भाई अपनी बहन को रक्षाबंधन पर राखी बांधता है, तो इसके लिए दाहिनी कलाई को चुनना सही है। पारंपरिक रूप से रक्षा सूत्र को दाहिने हाथ में बांधने की प्रथा केवल भाई तक सीमित नहीं रही है। धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग रिश्तों और अवसरों पर भी रक्षा सूत्र दाहिनी कलाई पर बांधने का उल्लेख मिलता है।
हालांकि, रक्षाबंधन की मुख्य परंपरा बहन द्वारा भाई की कलाई पर राखी बांधने की है। इसलिए भाई की तरह बहन को राखी बांधने का कोई विशेष नियम नहीं माना जाता। अगर किसी परिवार में भाई अपनी बहन को राखी बांधता है, तो वह अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार इसे निभा सकता है।
ज्योतिषीय और आध्यात्मिक मान्यताओं में शरीर के दाहिने पक्ष को सक्रियता और कर्म से जुड़ा माना जाता है। इसी संदर्भ में दाहिने हाथ को ऐसे कार्यों से जोड़ा जाता है, जिनमें व्यक्ति अपने संकल्प को कर्म के रूप में आगे बढ़ाता है। कुछ आध्यात्मिक परंपराओं में दाहिने पक्ष का संबंध सूर्य ऊर्जा से भी बताया गया है, जो सक्रियता, तेज और आत्मबल का प्रतीक मानी जाती है।
रक्षाबंधन में राखी बांधने का भाव भी भाई के लिए सुरक्षा, शक्ति और सकारात्मक जीवन की कामना से जुड़ा होता है। इसलिए दाहिनी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधना इस संकल्प को प्रतीकात्मक रूप से मजबूत करने वाला माना जा सकता है।
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