रक्षा बंधन 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

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Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और रिश्ते को समर्पित प्रमुख त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुख, स्वास्थ्य व लंबी आयु की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा का वचन देता है और साथ ही उसे उपहार देता है। ‘रक्षाबंधन’ का अर्थ है- रक्षा का बंधन

रक्षा बंधन 2026: शुभ मुहूर्त और समय

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नोट: ऊपर दिया गया रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त बेंगलुरु (Bangalore) के स्थानीय समय के अनुसार है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और पंचांग की गणना के आधार पर राखी बांधने का शुभ समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। अपने शहर का सटीक शुभ मुहूर्त जानने के लिए नीचे दिए गए शहरवार समय देखें। 

शहरों के अनुसार रक्षा बंधन का शुभ समय

  • दिल्ली: सुबह 05:57 बजे से 09:48 बजे तक

  • मुंबई: सुबह 06:23 बजे से 09:48 बजे तक

  • गुरुग्राम: सुबह 05:58 बजे से 09:48 बजे तक

इस समय के दौरान राखी बांधना सबसे अधिक शुभ माना जाता है, जिससे भाई-बहन के रिश्ते मजबूत होते हैं और परिवार में खुशहाली आती है।

रक्षा बंधन 2026 की पूर्णिमा तिथि

हिन्दू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त 2026 को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी।

रक्षाबंधन 2026 पर भद्रा काल

रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने से पहले भद्रा काल का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा के समय राखी बांधने से बचना चाहिए। 28 अगस्त 2026 को भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो चुकी होगी, इसलिए राखी बांधने के शुभ समय में भद्रा की बाधा नहीं रहेगी।

यह भी पढ़ें : भद्रा में राखी क्यों नहीं बांधते? जानें रक्षाबंधन की वजह 

रक्षा बंधन 2026 के अन्य शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त समय
अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:56 बजे – दोपहर 12:48 बजे
विजय मुहूर्त दोपहर 2:31 बजे – शाम 3:22 बजे
गोधूलि मुहूर्त शाम 6:47 बजे – शाम 7:10 बजे
अमृत काल शाम 7:44 बजे – रात 9:23 बजे

रक्षा बंधन पर शुभ मुहूर्त का महत्व

रक्षाबंधन पर किये जाने वाले सभी धार्मिक अनुष्ठानों को सदैव तिथि पर शुभ मुहूर्त के दौरान करना चाहिए। इस पर्व से संबंधित रीति-रिवाजों को संपन्न करने के लिए अपरान्ह काल को सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। इस दिन भद्राकाल से सख्ती से बचना चाहिए क्योंकि यह अशुभ समय होता है। इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करना उचित नहीं माना जाता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान एवं नए कार्य को करने से पूर्व शुभ मुहूर्त और चोगडिया मुहूर्त को देख लेना चाहिए। 

रक्षाबंधन के दौरान इन नियमों का रखें विशेष ख्याल 

  • पूर्णिमा तिथि के दौरान अपराह्न काल में भद्रा लग गई है तो रक्षाबंधन मनाने की मनाही होती है। इसी प्रकार, यदि पूर्णिमा अगले दिन के शुरुआती तीन मुहूर्तों में हो, तो इस पर्व को विधिपूर्वक अगले दिन के अपराह्ण काल में मनाना चाहिए।
  • पूर्णिमा अगले दिन के शुरुआती 3 मुहूर्तों में नहीं हो, तो रक्षाबंधन को पहले दिन भद्रा लगने के बाद प्रदोष काल के उत्तरार्ध में मनाया जा सकता हैं। 

यह भी पढ़ें: राखी किस हाथ में बांधनी चाहिए?

रक्षाबंधन की पूजा विधि 

  • रक्षाबंधन पर सर्वप्रथम प्रातःकाल भाई-बहन स्नान करने के पश्चात ईश्वर की उपासना करते हैं। 
  • इसके उपरांत बहनों द्वारा रोली, अक्षत, कुमकुम और दीपक जलाकर पूजा की थाली सजायी जाती हैं। 
  • इस थाली में रंग-बिरंगी राखियों को रखकर पूजा करते हैं। 
  • अब बहनें भाइयों के माथे पर कुमकुम, रोली एवं अक्षत से तिलक करती हैं। 
  • इसके पश्चात बहने अपने भाई के दाएं हाथ की कलाई पर रेशम की डोरी से बनी राखी बांधती हैं और भाई को मिठाई खिलाती हैं। 
  • भाई राखी बंधवाने के बाद अपनी बहन को रक्षा का वचन और भेंट देते है। 
  • इसके विपरीत, बहनें राखी बांधते समय अपने भाई की लम्बी आयु एवं सुख-शांति से पूर्ण जीवन की कामना करती है।

रक्षाबंधन से जुड़ीं कथाएं 

हमारे धार्मिक ग्रंथों में रक्षाबंधन से जुड़ीं अनेक कथाओं का वर्णन मिलता है जो इसी प्रकार है: 

कृष्ण और द्रौपदी

महाभारत के अनुसार, एक समय की बात है जब भगवान कृष्ण के हाथ पर चोट लग गई थी, तब द्रौपदी ने अपना पल्ला फाड़कर श्रीकृष्ण के हाथ पर बांधा था। उसी वक़्त भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को जीवनभर रक्षा करने का वचन दिया था, उसी समय से ही पवित्र बंधन के रूप में राखी का पर्व मनाया जाने लगा। 

देवी लक्ष्मी एवं राजा बाली

भगवान विष्णु के परम भक्त थे राजा बाली जिन्होंने एक दिन विष्णु जी से सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए भगवान विष्णु ने चौकीदार के रूप में छिपकर उनकी प्रार्थना पूरी की। देवी लक्ष्मी को बैकुंठ में भगवान विष्णु नहीं मिल रहे थे इसलिए, उन्होंने स्वयं को एक बेघर महिला के रूप में प्रस्तुत किया और बाली के राज्य में आश्रय मांगा। भगवान बाली को दयालु राजाओं में से एक माना जाता था तो, उन्होंने उनका स्वागत किया और उन्हें अपने राज्य में आश्रय दिया और बदले में, उनके राज्य ने अपार सफलता प्राप्त की। 

श्रावण पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी ने राजा बाली की सुरक्षा हेतु उनकी कलाई पर एक पवित्र धागा बांध दिया। उसके पश्चात भगवान बाली ने उनसे पूछा कि वह उपहार में क्या चाहती है, जिस पर देवी लक्ष्मी ने चौकीदार की तरफ इशारा किया। इसके बाद भगवान विष्णु ने अपनी वास्तविक पहचान प्रकट की। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी से बाली ने अपने बैकुंठ धाम पर वापस जाने का अनुरोध किया। लेकिन, बाली की भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान विष्णु ने बाली के राज्य में 4 महीने बिताने का वादा किया।

रक्षाबंधन का महत्व 

राखी या रक्षाबंधन हिन्दुओं का सबसे प्रमुख एवं प्रसिद्ध पर्व है जिसका इंतजार सभी बहनों और भाइयों द्वारा वर्षभर उत्सुकता से किया जाता है। रक्षाबंधन के दिन सभी बहनें अपने भाई की सुख-समृद्धि एवं लंबी आयु के लिए कलाई पर रंग-बिरंगी राखियां बांधती है और भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा का वचन देते है।

यह एक ऐसा लोकप्रिय त्यौहार है जिसका इंतजार बहनें बहुत ही बेसब्री से करती है क्योंकि रक्षाबंधन भाई और बहन के प्रेम को गहरा करता है। रक्षाबंधन भारतीय परम्पराओं का एक ऎसा पर्व है, जो भाई-बहन के स्नेह के साथ-साथ प्रत्येक सामाजिक संबंधों को मजबूती प्रदान करता है। इसी वजह से इस त्यौहार का भाई-बहन को आपस में जोडने के साथ साथ अपना विशेष सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व भी है। 

पर्व को और खास बनाने के लिये गाइडेंस लें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से।

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पिठोरी अमावस्या
पिठोरी अमावस्या
Friday, September 11, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:प्रथमा
सामवेद उपाकर्म
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Saturday, September 12, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:द्वितीया
वराह जयन्ती
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Sunday, September 13, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:तृतीया
चन्द्र दर्शन
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Sunday, September 13, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:तृतीया
गौरी हब्बा
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Monday, September 14, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:चतुर्थी
हरतालिका तीज
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Monday, September 14, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:चतुर्थी

अन्य त्यौहार

Delhi- Thursday, 10 September 2026
दिनाँक Thursday, 10 September 2026
तिथि कृष्ण चतुर्दशी
वार गुरुवार
पक्ष कृष्ण पक्ष
सूर्योदय 6:3:53
सूर्यास्त 18:32:57
चन्द्रोदय 4:59:40
नक्षत्र मघा
नक्षत्र समाप्ति समय 14 : 6 : 46
योग सिद्ध
योग समाप्ति समय 19 : 17 : 37
करण I शकुनि
सूर्यराशि सिंह
चन्द्रराशि सिंह
राहुकाल 13:52:03 to 15:25:41
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