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shani jayanti

शनि जयंती 2018


शनि जयंती हिंदू पंचांग के ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन शनिदेव की पूजा की जाती है। विशेषकर शनि की साढ़े साती, शनि की ढ़ैय्या आदि शनि दोष से पीड़ित जातकों के लिये इस दिन का महत्व बहुत अधिक माना जाता है। शनि राशिचक्र की दसवीं व ग्यारहवी राशि मकर और कुंभ के अधिपति हैं। एक राशि में शनि लगभग 18 महीने तक रहते हैं। शनि का महादशा का काल भी 19 साल का होता है। प्रचलित धारणाओं के अनुसार शनि को क्रूर एवं पाप ग्रहों में गिना जाता है और अशुभ फल देने वाला माना जाता है लेकिन असल में ऐसा है नहीं। क्योंकि शनि न्याय करने वाले देवता हैं और कर्म के अनुसार फल देने वाले कर्मफलदाता हैं इसलिये वे बूरे कर्म की बूरी सजा देते हैं अच्छे कर्म करने वालों को अच्छे परिणाम देते हैं।

शनिदेव

शनि जिन्हें कर्मफलदाता माना जाता है। दंडाधिकारी कहा जाता है, न्यायप्रिय माना जाता है। जो अपनी दृष्टि से राजा को भी रंक बना सकते हैं। हिंदू धर्म में शनि देवता भी हैं और नवग्रहों में प्रमुख ग्रह भी जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में बहुत अधिक महत्व मिला है। शनिदेव को सूर्य का पुत्र माना जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को ही सूर्यदेव एवं छाया (संवर्णा) की संतान के रूप में शनि का जन्म हुआ।

शनि पूजा की विधि

शनिदेव की पूजा करने के लिये कुछ अलग नहीं करना होता। इनकी पूजा भी अन्य देवी-देवताओं की तरह ही होती है। शनि जयंती के दिन उपवास भी रखा जाता है। व्रती को प्रात:काल उठने के पश्चात नित्यकर्म से निबटने के पश्चात स्नानादि से स्वच्छ होना चाहिये। इसके पश्चात लकड़ी के एक पाट पर साफ-सुथरे काले रंग के कपड़े को बिछाना चाहिये। कपड़ा नया हो तो बहुत अच्छा अन्यथा साफ अवश्य होना चाहिये। फिर इस पर शनिदेव की प्रतिमा स्थापित करें। यदि प्रतिमा या तस्वीर न भी हो तो एक सुपारी के दोनों और शुद्ध घी व तेल का दीपक जलाये। इसके पश्चात धूप जलाएं। फिर इस स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करवायें। सिंदूर, कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल आदि के साथ-साथ नीले या काले फूल शनिदेव को अर्पित करें। इमरती व तेल से बने पदार्थ अर्पित करें। श्री फल के साथ-साथ अन्य फल भी अर्पित कर सकते हैं। पंचोपचार व पूजन की इस प्रक्रिया के बाद शनि मंत्र की एक माला का जाप करें। माला जाप के बाद शनि चालीसा का पाठ करें। फिर शनिदेव की आरती उतार कर पूजा संपन्न करें।

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शनि जयंती पर्व तिथि व मुहूर्त 2018



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  • शनि जयंती 2016

    5 जून

    अमावस्या तिथि आरंभ - 11:49 बजे (4 जून 2016)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 08:29 बजे (5 जून 2016)

  • शनि जयंती 2017

    25 मई

    अमावस्या तिथि आरंभ - 05:07 बजे (25 मई 2017)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 01:14 बजे (26 मई 2017)

  • शनि जयंती 2018

    15 मई

    अमावस्या तिथि आरंभ - 19:46 बजे (14 मई 2018)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 17:17 बजे (15 मई 2018)

  • शनि जयंती 2019

    3 जून

    अमावस्या तिथि आरंभ - 16:39 बजे (2 जून 2019)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 15:31 बजे (3 जून 2019)

  • शनि जयंती 2020

    22 मई

    अमावस्या तिथि आरंभ - 21:35 बजे (21 मई 2020)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 23:07 बजे (22 मई 2020)

  • शनि जयंती 2021

    10 जून

    अमावस्या तिथि आरंभ - 13:57 बजे (9 जून 2021)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 16:21 बजे (10 जून 2021)

  • शनि जयंती 2022

    30 मई

    अमावस्या तिथि आरंभ - 14:54 बजे (29 मई 2022)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 16:59 बजे (30 मई 2022)

  • शनि जयंती 2023

    19 मई

    अमावस्या तिथि आरंभ - 21:42 बजे (18 मई 2023)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 21:22 बजे (19 मई 2023)

  • शनि जयंती 2024

    6 जून

    अमावस्या तिथि आरंभ - 19:54 बजे (5 जून 2024)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 18:06 बजे (6 जून 2024)

  • शनि जयंती 2025

    27 मई

    अमावस्या तिथि आरंभ - 12:11 बजे (26 मई 2025)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 08:31 बजे (27 मई 2025)

  • शनि जयंती 2026

    16 मई

    अमावस्या तिथि आरंभ - 05:10 बजे (16 मई 2026)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 1:29 बजे (17 मई 2026)

  • शनि जयंती 2027

    4 जून

    अमावस्या तिथि आरंभ - 04:04 बजे (4 जून 2027)

    अमावस्या तिथि समाप्त - 01:09 बजे (5 जून 2027)