गुरु पूर्णिमा 2022



गुरु पूर्णिमा पर्व तिथि व मुहूर्त 2022

Dhanteras 2028
15 October
Dhanteras Date - Sunday, 15 October 2028
Dhanteras Puja Muhurat - 07:26 Pm To 08:21 Pm
Pradosh Kaal - 05:51 Pm To 08:21 Pm
Taurus Period - From 07:26 Pm To 09:22 Pm
Trayodashi Tithi Starts From 07:16 (October 15, 2028)
Trayodashi Tithi Ends - Till 03:45 (October 16, 2028)

Dhanteras 2029
04 November
Dhanteras Date - Sunday, 04 November 2029
Dhanteras Puja Muhurat - 07:34 Pm To 08:10 Pm
Pradosh Kaal - 05:34 Pm To 08:10 Pm
Taurus Period - From 06:09 In The Evening To 08:04 In The Night
Trayodashi Tithi Starts From 08:57 (03 November 2029)
Trayodashi Tithi Ends - Till 05:29 Pm (04 November 2029)

Dhanteras 2030
24 October
Dhanteras Date - Thursday, 24 October 2030
Dhanteras Puja Muhurat - From 06:53 Pm To 08:16 Pm
Pradosh Kaal - 05:43 Pm To 08:16 Pm
Taurus Period - 06:53 Pm To 08:49 Pm
Trayodashi Tithi Starts From 09:05 Am (24 October 2030)
Trayodashi Tithi Ends - Till 07:09 Am (25 October 2030)

Dhanteras 2031
12 November
Dhanteras Date - Wednesday, 12 November 2031
Dhanteras Puja Muhurat - 05:39 Pm To 07:35 Pm
Pradosh Kaal - 05:29 Pm To 08:08 Pm
Taurus Period - 05:39 Pm To 07:35 Pm
Trayodashi Tithi Starts From 06:09 Am (12 November 2031)
Trayodashi Tithi Ends - Till 05:36 Am (13 November 2031)

Dhanteras 2032
31 October
Dhanteras Date - Sunday, 31 October 2032
Dhanteras Puja Muhurat - From 06:24 Pm To 08:12 Pm
Pradosh Kaal - 05:36 Pm To 08:12 Pm
Taurus Period - From 06:24 Pm To 08:19 Pm
Trayodashi Tithi Starts From 06:45 Am (12 October 2032)
Trayodashi Tithi Ends - Till 08:42 Am (01 November 2032)

गुरु पूर्णिमा 2027

18 -07-

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ-शाम 06:48 (17-07-2027) से

गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त-रात 09:14 (18-07-2027) तक

गुरु पूर्णिमा 2028

06 -07-

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ-रात 11:03 (05-07-2028) से

गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त-रात 11:40 (06-07-2028) तक

गुरु पूर्णिमा 2029

25 -07-

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ-शाम 07:50 (24-07-2029) से

गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त-शाम 07:05 (25-07-2029) तक

गुरु पूर्णिमा 2030

15 -07- दिन सोमवार

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ-सुबह 10:47 (14-07-2030) से

गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त-सुबह 07:41 (15-07-2030) तक

गुरु पूर्णिमा 2031

04 -07- दिन शुक्रवार

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ-सुबह 04:21 (04-07-2031) से

गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त-रात 12:30 (05-07-2031) तक

गुरु पूर्णिमा 2032

22 -07- दिन बृहस्पतिवार

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ-सुबह 03:54 (22-07-2032) से

गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त-रात 12:21 (23-07-2032) तक

हिन्दू धर्म में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना जाता है| क्योंकि गुरु ही हैं जो इस संसार रूपी भव सागर को पार करने में सहायता करते हैं| गुरु के ज्ञान और दिखाए गए मार्ग पर चलकर व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है| शास्त्रों में कहा गया है कि यदि ईश्वर आपको श्राप दें तो इससे गुरु आपकी रक्षा कर सकते हैं परंतु गुरु के दिए श्राप से स्वयं ईश्वर भी आपको नहीं बचा सकते हैं| इसलिए कबीर जी कहते भी हैं -

गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागूं पाँय।

बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय॥

हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है| गुरु पूर्णिमा को गुरु की पूजा की जाती है| भारत वर्ष में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है|  प्राचीन काल में शिष्य जब गुरु के आश्रम में नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण करते थे तो इसी दिन पूर्ण श्रद्धा से अपने गुरु की पूजा का आयोजन किया करते थे| इस दिन केवल गुरु की ही नहीं, अपितु घर में अपने से जो भी बड़ा है अर्थात माता-पिता, भाई-बहन आदि को गुरुतुल्य समझ कर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है|

गुरु पूर्णिमा का महत्व

इस दिन को हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिवस भी माना जाता  है|  वे संस्कृत के महान विद्वान थे महाभारत जैसा महाकाव्य उन्ही की देन है। इसी के अठारहवें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण गीता का उपदेश देते हैं। सभी 18 पुराणों का रचयिता भी महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। वेदों को विभाजित करने का श्रेय भी इन्हीं को दिया जाता है। इसी कारण इनका नाम वेदव्यास पड़ा था। वेदव्यास जी को आदिगुरु भी कहा जाता है इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है|

 

गुरु पूर्णिमा के वर्षा ऋतु ही क्यों श्रेष्ठ?

भारत वर्ष में सभी ऋतुओं का अपना ही महत्व है| गुरु पूर्णिमा खास तौर पर वर्षा ऋतु में ही क्यों मनाया जाता है इसका भी एक कारण है| क्योकि इन चार माह में न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी होती है| यह समय अध्ययन और अध्यापन के लिए अनुकूल व सर्वश्रेष्ठ है| इसलिए गुरुचरण में उपस्थित शिष्य ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति को प्राप्त करने हेतु इस समय का चयन करते हैं|

पर्व को और खास बनाने के लिये गाइडेंस लें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से।

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