श्रावण मास में आने वाला नाग पंचमी का पर्व सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण उत्सव माना जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि नाग देवता भगवान शिव के प्रिय हैं, इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से शिव कृपा भी प्राप्त होती है।
साल 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आता है।
नाग पञ्चमी मुहुर्त
नाग पञ्चमी मुहुर्त
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 16, 2026 को 04:52 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त - अगस्त 17, 2026 को 05:00 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 06, 2027 को 02:27 ए एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त - अगस्त 07, 2027 को 12:22 ए एम बजे
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ - जुलाई 25, 2028 को 07:41 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त - जुलाई 26, 2028 को 04:45 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 13, 2029 को 09:05 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त - अगस्त 14, 2029 को 06:20 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 03, 2030 को 03:38 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त - अगस्त 04, 2030 को 02:26 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ - जुलाई 24, 2031 को 02:49 ए एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त - जुलाई 25, 2031 को 03:52 ए एम बजे
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 10, 2032 को 08:21 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त - अगस्त 11, 2032 को 10:26 पी एम बजे
नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान करके शुभ मुहूर्त में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस समय श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
बहुत से लोगों के मन में यह प्रश्न आता है कि नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है। इसके पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों कारण बताए गए हैं।
सनातन धर्म में नागों को केवल एक जीव नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति का प्रतीक माना गया है। शेषनाग भगवान विष्णु की शैया हैं, जबकि वासुकि नाग भगवान शिव के गले में विराजमान रहते हैं। इसी कारण नाग देवता की पूजा करने से भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नागों का सम्मान करने से परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं, भय समाप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
यदि आप घर पर नाग पंचमी पूजा विधि करना चाहते हैं, तो इन आसान चरणों का पालन करें।
पूजा की तैयारी
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करें और भगवान शिव तथा नाग देवता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पूजा करने की विधि
सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें। इसके बाद भगवान शिव और नाग देवता को जल अर्पित करें।
अब हल्दी, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। धूप और दीप जलाएं। श्रद्धा से दूध, मिश्री और अन्य नैवेद्य अर्पित करें।
इसके बाद नाग पंचमी की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में नाग देवता की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
नाग पंचमी के दिन पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा और सच्ची आस्था का माना जाता है। पूजा के समय नाग देवता और भगवान शिव को स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद कच्चा दूध, फूल, अक्षत, हल्दी, कुमकुम और चंदन अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर पूजा करें तथा मिश्री या अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई का भोग लगाएं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक अर्पित की गई पूजा सामग्री से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करें और श्रद्धा से नाग देवता का पूजन करें। यदि संभव हो तो किसी शिव मंदिर में जाकर जल अर्पित करें और परिवार के साथ मिलकर पूजा करें। जरूरतमंद लोगों को दान देना, धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना तथा भगवान शिव का स्मरण करना भी इस दिन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इन कार्यों को करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की मान्यता है।
नाग पंचमी के दिन सभी जीवों के प्रति दया और सम्मान का भाव रखना चाहिए। किसी भी नाग या अन्य जीव को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। इस दिन क्रोध, झूठ, विवाद और कटु वचन से दूर रहना शुभ माना जाता है। नशे का सेवन करने से भी बचना चाहिए और किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन प्रकृति और जीव-जंतुओं का सम्मान करने से भगवान शिव और नाग देवता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी का व्रत और विधि-विधान से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में कई शुभ परिणाम लेकर आती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है, जिससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, भय और बाधाओं में कमी आती है तथा ग्रह दोषों की शांति की कामना पूरी होती है। यह भी माना जाता है कि नाग पंचमी की पूजा करने से संतान और पूरे परिवार की रक्षा का आशीर्वाद मिलता है।
पौराणिक कथा के अनुसार एक किसान अपने खेत में हल चला रहा था। खेती करते समय अनजाने में उसके हल से एक नागिन के बच्चों की मृत्यु हो गई। अपने बच्चों की मृत्यु से दुखी और क्रोधित नागिन ने किसान के परिवार को डस लिया। जब वह किसान की बेटी के पास पहुंची तो उसने देखा कि वह पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ नाग देवता की पूजा कर रही है। लड़की की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर नागिन ने न केवल उसे क्षमा कर दिया, बल्कि किसान के पूरे परिवार को भी जीवनदान दे दिया। तभी से नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है। यह कथा हमें सभी जीवों के प्रति दया, सम्मान और प्रकृति के संरक्षण का संदेश भी देती है।
पूजा के समय नाग देवता का मंत्र श्रद्धा से जपना शुभ माना जाता है।
ॐ नागदेवाय नमः॥
या
ॐ अनन्ताय नमः।
ॐ वासुकये नमः।
ॐ शेषाय नमः।
ॐ पद्मनाभाय नमः।
ॐ कम्बलाय नमः।
ॐ शंखपालाय नमः।
ॐ धृतराष्ट्राय नमः।
ॐ तक्षकाय नमः।
ॐ कालियाय नमः॥
मंत्र जप के बाद भगवान शिव का स्मरण अवश्य करें।
नाग पंचमी का पर्व प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है। यह हमें सिखाता है कि हर जीव का अपना महत्व है।
इस दिन श्रद्धा से नाग देवता की पूजा करने पर माना जाता है कि-
भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कालसर्प दोष की शांति के लिए यह दिन शुभ माना जाता है।
राहु-केतु से जुड़े दोष कम होने की मान्यता है।
परिवार में सुख और समृद्धि आती है।
भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
संतान की रक्षा और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।
नाग पंचमी किस दिन है?
इस वर्ष नाग पंचमी सोमवार के दिन पड़ रही है।
नाग पंचमी कितनी तारीख को है?
नाग पंचमी 17 अगस्त 2026 को है।
नाग पंचमी क्यों मनाते हैं?
नाग देवता के सम्मान, भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए नाग पंचमी मनाई जाती है।
नाग पंचमी पूजा कैसे करें?
सुबह स्नान करके भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करें, जल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें तथा मंत्र जप करें।
नाग पंचमी का मंत्र क्या है?
सबसे सरल मंत्र है- ॐ नागदेवाय नमः॥
नाग पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, जीव-जंतुओं और सनातन परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई नाग पंचमी पूजा भगवान शिव और नाग देवता का आशीर्वाद दिलाने वाली मानी जाती है। यदि आप पूरे मन से पूजा करते हैं और सभी जीवों के प्रति दया का भाव रखते हैं, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है
पर्व को और खास बनाने के लिये गाइडेंस लें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से।






| दिनाँक | Friday, 21 August 2026 |
| तिथि | शुक्ल नवमी |
| वार | शुक्रवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| सूर्योदय | 5:53:47 |
| सूर्यास्त | 18:55:23 |
| चन्द्रोदय | 14:8:1 |
| नक्षत्र | अनुराधा |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 11 : 54 : 35 |
| योग | वैधृति |
| योग समाप्ति समय | 29 : 19 : 37 |
| करण I | बालव |
| सूर्यराशि | सिंह |
| चन्द्रराशि | वृश्चिक |
| राहुकाल | 10:46:53 to 12:24:35 |