भैया दूज 2022



भैया दूज पर्व तिथि व मुहूर्त 2022

भाई दूज 2022

26 अक्टूबर

भाई दूज तिथि – बुधवार, 26 अक्टूबर 2022

भाई दूज तिलक मुहूर्त - 14:41 से 15:25 बजे तक (26 अक्टूबर 2022)

द्वितीय तिथि प्रारंभ - 14:41 बजे से (26 अक्टूबर 2022)

द्वितीय तिथि समाप्त -12:44 बजे तक (27 अक्टूबर 2022)

भाई दूज 2023

14 नवंबर

भाई दूज तिथि – मंगलवार, 14 नवंबर 2023

भाई दूज तिलक मुहूर्त - 14:35 से 15:17 बजे तक (14 नवंबर 2023)

द्वितीय तिथि प्रारंभ - 14:35 बजे से (14 नवंबर 2023)

द्वितीय तिथि समाप्त -13:46 बजे तक (15 नवंबर 2023)

भाई दूज 2024

3 नवंबर

भाई दूज तिथि – रविवार, 3 नवंबर 2024

भाई दूज तिलक मुहूर्त - 13:10 से 15:20 बजे तक ( 3 नवंबर 2024)

द्वितीय तिथि प्रारंभ - 20:21 बजे से (2 नवंबर 2024)

द्वितीय तिथि समाप्त -22:04 बजे तक (3 नवंबर 2024)

भाई दूज 2025

23 अक्टूबर

भाई दूज तिथि – गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025

भाई दूज तिलक मुहूर्त - 13:12 से 15:26 बजे तक (23 अक्टूबर 2025)

द्वितीय तिथि प्रारंभ - 20:16 बजे से (22 अक्टूबर 2025)

द्वितीय तिथि समाप्त -22:46 बजे तक (23 अक्टूबर 2025)

भाई दूज 2026

11 नवंबर

भाई दूज तिथि – बुधवार, 11 नवंबर 2026

भाई दूज तिलक मुहूर्त - 13:09 से 15:18 बजे तक (11 नवंबर 2026)

द्वितीय तिथि प्रारंभ -13:59 बजे से (10 नवंबर 2026)

द्वितीय तिथि समाप्त -15:52 बजे तक (11 नवंबर 2026)

भाई दूज 2027

31-10-

भाई दूज तिथि रविवार, 31-10-2027

भाई दूज तिलक मुहूर्त दोपहर 01:11 से दोपहर 03:24 तक (31-10-2027)

द्वितीय तिथि प्रारंभ शाम 05:51 (30-10-2027) से

द्वितीय तिथि समाप्त शाम 05:12 (31-10-2027) तक

भाई दूज 2028

19-10-

भाई दूज तिथि – बृहस्पतिवार, 19-10-2028

भाई दूज तिलक मुहूर्त – दोपहर 01:14 से दोपहर 03:31 तक (19-10-2028)

द्वितीय तिथि प्रारंभ – सुबह 05:00 (19-10-2028) से

द्वितीय तिथि समाप्त – रात 01:58 (20-10-2028) तक

भाई दूज 2029

07-11-

भाई दूज तिथि – बुधवार, 07-11-2029

भाई दूज तिलक मुहूर्त – दोपहर 01:19 से दोपहर 03:21 तक (07-11-2029)

द्वितीय तिथि प्रारंभ – सुबह 06:07 (07-11-2029) से

द्वितीय तिथि समाप्त – रात 02:37 (08-11-2029) तक

भाई दूज 2030

28-10-

भाई दूज तिथि – सेमवार, 28-10-2030

भाई दूज तिलक मुहूर्त – दोपहर 01:12 से दोपहर 03:25 तक (28-10-2030)

द्वितीय तिथि प्रारंभ – रात 10:36 (27-10-2030) से

द्वितीय तिथि समाप्त – शाम 07:21 (28-10-2030) तक

भाई दूज 2031

16-11-

भाई दूज तिथि – रविवार, 16-11-2031

भाई दूज तिलक मुहूर्त – दोपहर 01:10 से दोपहर 03:19 तक (16-11-2031)

द्वितीय तिथि प्रारंभ – रात 12:28 (16-11-2031) से

द्वितीय तिथि समाप्त – रात 09:59 (16-11-2031) तक

भाई दूज 2032

04-11-

भाई दूज तिथि – बृहस्पतिवार, 04-11-2032

भाई दूज तिलक मुहूर्त – दोपहर 01:10 से दोपहर 03:22 तक (04-11-2032)

द्वितीय तिथि प्रारंभ – सुबह 11:44 (04-11-2032) से

द्वितीय तिथि समाप्त – सुबह 11:46 (05-11-2032) तक

रक्षाबंधन पर्व के समान भाई दूज पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है|  इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है| भाई दूज का पर्व भाई बहन के रिश्ते पर आधारित पर्व है, भाई दूज दीपावली के दो दिन बाद आने वाला एक ऐसा उत्सव है, जो भाई के प्रति बहन के अगाध प्रेम और स्नेह को अभिव्यक्त करता है| इस दिन बहनें अपने भाईयों की खुशहाली के लिए कामना करती हैं|

 

भाई दूज की पौराणिक मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार - कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पूर्व काल में यमुना ने यमदेव को अपने घर पर सत्कारपूर्वक भोजन कराया था|  जिससे उस दिन नारकी जीवों को यातना से छुटकारा मिला और वे तृप्त हुए|  पाप मुक्त होकर वे सभी सांसारिक बंधनों से मुक्त हो गए | उन सब ने मिलकर एक महान उत्सव मनाया जो यमलोक के राज्य को सुख पहुंचाने वाला था| इसी वजह से यह तिथि तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से विख्यात हुई|  जिस तिथि को यमुना ने यम को अपने घर भोजन कराया था, यदि उस तिथि को भाई अपनी बहन के हाथ का उत्तम भोजन ग्रहण करता है तो उसे उत्तम भोजन के साथ धन की प्राप्ति होती है| पद्म पुराण में कहा गया है कि कार्तिक शुक्लपक्ष की द्वितीया को पूर्वाह्न में यम की पूजा करके यमुना में स्नान करने वाला मनुष्य यमलोक की यातनायें नहीं भोगता अर्थात उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है|

 

भाई दूज की कहानी

यह कथा सूर्यदेव और छाया के पुत्र पुत्री यमराज तथा यमुना से संबंधित है| यमुना अक्सर अपने भाई यमराज से स्नेहवश निवेदन करती कि वे उनके घर आकर भोजन ग्रहण करें| परंतु यमराज व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात को टाल देते थे| कार्तिक माह के शुक्ल द्वितीया को यमुना अपने द्वार पर भाई यमराज को खड़ा देखकर हर्ष-विभोर हो जाती हैं| प्रसन्नचित्त होकर भाई का स्वागत सत्कार कर भोजन करवाती हैं| बहन यमुना के प्रेम, समर्पण और स्नेह से प्रसन्न होकर यमदेव ने वर मांगने को कहा, तब बहन यमुना ने भाई यमराज से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आएं तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका कर भोजन खिलाए उसे आपका भय न रहे| यमराज 'तथास्तु' कहकर यमलोक  चले गए| तब से मान्यता है कि जो भाई आज के दिन पूरी श्रद्धा से बहन के आतिथ्य को स्वीकार करता है उसे और उसकी बहन को यमदेव का भय नहीं रहता है|

पर्व को और खास बनाने के लिये गाइडेंस लें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से।

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