Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती हिन्दू धर्म का एक बहुत ही पवित्र पर्व है। यह बजरंगबली के जन्म उत्सव के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है। हनुमान जी को संकट मोचन, अंजनी सूत, पवन पुत्र आदि नामों से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी वायु देव के पुत्र और महादेव के अंश हैं। सभी देवताओं में से सबसे शीघ्र प्रसन्न होने वाले और चिरंजीव भगवान हनुमान की जयंती देशभर में अत्यंत श्रद्धाभाव एवं धूमधाम से मनाई जाती है। साल 2026 में भी यह विशेष पर्व भक्तों के लिए आस्था और भक्ति का अवसर लेकर आएगा।
अपने भक्तों के लिए भगवान हनुमान सेवा, साहस और समर्पण की प्रेरणा भी हैं। अगर आप इस हनुमान जयंती पर ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो यहां आपके लिए हनुमान जयंती की तिथि, पूजा का सही तरीका, और मंत्र जाप समेत सभी तरह की जानकारी उपलब्ध है।
हनुमान जयन्ती मुहुर्त
हनुमान जयन्ती मुहुर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 01, 2026 को 07:06 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - अप्रैल 02, 2026 को 07:41 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 20, 2027 को 04:51 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - अप्रैल 21, 2027 को 03:56 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 08, 2028 को 07:10 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - अप्रैल 09, 2028 को 03:55 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 27, 2029 को 07:55 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - अप्रैल 28, 2029 को 04:06 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 17, 2030 को 12:17 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - अप्रैल 18, 2030 को 08:49 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 07, 2031 को 12:09 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - अप्रैल 07, 2031 को 10:50 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 24, 2032 को 08:30 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - अप्रैल 25, 2032 को 08:39 पी एम बजे
हनुमान जयंती हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। इस खास दिन पर मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होते हैं, जहाँ भक्त हनुमान जी की कृपा पाने के लिए एकत्रित होते हैं।
इस दिन पूजा और व्रत के लिए सही समय जानना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। नीचे पूर्णिमा तिथि का समय दिया गया है:
| विवरण | तिथि और समय |
|---|---|
| हनुमान जयंती (तिथि) | गुरूवार, 2 अप्रैल 2026 |
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:06 बजे |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:41 बजे |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 04:35 से 05:23 बजे |
| सूर्योदय | 06:11 बजे |
| प्रातः काल पूजा मुहूर्त | सुबह 06:11 से 10:15 बजे तक |
| सांयकाल पूजा मुहूर्त | शाम 06:30 से शाम 08:00 बजे तक |
भक्त इस शुभ अवसर पर व्रत रखते हैं, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं और पूरे दिन भक्ति में लीन रहते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मकता बढ़ती है।
हनुमान जयंती की पूजा को सही तरीके से करने के लिए आवश्यक सामग्री का होना बहुत जरूरी है। अगर पहले से ही सभी चीजें तैयार हों, तो पूजा बिना किसी बाधा के शांतिपूर्वक पूरी हो जाती है। नीचे दी गई पूजा सामग्री इस दिन काम आती है:
जानें पूजन सामग्री लिस्ट:
* हनुमान जी की मूर्ति या चित्र
* गंगाजल और शुद्ध जल
* पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर)
* साफ वस्त्र (लाल या पीले रंग के)
* आभूषण या सजावट की सामग्री (यदि उपलब्ध हो)
* सिंदूर, रोली या चंदन तिलक के लिए
* ताजे फूल और माला
* धूप, अगरबत्ती और घी का दीपक
* रूई और माचिस (दीप जलाने के लिए)
* प्रसाद (जैसे फल या मिठाई)
* पूजा के लिए आसन (ऊन या लाल कपड़ा)
हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि सही तरीके से किया गया व्रत और पूजन हनुमान जी को प्रसन्न करता है और जीवन में शक्ति, साहस व सकारात्मकता लाता है। इसके लिए आप नीचे दी गई सरल हनुमान पूजा विधि हिंदी में अपना सकते हैं:
व्रत से एक दिन पहले रात को सोने से पहले भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी का स्मरण करें।
अगले दिन सूर्योदय से पहले उठें और शरीर व मन को शुद्ध रखें। स्नान करके लाल या नारंगी रंग के वस्त्र पहनें।
सुबह स्नान करके ध्यान करें और हाथ में गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प लें।
पूजा के लिए साफ और शांत स्थान चुनें। यदि संभव हो तो ऊन का आसन या लाल रंग का आसन बिछाकर उत्तर या ईशान दिशा की ओर मुख करके बैठें।
सबसे पहले भगवान श्री गणेश की पूजा करें, ताकि सभी कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण हों।
इसके बाद हनुमान जी की मूर्ति या चित्र को पूर्व दिशा में स्थापित करें और पूजा शुरू करें।
हनुमान जी को पंचामृत और शुद्ध जल से स्नान कराएं, फिर उन्हें वस्त्र और आभूषण अर्पित करें।
इसके बाद तिलक लगाएं, फूल, धूप और दीप अर्पित करें तथा घी का दीपक जलाएं। इसके लिए शुभ समय सुबह 06:11 बजे है। क्योंकि बजरंगबली का समय भी सूर्योदय के समय हुआ था।
इसके बाद हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। इससे शनि दोष के प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।
हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाएं और श्रद्धा से उनकी आरती करें।
अंत में हनुमान चालीसा का पाठ करें, जिससे पूजा पूर्ण मानी जाती है।
इस विधि से की गई पूजा से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
यह भी जानें: Hanuman Ji ki Aarti - आरती कीजै हनुमान लला की। हनुमान आरती
हनुमान जयंती के पावन अवसर पर मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सच्चे मन से हनुमान जी के मंत्रों का जप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और साहस, शक्ति व आत्मविश्वास बढ़ता है। नीचे कुछ प्रमुख मंत्र और उनके लाभ दिए गए हैं:
1. ॐ हनुमते नमः॥
यह सरल और प्रभावशाली मंत्र है। इसके जप से मन शांत होता है और भय व तनाव दूर होते हैं।
2. ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्रीरामदूताय नमः॥
इस मंत्र का जप करने से बुद्धि और एकाग्रता बढ़ती है। साथ ही यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करता है।
3. ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
यह हनुमान गायत्री मंत्र है। इसके नियमित जप से मानसिक शक्ति मजबूत होती है और जीवन में सही दिशा मिलती है।
4. ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुनाशाय नमः॥
यह मंत्र शत्रुओं और बाधाओं से रक्षा करता है। इसे जपने से आत्मबल और साहस में वृद्धि होती है।
हनुमान जयंती के दिन इन मंत्रों का जप करने से विशेष फल मिलता है और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।
हनुमान जयंती का व्रत श्रद्धा, अनुशासन और सात्विकता के साथ रखा जाता है। इस दिन व्रत रखने का उद्देश्य केवल भोजन से दूर रहना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से भी शुद्ध रहना होता है।
सुबह सूर्योदय के समय व्रत का संकल्प लेकर दिन की शुरुआत करें और पूरे दिन हनुमान जी का ध्यान, मंत्र जाप तथा हनुमान चालीसा का पाठ करें।
व्रत के दौरान हल्का और फलाहारी भोजन लेना शुभ माना जाता है। आप केले, सेब, अंगूर जैसे फल, दूध, दही या छाछ ले सकते हैं। इसके अलावा साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वडा, आलू से बनी फलाहारी डिश, कुट्टू के आटे की पूड़ी या पराठा भी खाया जा सकता है।
स्वाद के लिए केवल सेंधा नमक का ही उपयोग करें। बादाम, काजू और मूंगफली जैसे ड्राई फ्रूट्स भी ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।
व्रत में गेहूं, चावल, दाल, प्याज, लहसुन और सामान्य नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। मांसाहार, शराब और किसी भी तरह के तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें।
शाम की आरती और पूजा के बाद व्रत खोला जाता है। बुजुर्ग या अस्वस्थ लोग केवल फलाहार रखकर भी यह व्रत कर सकते हैं, जिसे समान रूप से पुण्यदायी माना जाता है।
हिन्दू धर्मग्रंथों में हनुमान जी के जन्म से सम्बंधित एक पौराणिक कथा वर्णित है। कथा के अनुसार, अमरत्व की प्राप्ति के लिए जब देवताओं व असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तब उससे निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया और आपस में ही लड़ने लगे। उस समय भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। मोहनी रूप देख देवता व असुर तो क्या स्वयं भगवान शिवजी कामातुर हो गए। इस समय भगवान शिव ने जो वीर्य त्याग किया उसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया, जिसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से केसरी नंदन मारुती संकट मोचन रामभक्त श्री हनुमान का जन्म हुआ।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी हनुमान जयंती को महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी की आराधन से न सिर्फ विघ्न एवं बाधाएं दूर होती है अपितु ग्रह-दोष भी शांत होते है। यह दिन उन लोगों के लिए विशेष होता है जो शनि सम्बंधित समस्याओं से परेशान हैं, उन्हें हनुमान जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
हनुमान जयंती के दिन निकट स्थित मंदिर जाकर हनुमान जी के दर्शन करें और उनके समक्ष घी या तेल का दीपक जलाएं। 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से हनुमान जी आपकी सभी समस्याओं को दूर करते है।
इस दिन हनुमान जी की कृपा प्राप्ति के लिए उन्हें गुलाब की माला अर्पित करें। हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है।
इस दिन धन प्राप्ति के लिए हनुमान मंदिर में हनुमानजी के सामने चमेली के तेल का दीपक प्रजव्वलित करें। इसके अतिरिक्त सिंदूर लगाकर हनुमान जी को चोला चढ़ाएं।
किसी भी तरह की धन हानि से बचने के लिए हनुमान जयंती पर 11 पीपल के पत्तों पर श्रीराम नाम लिखकर हनुमान जी को अर्पित करें। ऐसा करने से आपकी धन संबंधित समस्याएं दूर होती हैं।






| दिनाँक | Saturday, 04 April 2026 |
| तिथि | कृष्ण तृतीया |
| वार | शनिवार |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| सूर्योदय | 6:8:27 |
| सूर्यास्त | 18:41:10 |
| चन्द्रोदय | 20:57:11 |
| नक्षत्र | स्वाति |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 21 : 36 : 17 |
| योग | वज्र |
| योग समाप्ति समय | 38 : 43 : 45 |
| करण I | वणिज |
| सूर्यराशि | मीन |
| चन्द्रराशि | तुला |
| राहुकाल | 09:16:38 to 10:50:43 |