करवा चौथ 2022



करवा चौथ पर्व तिथि व मुहूर्त 2022

करवा चौथ 2022

13 अक्तूबर

करवा चौथ पूजा मुहूर्त- 17:49 से 19:05

चंद्रोदय- 20:14

चतुर्थी तिथि आरंभ- 01:58 (13 अक्तूबर)

चतुर्थी तिथि समाप्त- 03:07 (14 अक्तूबर)

करवा चौथ 2023

1 नवंबर

करवा चौथ पूजा मुहूर्त- 17:32 से 18:50

चंद्रोदय- 20:19

चतुर्थी तिथि आरंभ- 21:29 (31 अक्तूबर)

चतुर्थी तिथि समाप्त- 21:18 (1 नवंबर)

करवा चौथ 2024

20 अक्तूबर

करवा चौथ पूजा मुहूर्त- 17:42 से 18:58

चंद्रोदय- 19:59

चतुर्थी तिथि आरंभ- 06:45 (20 अक्तूबर)

चतुर्थी तिथि समाप्त- 04:16 (21 अक्तूबर)

करवा चौथ 2025

10 अक्तूबर

करवा चौथ पूजा मुहूर्त- 17:52 से 19:07

चंद्रोदय- 20:18

चतुर्थी तिथि आरंभ- 22:53 (9 अक्तूबर)

चतुर्थी तिथि समाप्त- 19:37 (10 अक्तूबर)

करवा चौथ 2026

29 अक्तूबर

करवा चौथ पूजा मुहूर्त- 17:34 से 18:52

चंद्रोदय- 20:16

चतुर्थी तिथि आरंभ- 01:06 (29 अक्तूबर)

चतुर्थी तिथि समाप्त- 22:09 (29 अक्तूबर)

करवा चौथ 2027

18-10-

करवा चौथ पूजा मुहूर्त-शाम 05:49 से शाम 07:04 तक

चंद्रोदय-शाम 07:30

चतुर्थी तिथि आरंभ-शाम 05:51 (18-10-) से

चतुर्थी तिथि समाप्त-दोपहर 04:42 (19-10-) तक

करवा चौथ 2028

07-10-

करवा चौथ पूजा मुहूर्त-शाम 06:00 से शाम 07:14 तक

चंद्रोदय-रात 08:01

चतुर्थी तिथि आरंभ-सुबह 03:35 (07-10-) से

चतुर्थी तिथि समाप्त-सुबह 04:51 (08-10-) तक

करवा चौथ 2029

26-10-

करवा चौथ पूजा मुहूर्त-शाम 05:42 से शाम 06:58 तक

चंद्रोदय-रात 08:18

चतुर्थी तिथि आरंभ-रात 10:34 (25-10-) से

चतुर्थी तिथि समाप्त-रात 12:52(27-10-) तक

करवा चौथ 2030

15-10-

करवा चौथ पूजा मुहूर्त-शाम 05:52 से शाम 07:07 तक

चंद्रोदय-रात 08:23

चतुर्थी तिथि आरंभ-रात 09:08 (14-10-) से

चतुर्थी तिथि समाप्त-रात 11:36 (15-10-) तक

करवा चौथ 2031

02-11-

करवा चौथ पूजा मुहूर्त-शाम 05:35 से शाम 06:53 तक

चंद्रोदय-शाम 07:59

चतुर्थी तिथि आरंभ-दोपहर 02:36 (02-11-) से

चतुर्थी तिथि समाप्त-दोपहर 04:16 (03-11-) तक

करवा चौथ 2032

21-10-

करवा चौथ पूजा मुहूर्त-शाम 05:45 से शाम 07:01 तक

चंद्रोदय-शाम 07:55

चतुर्थी तिथि आरंभ-शाम 06:03 (21-10-) से

चतुर्थी तिथि समाप्त-शाम 05:10 (22-10-) तक

भारत में हिंदू धर्मग्रंथों, पौराणिक ग्रंथों और शास्त्रादि के अनुसार हर महीने कोई न कोई उपवास, कोई न कोई पर्व, त्यौहार या संस्कार आदि आता ही है लेकिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को जो उपवास किया जाता है उसका सुहागिन स्त्रियों के लिये बहुत अधिक महत्व होता है। दरअसल इस दिन को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन यदि सुहागिन स्त्रियां उपवास रखें तो उनके पति की उम्र लंबी होती है और उनका गृहस्थ जीवन सुखद होने लगता है। हालांकि पूरे भारतवर्ष में हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग बड़ी धूम-धाम से इस त्यौहार को मनाते हैं लेकिन उत्तर भारत खासकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश आदि में तो इस दिन अलग ही नजारा होता है। करवाचौथ व्रत के दिन एक और जहां दिन में कथाओं का दौर चलता है तो दूसरी और दिन ढलते ही विवाहिताओं की नज़रें चांद के दिदार के लिये बेताब हो जाती हैं। चांद निकलने पर घरों की छतों का नजारा भी देखने लायक होता है। दरअसल सारा दिन पति की लंबी उम्र के लिये उपवास रखने के बाद आसमान के चमकते चांद का दिदार कर अपने चांद के हाथों से निवाला खाकर अपना उपवास खोलती हैं। करवाचौथ का व्रत सुबह सूर्योदय से पहले ही 4 बजे के बाद शुरु हो जाता है और रात को चंद्रदर्शन के बाद ही व्रत को खोला जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है और करवाचौथ व्रत की कथा सुनी जाती है। सामान्यत: विवाहोपरांत 12 या 16 साल तक लगातार इस उपवास को किया जाता है लेकिन इच्छानुसार जीवनभर भी विवाहिताएं इस व्रत को रख सकती हैं। माना जाता है कि अपने पति की लंबी उम्र के लिये इससे श्रेष्ठ कोई उपवास अतवा व्रतादि नहीं है।

पर्व को और खास बनाने के लिये गाइडेंस लें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से।

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