महावीर जयंती

महावीर जयंती 2019


जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को 599 ईसवीं पूर्व बिहार में लिच्छिवी वंश के महाराज सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला के घर हुआ| भगवान महावीर जी के बचपन का नाम वर्धमान था| उनके जन्म के बाद राज्य दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा था| जिसके चलते इनका नाम वर्धमान रखा गया| महावीर जयंती का पर्व जैन अनुयायियों द्वारा पूरी दुनिया में मनाया जाता है| जैन ग्रंथों के अनुसार, 23 वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी के निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त करने के 188  वर्ष बाद भगवान महावीर का जन्म हुआ था| अहिंसा परमो धर्म: अर्थात अहिंसा सभी धर्मों से सर्वोपरि है| यह संदेश उन्होंने पूरी दुनिया को दिया व संसार का मार्गदर्शन किया| पहले स्वयं अहिंसा का मार्ग अपनाया और फिर दूसरों को इसे अपनाने के लिये प्रेरित किया| ‘जियो और जीने दो’ का मूल मंत्र इन्हीं की देन है|

वर्धमान महावीर से जुड़ी मान्यताएं

जैन धर्म के अनुयायी मानते हैं कि वर्धमान ने 12 वर्षों की कठोर तप कर अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर लिया| जिससे उन्हें जिन कहा गया, विजेता कहा गया| उनका यह तप किसी पराक्रम से कम नहीं था| इसी के चलते उन्हें महावीर नाम से संबोधित किया गया और उनके दिखाए मार्ग पर चलने वाले जैन कहलाते हैं| जैन का तात्पर्य ही है जिन के अनुयायी| जैन धर्म का अर्थ है जिन द्वारा परिवर्तित धर्म| दीक्षा लेने के बाद भगवान महावीर ने कठिन दिगम्बर चर्या को अंगीकार किया और निर्वस्त्र रहे| हालाँकि श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार महावीर दीक्षा उपरान्त कुछ समय छोड़कर निर्वस्त्र रहे और उन्होंने केवल ज्ञान की प्राप्ति दिगम्बर अवस्था में की| ऐसा माना जाता है कि भगवान महावीर अपने पूरे साधना काल के दौरान मौन रहे|

महावीर जी के पांच सिद्धांत

मोक्ष पाने के बाद, भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत दर्शाएं जो समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की ओर ले जाते हैं| जिनमें शामिल हैं - अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अंतिम पांचवा सिद्धांत अपरिग्रह |

पहला सिद्धांत है अहिंसा,  इस सिद्धांत के अनुसार जैनों को किसी भी परिस्थिति में हिंसा से दूर रहना चाहिए| भूल कर भी किसी को कष्ट नहीं पहुँचाना है|

दूसरा सिद्धांत है सत्य, भगवान महावीर कहते हैं, हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ| जो बुद्धिमान सत्य के सानिध्य में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है|लोगों को हमेशा सत्य बोलना चाहिए|

तीसरा सिद्धांत है अस्तेय, अस्तेय का पालन करने वाले किसी भी रूप में अपने मन के मुताबिक वस्तु ग्रहण नहीं करते हैं ये लोग संयम से रहते हैं और केवल वही लेते हैं जो उन्हें दिया जाता है|

चौथा सिद्धांत है ब्रह्मचर्य, इस सिद्धांत के लिए जैनों को पवित्रता के गुणों का प्रदर्शन करने की आवश्यकता होती है; जिसके कारण वे कामुक गतिविधियों में भाग नहीं लेते|

पांचवा अंतिम सिद्धांत है अपरिग्रह, यह शिक्षा सभी पिछले सिद्धांतों को जोड़ती है| अपरिग्रह का पालन करके, जैनों की चेतना जागती है और वे सांसारिक एवं भोग की वस्तुओं का त्याग कर देते हैं|

महावीर जयंती उत्सव की गतिविधियां

जैन धर्म का अनुसरण करने वाले ऐसी कई गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं जो उन्हें अपने परिजनों से जुड़ने और भगवान महावीर को याद करने का मौका देते हैं|  इस दिन लोग महावीर जी की प्रतिमा को जल और सुगंधित तेलों से धोते हैं| यह महावीर की शुद्धता का प्रतीक है| यह नियमित पूजी जाने वाली सुंदर धार्मिक प्रतिमाओं को धोने के व्यावहारिक उद्देश्यों को भी पूरा करता है| जैनों द्वारा भगवान महावीर की प्रतिमा की शोभायात्रा निकाली जाती है| इस दौरान जैन भिक्षु एक रथ पर भगवान महावीर की प्रतिमा को लेकर हर जगह घुमाते हैं| उनके द्वारा बताये गए जीवन के सार को लोगों तक पहुँचाते हैं|

महावीर जयंती के दौरान, दुनिया भर से लोग भारत के जैन मंदिरों में दर्शन करने के लिए आते हैं| मंदिरों में जाने के अलावा, लोग महावीर और जैन धर्म से संबंधित पुरातन स्थानों पर भी जाते हैं| गोमतेश्वर, दिलवाड़ा, रणकपुर, सोनागिरि और शिखरजी जैन धर्म के कुछ सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक हैं| महावीर जयंती भगवान महावीर के जन्म व जैन धर्म की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है|

महावीर जयंती पर्व तिथि व मुहूर्त 2019

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