हरियाली तीज 2020


हरियाली तीज या श्रावणी तीज का उत्सव श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है| यह प्रमुख रुप से उत्तर भारत में मनाया जाता है| पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे कजली तीज के रूप में मनाते हैं| यह महिलाओं का उत्सव है| सावन में जब प्रकृति ने हरियाली की चादर ओढ़ी होती है तब हर किसी के मन में मोर नाचने लगते हैं| पेड़ों की डाल में झूले पड़ जाते हैं| सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत ही महत्वपूर्व है| आस्था, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है| चारों तरफ हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं| इस मौके पर महिलाएं झूला झूलती हैं, गाती हैं और खुशियां मनाती हैं|

हरियाली तीज व्रत पूजा विधि

सुबह उठ कर स्‍नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद मन में पूजा करने का संकल्प लें और 'उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये' मंत्र का जाप करें| पूजा शुरू करने से पूर्व काली मिट्टी से भगवान शिव और मां पार्वती तथा भगवान गणेश की मूर्ति बनाएं| फिर थाली में सुहाग की सामग्रियों को सजा कर माता पार्वती को अर्पण करें| ऐसा करने के बाद भगवान शिव को वस्त्र चढ़ाएं| उसके बाद तीज की कथा सुने या पढ़ें|

हरियाली तीज व्रत कथा

यह एक पौराणिक कथा है| कथा के अनुसार एक दिन भगवान शिव माता पार्वती को अपने मिलन की कथा सुनाते हैं| वे बताते हैं पार्वती तुमने मुझे अपने पति रूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिया; किन्तु मुझे पति के रूप में पा न सकीं| 108 वीं बार तुमने पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया| शिवजी कहते हैं – पार्वती तुमने हिमालय पर मुझे वर के रूप में पाने के लिए घोर तप किया था| इस दौरान तुमने अन्न-जल त्याग कर सूखे पत्ते चबाकर दिन व्यतीत किया। मौसम की परवाह किए बिना तुमने निरंतर तप किया| तुम्हारी इस स्थिति को देखकर तुम्हारे पिता बहुत दुःखी और नाराज़ थे| तुम वन में एक गुफा के भीतर मेरी आराधना में लीन थी| भाद्रपद तृतीय शुक्ल को तुमने रेत से एक शिवलिंग का निर्माण कर मेरी आराधना कि जिससे प्रसन्न होकर मैंने तुम्हारी मनोकामना पूर्ण की| इसके बाद तुमने अपने पिता से कहा कि ‘पिताजी,  मैंने अपने जीवन का लंबा समय भगवान शिव की तपस्या में बिताया है और भगवान शिव ने मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर मुझे स्वीकार भी कर लिया है| अब मैं आपके साथ एक ही शर्त पर चलूंगी कि आप मेरा विवाह भगवान शिव के साथ ही करेंगे|" पर्वतराज ने तुम्हारी इच्छा स्वीकार कर ली और तुम्हें घर वापस ले गये| कुछ समय बाद उन्होंने पूरे विधि विधान के साथ हमारा विवाह किया|”  “हे पार्वती! भाद्रपद शुक्ल तृतीया को तुमने मेरी आराधना करके जो व्रत किया था, उसी के परिणाम स्वरूप हम दोनों का विवाह संभव हो सका| इस व्रत का महत्त्व यह है कि इस व्रत को पूर्ण निष्ठा से करने वाली प्रत्येक स्त्री को मैं मन वांछित फल देता हूँ| भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि इस व्रत को जो भी स्त्री पूर्ण श्रद्धा से करेंगी उसे तुम्हारी तरह अचल सुहाग की प्राप्ति होती|

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हरियाली तीज पर्व तिथि व मुहूर्त 2020

हरियाली तीज 2020

23 जुलाई

तृतीया तिथि - गुरुवार, 23 जुलाई 2020

तृतीया तिथि प्रारंभ - 19:21 बजे (22 जुलाई 2020 ) से

तृतीया तिथि समाप्त - 17:02 बजे (23 जुलाई 2020 ) तक

हरियाली तीज 2021

11 अगस्त

तृतीया तिथि - बुधवार, 11 अगस्त 2021

तृतीया तिथि प्रारंभ - 18:05 बजे (10 अगस्त 2021) से

तृतीया तिथि समाप्त - 16:53 बजे (11 अगस्त 2021) तक

हरियाली तीज 2022

31 जुलाई

तृतीया तिथि - रविवार, 31 जुलाई 2022

तृतीया तिथि प्रारंभ - 02:59 बजे (31 जुलाई 2022) से

तृतीया तिथि समाप्त - 04:17 बजे (1अगस्त 2022) तक

हरियाली तीज 2023

19 अगस्त

तृतीया तिथि - शनिवार, 19 अगस्त 2023

तृतीया तिथि प्रारंभ - 20:00 बजे (18 अगस्त 2023) से

तृतीया तिथि समाप्त - 22:18  बजे (19 अगस्त 2023) तक

हरियाली तीज 2024

7 अगस्त

तृतीया तिथि - बुधवार, 7 अगस्त 2024

तृतीया तिथि प्रारंभ - 19:51बजे (6 अगस्त 2024) से

तृतीया तिथि समाप्त - 22:05 बजे (7 अगस्त 2024) तक

हरियाली तीज 2025

27 जुलाई

तृतीया तिथि - रविवार, 27 जुलाई 2025

तृतीया तिथि प्रारंभ - 22:41बजे (26 जुलाई 2025) से

तृतीया तिथि समाप्त - 22:41 बजे (27 जुलाई 2025) तक

हरियाली तीज 2026

15 अगस्त

तृतीया तिथि - शनिवार, 15 अगस्त 2026

तृतीया तिथि प्रारंभ - 18:46 बजे (14 अगस्त 2026) से

तृतीया तिथि समाप्त - 17:28 बजे (15 अगस्त 2026) तक


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