छठ पूजा 2022



छठ पूजा पर्व तिथि व मुहूर्त 2022

Onam 2029
22 August
Onam Festival Date - Wednesday, 22 August 2029
Thiruonam Nakshatra Starts - 04:51 Am (22 August 2029)
Thiruonam Nakshatra Ends - Till 05:39 Am (23 August 2029)

Onam 2030
09 September
Onam Festival Date - Monday, 09 September 2030
Thiruonam Nakshatra Starts - From 07:58 Pm (08 September 2030)
Thiruonam Nakshatra Ends - Till 07:00 Pm (09 September 2030)

Onam 2031
30 August
Onam Festival Date - Saturday, 30 August 2031
Thiruonam Nakshatra Starts - From 07:18 Am (30 August 2031)
Thiruonam Nakshatra Ends - Till 04:43 Am (31st August 2031)

Onam 2032
20 August
Onam Festival Date - Friday, 20 August 2032
Thiruonam Nakshatra Starts From 05:07 (August 19, 2032)
Thiruonam Nakshatra Ends - Till 02:09 (August 20, 2032) In The Afternoon

Raksha Bandhan 2027
17 August
Rakshabandhan Ritual Timing - 05:51 Am To 12:58 Pm
Purnima Date Starts From 10:28 Am (16 August 2027)
Purnima Date Ends - Till 12:58 (17 August 2027)
Bhadra Ends: Before Sunrise

Raksha Bandhan 2028
05 August
Rakshabandhan Ritual Timing - 05:45 Am To 01:39 Pm
Purnima Date Starts From 11:51 Am (04 August 2028)
Purnima Date Ends - Till 01:39 Pm (05 August 2028)
Bhadra Ends: Before Sunrise

छठ पूजा 2028

23-10-

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – सुबह 06:27

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – शाम 05:43

षष्ठी तिथि आरंभ – रात 08:54 (22-10-2028) से

षष्ठी तिथि समाप्त – रात 08:52 (23-10-2028) तक

छठ पूजा 2029

11-11-

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – सुबह 06:41

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – शाम 05:29

षष्ठी तिथि आरंभ – शाम 07:13 (10-11-2029) से

षष्ठी तिथि समाप्त – शाम 06:11 (11-11-2029) तक

छठ पूजा 2030

01-11-

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – सुबह 06:33

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – शाम 05:36

षष्ठी तिथि आरंभ – सुबह 10:24 (31-10-2030) से

षष्ठी तिथि समाप्त – सुबह 08:04 (01-11-2030) तक

छठ पूजा 2031

20-11-

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – सुबह 06:47

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – शाम 05:26

षष्ठी तिथि आरंभ – दोपहर 01:59 (19-11-2031) से

षष्ठी तिथि समाप्त – सुबह 11:29 (20-11-2031) तक

छठ पूजा 2032

09-11-

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – सुबह 06:39

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – शाम 05:30

षष्ठी तिथि आरंभ – सुबह 09:19 (08-11-2032) से

षष्ठी तिथि समाप्त – सुबह 07:49 (09-11-2032) तक

नवरात्र, दूर्गा पूजा की तरह छठ पूजा भी हिंदूओं का प्रमुख त्यौहार है। क्षेत्रीय स्तर पर बिहार में इस पर्व को लेकर एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्यदेव की उपासना का पर्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ को सूर्य देवता की बहन हैं। मान्यता है कि छठ पर्व में सूर्योपासना करने से छठ माई प्रसन्न होती हैं और घर परिवार में सुख शांति व धन धान्य से संपन्न करती हैं।

कब मनाया जाता है छठ पूजा का पर्व

सूर्य देव की आराधना का यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। चैत्र शुक्ल षष्ठी व कार्तिक शुक्ल षष्ठी इन दो तिथियों को यह पर्व मनाया जाता है। हालांकि कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाये जाने वाला छठ पर्व मुख्य माना जाता है। कार्तिक छठ पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई, छठ, छठ माई पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा आदि कई नामों से जाना जाता है।

क्यों करते हैं छठ पूजा

छठ पूजा करने या उपवास रखने के सबके अपने अपने कारण होते हैं लेकिन मुख्य रूप से छठ पूजा सूर्य देव की उपासना कर उनकी कृपा पाने के लिये की जाती है। सूर्य देव की कृपा से सेहत अच्छी रहती है। सूर्य देव की कृपा से घर में धन धान्य के भंडार भरे रहते हैं। छठ माई संतान प्रदान करती हैं। सूर्य सी श्रेष्ठ संतान के लिये भी यह उपवास रखा जाता है। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये भी इस व्रत को रखा जाता है।

कौन हैं देवी षष्ठी और कैसे हुई उत्पत्ति

छठ देवी को सूर्य देव की बहन बताया जाता है। लेकिन छठ व्रत कथा के अनुसार छठ देवी ईश्वर की पुत्री देवसेना बताई गई हैं। देवसेना अपने परिचय में कहती हैं कि वह प्रकृति की मूल प्रवृति के छठवें अंश से उत्पन्न हुई हैं यही कारण है कि मुझे षष्ठी कहा जाता है। देवी कहती हैं यदि आप संतान प्राप्ति की कामना करते हैं तो मेरी विधिवत पूजा करें। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को करने का विधान बताया गया है।

पौराणिक ग्रंथों में इस रामायण काल में भगवान श्री राम के अयोध्या आने के पश्चात माता सीता के साथ मिलकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्योपासना करने से भी जोड़ा जाता है, महाभारत काल में कुंती द्वारा विवाह से पूर्व सूर्योपासना से पुत्र की प्राप्ति से भी इसे जोड़ा जाता है।

सूर्यदेव के अनुष्ठान से उत्पन्न कर्ण जिन्हें अविवाहित कुंती ने जन्म देने के बाद नदी में प्रवाहित कर दिया था वह भी सूर्यदेव के उपासक थे। वे घंटों जल में रहकर सूर्य की पूजा करते। मान्यता है कि कर्ण पर सूर्य की असीम कृपा हमेशा बनी रही। इसी कारण लोग सूर्यदेव की कृपा पाने के लिये भी कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्योपासना करते हैं।

छठ पूजा के चार दिन

छठ पूजा का पर्व चार दिनों तक चलता है –

  1. छठ पूजा का पहला दिन नहाय खाय – छठ पूजा का त्यौहार भले ही कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है लेकिन इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय के साथ होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रती स्नान आदि कर नये वस्त्र धारण करते हैं और शाकाहारी भोजन लेते हैं। व्रती के भोजन करने के पश्चात ही घर के बाकि सदस्य भोजन करते हैं।
  2. छठ पूजा का दूसरा दिन खरना – कार्तिक शुक्ल पंचमी को पूरे दिन व्रत रखा जाता है व शाम को व्रती भोजन ग्रहण करते हैं। इसे खरना कहा जाता है। इस दिन अन्न व जल ग्रहण किये बिना उपवास किया जाता है। शाम को चाव व गुड़ से खीर बनाकर खाया जाता है। नमक व चीनी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। चावल का पिठ्ठा व घी लगी रोटी भी खाई प्रसाद के रूप में वितरीत की जाती है।
  3. षष्ठी के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है। इसमें ठेकुआ विशेष होता है। कुछ स्थानों पर इसे टिकरी भी कहा जाता है। चावल के लड्डू भी बनाये जाते हैं। प्रसाद व फल लेकर बांस की टोकरी में सजाये जाते हैं। टोकरी की पूजा कर सभी व्रती सूर्य को अर्घ्य देने के लिये तालाब, नदी या घाट आदि पर जाते हैं। स्नान कर डूबते सूर्य की आराधना की जाती है।

अगले दिन यानि सप्तमी को सुबह सूर्योदय के समय भी सूर्यास्त वाली उपासना की प्रक्रिया को दोहराया जाता है। विधिवत पूजा कर प्रसाद बांटा कर छठ पूजा संपन्न की जाती है।

पर्व को और खास बनाने के लिये गाइडेंस लें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से।

एस्ट्रो लेख

कार्तिक मास 2021 - पवित्र नदी में स्नान औऱ दीपदान का महीना

छठ पर्व पर बन रहे हैं शुभ योग, बस भूलकर भी ना करें ये गलतियां

छठ पूजा व्रत विधि और शुभ मुहूर्त

Chat now for Support
Support