दिवाली 2022



दिवाली पर्व तिथि व मुहूर्त 2022

दिवाली 2022

24 अक्तूबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 18:52 से 20:13

प्रदोष काल- 17:38 से 20:13

वृषभ काल- 18:52 से 20:48

अमावस्या तिथि आरंभ- 17:26 (24 अक्तूबर)

अमावस्या तिथि समाप्त- 16:17 (25 अक्तूबर)

दिवाली 2023

12 नवंबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 17:39 से 19:34

प्रदोष काल- 17:25 से 20:05

वृषभ काल- 17:39 से 19:34

अमावस्या तिथि आरंभ- 14:44 (12 नवंबर)

अमावस्या तिथि समाप्त- 14:56 (13 नवंबर)

दिवाली 2024

1 नवंबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 17:31 से 18:16 (*स्थिर लग्न रहित)

प्रदोष काल- 17:31 से 20:08

वृषभ काल- 18:19 से 20:05

अमावस्या तिथि आरंभ- 15:52 (31 अक्तूबर)

अमावस्या तिथि समाप्त- 18:16 (01 नवंबर)

दिवाली 2025

20 अक्तूबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 19:07 से 20:15

प्रदोष काल- 17:42 से 20:15

वृषभ काल- 19:07 से 21:03

अमावस्या तिथि आरंभ- 15:44 (20 अक्तूबर)

अमावस्या तिथि समाप्त- 17:54 (21 अक्तूबर)

दिवाली 2026

08 नवंबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 17:53 से 19:49

प्रदोष काल- 17:27 से 20:06

वृषभ काल- 17:53 से 19:49

अमावस्या तिथि आरंभ- 11:27 (08 नवंबर)

अमावस्या तिथि समाप्त- 12:30 (09 नवंबर)

दिवाली 2027

29-10-

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त-शाम 06:34 से शाम 07:05 तक

प्रदोष काल-शाम 05:29 से रात 08:13 तक

वृषभ काल-शाम 06:34 से रात 08:30 तक

अमावस्या तिथि आरंभ-रात 08:47 (28-10-) से

अमावस्या तिथि समाप्त-शाम 07:05 (29-10-) तक

दिवाली 2028

17-10-

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त-शाम 07:19 से रात 08:20 तक

प्रदोष काल-शाम 05:49 से रात 08:20 तक

वृषभ काल-शाम 07:19 से रात 09:14 तक

अमावस्या तिथि आरंभ-दोपहर 12:04 (17-10-) से

अमावस्या तिथि समाप्त-सुबह 08:26 (18-10-) तक

दिवाली 2029

05-11-

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त-शाम 06:05 से रात 08:00 तक

प्रदोष काल-शाम 05:33 से रात 08:10 तक

वृषभ काल-शाम 06:05 से रात 08:00 तक

अमावस्या तिथि आरंभ-दोपहर 01:44 (05-11-) से

अमावस्या तिथि समाप्त-सुबह 09:53 (06-11-) तक

दिवाली 2030

26-10-

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त-शाम 06:45 से रात 08:15 तक

प्रदोष काल-शाम 05:41 से रात 08:15 तक

वृषभ काल-शाम 06:45 से रात 08:41 तक

अमावस्या तिथि आरंभ-सुबह 04:40 (26-10-) से

अमावस्या तिथि समाप्त-रात 01:46 (27-10-) तक

दिवाली 2031

14-11-

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त-शाम 05:31 से शाम 07:27 तक

प्रदोष काल-शाम 05:28 से रात 08:07 तक

वृषभ काल-शाम 05:31 से शाम 07:27 तक

अमावस्या तिथि आरंभ-सुबह 04:23 (14-11-) से

अमावस्या तिथि समाप्त-रात 02:38 (15-11-) तक

दिवाली 2032

02-11-

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त-शाम 06:16 से रात 08:11 तक

प्रदोष काल-शाम 05:35 से रात 08:11 तक

वृषभ काल-शाम 06:16 से रात 08:11 तक

अमावस्या तिथि आरंभ-सुबह 10:13 (02-11-) से

अमावस्या तिथि समाप्त-सुबह 11:14 (03-11-) तक

दिवाली या कहें दीपावली भारतवर्ष में मनाया जाने वाला हिंदूओं का एक ऐसा पर्व है जिसके बारे में लगभग सब जानते हैं। प्रभु श्री राम की अयोध्या वापसी पर लोगों ने उनका स्वागत घी के दिये जलाकर किया। अमावस्या की काली रात रोशन भी रोशन हो गई। अंधेरा मिट गया उजाला हो गया यानि कि अज्ञानता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश हर और फैलने लगा। इसलिये दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है। दिवाली का त्यौहार जब आता है तो साथ में अनेक त्यौहार लेकर आता है। एक और यह जीवन में ज्ञान रुपी प्रकाश को लाने वाला है तो वहीं सुख-समृद्धि की कामना के लिये भी दिवाली से बढ़कर कोई त्यौहार नहीं होता इसलिये इस अवसर पर लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भैया दूज आदि त्यौहार दिवाली के साथ-साथ ही मनाये जाते हैं। सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक हर लिहाज से दिवाली बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है। वर्तमान में तो इस त्यौहार ने धार्मिक भेदभाव को भी भुला दिया है और सभी धर्मों के लोग इसे अपने-अपने तरीके से मनाने लगे हैं। हालांकि पूरी दुनिया में दिवाली से मिलते जुलते त्यौहार अलग-अलग नामों से मनाये जाते हैं लेकिन भारतवर्ष में विशेषकर हिंदूओं में दिवाली का त्यौहार बहुत मायने रखता है।

 

दिवाली और लक्ष्मी पूजा

 

माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिये इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। घर में सुख-समृद्धि बने रहे और मां लक्ष्मी स्थिर रहें इसके लिये दिनभर मां लक्ष्मी का उपवास रखने के उपरांत सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न (वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है) में मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये। लग्न व मुहूर्त का समय स्थान के अनुसार ही देखना चाहिये।

पर्व को और खास बनाने के लिये गाइडेंस लें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से।

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