ओणम 2026 का पर्व मलयालम पंचांग के अनुसार मनाया जाएगा। यह त्योहार चिंगम माह में पड़ने वाले तिरुवोणम (श्रवण) नक्षत्र के दिन मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 में ओणम 26 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा।
ओणम मुहुर्त
ओणम मुहुर्त
थिरुवोणम् नक्षत्रम् प्रारम्भ - अगस्त 25, 2026 को 10:51 पी एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् समाप्त - अगस्त 27, 2026 को 12:48 ए एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् प्रारम्भ - सितम्बर 12, 2027 को 02:58 ए एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् समाप्त - सितम्बर 13, 2027 को 06:04 ए एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् प्रारम्भ - सितम्बर 01, 2028 को 01:23 ए एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् समाप्त - सितम्बर 02, 2028 को 04:03 ए एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् प्रारम्भ - अगस्त 22, 2029 को 04:51 ए एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् समाप्त - अगस्त 23, 2029 को 05:39 ए एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् प्रारम्भ - सितम्बर 08, 2030 को 07:58 पी एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् समाप्त - सितम्बर 09, 2030 को 07:00 पी एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् प्रारम्भ - अगस्त 30, 2031 को 07:18 ए एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् समाप्त - अगस्त 31, 2031 को 04:43 ए एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् प्रारम्भ - अगस्त 19, 2032 को 05:07 पी एम बजे
थिरुवोणम् नक्षत्रम् समाप्त - अगस्त 20, 2032 को 02:09 पी एम बजे
ओणम केरल का सबसे प्रमुख और लोकप्रिय त्योहार है, जिसे पूरे 10 दिनों तक बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व राजा महाबली के पृथ्वी आगमन की स्मृति में मनाया जाता है। साथ ही यह भगवान विष्णु के वामन अवतार से भी जुड़ा हुआ है। वर्ष 2026 में यह पर्व 26 अगस्त को मनाया जाएगा, जिसे तिरुवोणम भी कहा जाता है।
प्राचीन परंपराओं के अनुसार "अथम 10 ओणम" कहावत काफी प्रसिद्ध है। इसका अर्थ है कि यह उत्सव अथम (हस्त) नक्षत्र से शुरू होकर तिरुवोणम (श्रवण) नक्षत्र के दिन समाप्त होता है।
केरल में यह पर्व अत्यंत श्रद्धा, भव्यता और उल्लास के साथ मनाया जाता है। दस दिनों तक चलने वाला यह उत्सव केरल की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और लोगों के उत्साह का प्रतीक माना जाता है।
ओणम के दस दिनों में प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनका उद्देश्य राजा महाबली का स्वागत करना होता है।
इस अवसर पर नाम का भव्य पारंपरिक भोज तैयार किया जाता है। घर की महिलाएं लगभग 11 से 13 या उससे अधिक पारंपरिक व्यंजन बनाती हैं। केले के पत्ते पर परोसे जाने वाले प्रमुख व्यंजनों में शामिल हैं-
मंगा करी
पुलिस्सेरी
एलिश्शेरी
ओलन
इंजी करी
चेन्ना मेझुक्कुपुरट्टी
परिप्पु करी
सांभर
पचड़ी
अवियल
रसम
घी (नेय्य)
थोरन
इंजी थायर
शक्कर वरट्टी
इसके अलावा पायसम नामक पारंपरिक मिठाई भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसे चावल, नारियल, दूध और चीनी से बनाया जाता है।
ओणम के दौरान वल्लमकली (स्नेक बोट रेस) का विशेष आयोजन किया जाता है, जिसमें सैकड़ों लोग लंबी नौकाओं में बैठकर प्रतियोगिता में भाग लेते हैं।
सजे-धजे हाथियों की शोभायात्राएं भी इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण होती हैं।
भगवान विष्णु के वामन अवतार, जिन्हें त्रिक्काकरा अप्पन भी कहा जाता है, की प्रतिमा घर में स्थापित कर पूजा की जाती है।
पूरे दस दिनों तक नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पुलिकली नृत्य में कलाकार बाघ का रूप धारण कर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते हैं।
राजा महाबली असुर वंश के राजा थे, लेकिन वे अत्यंत न्यायप्रिय, दयालु और प्रजा का हित चाहने वाले शासक थे। उनके शासनकाल में राज्य में सुख, समृद्धि और खुशहाली थी। यही कारण है कि केरल में उनके शासन को स्वर्ण युग माना जाता है।
मान्यता है कि भगवान विष्णु से वरदान मिलने के बाद राजा महाबली वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आते हैं। उनके स्वागत के लिए ही ओणम का पर्व मनाया जाता है।
ओणम भारत का प्रमुख फसल उत्सव भी है। केरल में धान मुख्य फसल है और यह पर्व नई फसल की खुशियों का प्रतीक माना जाता है।
ओणम प्रकृति, समृद्धि और खुशहाली का उत्सव है। इस दिन कई विशेष परंपराओं का पालन किया जाता है।
घरों के आंगन में रंग-बिरंगे फूलों से सुंदर रंगोली बनाई जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में पूकलम कहा जाता है।
राजा महाबली के स्वागत के लिए घरों में दीपक जलाए जाते हैं।
परिवार के सभी सदस्य पूकलम के आसपास एकत्र होकर गीत गाते और पारंपरिक नृत्य करते हैं।
पहले दिन छोटी पूकलम बनाई जाती है और प्रत्येक दिन उसमें फूलों की नई परत जोड़कर उसे बड़ा किया जाता है।
यह प्रक्रिया दसवें दिन तक जारी रहती है।
इस अवसर पर लोग अपने परिजनों और मित्रों को नए वस्त्र भेंट करते हैं, जिन्हें ओणक्कोडी कहा जाता है।
वैष्णव परंपरा के अनुसार राजा महाबली एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उन्होंने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। उनकी बढ़ती लोकप्रियता से देवता चिंतित हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता मांगी।
राजा महाबली भगवान विष्णु के परम भक्त थे, इसलिए भगवान ने उनसे युद्ध करने के बजाय वामन नामक बौने ब्राह्मण का रूप धारण किया। वे महाबली के पास पहुंचे और उनसे केवल तीन पग भूमि दान में मांगी।
दान का वचन मिलते ही भगवान वामन ने विराट रूप धारण कर लिया। पहले दो पगों में उन्होंने पृथ्वी और आकाश को नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान न बचने पर राजा महाबली ने अपना सिर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया।
राजा महाबली की भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आने का वरदान दिया। इसी वार्षिक आगमन की स्मृति में ओणम का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
आज भी लोग ओणम का बेसब्री से इंतजार करते हैं और नई फसल, समृद्धि तथा खुशहाली का स्वागत हर्षोल्लास के साथ करते हैं।
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| दिनाँक | Friday, 28 August 2026 |
| तिथि | कृष्ण प्रतिपदा |
| वार | शुक्रवार |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| सूर्योदय | 5:57:26 |
| सूर्यास्त | 18:47:55 |
| चन्द्रोदय | 18:54:21 |
| नक्षत्र | शतभिषा |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 27 : 14 : 5 |
| योग | सुकर्मा |
| योग समाप्ति समय | 30 : 37 : 1 |
| करण I | बालव |
| सूर्यराशि | सिंह |
| चन्द्रराशि | कुम्भ |
| राहुकाल | 10:46:21 to 12:22:40 |