Pradosh Vrat 2026: क्या आपने कभी सोचा है कि प्रदोष व्रत को इतना खास क्यों माना जाता है? हिंदू धर्म में व्रत और उपवास केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और ईश्वर की कृपा पाने का माध्यम भी हैं। इन्हीं में से एक है प्रदोष व्रत, जो हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होकर भक्तों के कष्ट दूर करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। साल 2026 में भी कुल 24 प्रदोष व्रत पड़ेंगे, जिनमें सोम प्रदोष, मंगल प्रदोष और शनि प्रदोष विशेष फलदायी माने जाते हैं।
आइए विस्तार से जानते हैं कि प्रदोष व्रत 2026 कब है, इसकी पूजा विधि, कथा, महत्व और नियम क्या हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं – एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। इस तरह पूरे साल में 24 प्रदोष व्रत होते हैं।
सोम प्रदोष व्रत – जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है, तब इसे सोम प्रदोष कहते हैं।
मंगल प्रदोष व्रत – मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत मंगल प्रदोष कहलाता है।
शनि प्रदोष व्रत – शनिवार को आने वाला प्रदोष व्रत शनि प्रदोष कहलाता है।
इन दिनों व्रत करने से विशेष फल प्राप्त होता है। साल 2026 में आने वाले सभी प्रदोष व्रत की तिथियां हिंदू पंचांग अनुसार प्रकाशित की गई हैं, जिन्हें देखकर आप आसानी से व्रत का पालन कर सकते हैं।
1 जनवरी 2026, बृहस्पतिवार, गुरु प्रदोष व्रत: 1 जनवरी सुबह 01:47 से 1 जनवरी रात 10:22 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 05:35 से 08:19 बजे तक)
16 जनवरी 2026, शुक्रवार, शुक्र प्रदोष व्रत: 15 जनवरी रात 08:16 से 16 जनवरी रात 10:21 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 05:47 से 08:29 बजे तक)
30 जनवरी 2026, शुक्रवार, शुक्र प्रदोष व्रत: 30 जनवरी सुबह 11:09 से 31 जनवरी सुबह 08:25 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 05:59 से 08:37 बजे तक)
14 फरवरी 2026, शनिवार, शनि प्रदोष व्रत: 14 फरवरी दोपहर 04:01 से 15 फरवरी शाम 05:04 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 06:10 से 08:44 बजे तक)
1 मार्च 2026, रविवार, रवि प्रदोष व्रत: 28 फरवरी रात 08:43 से 1 मार्च शाम 07:09 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 06:21 से 07:09 बजे तक)
16 मार्च 2026, सोमवार, सोम प्रदोष व्रत: 16 मार्च सुबह 09:40 से 17 मार्च सुबह 09:23 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 06:30 से 08:54 बजे तक)
30 मार्च 2026, सोमवार, सोम प्रदोष व्रत: 30 मार्च सुबह 07:09 से 31 मार्च सुबह 06:55 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 06:38 से 08:57 बजे तक)
15 अप्रैल 2026, बुधवार, बुध प्रदोष व्रत: 15 अप्रैल रात 12:12 से 15 अप्रैल रात 10:31 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 06:47 से 09:00 बजे तक)
28 अप्रैल 2026, मंगलवार, भौम प्रदोष व्रत: 28 अप्रैल शाम 06:51 से 29 अप्रैल शाम 07:51 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 06:54 से 09:04 बजे तक)
14 मई 2026, बृहस्पतिवार, गुरु प्रदोष व्रत: 14 मई सुबह 11:20 से 15 मई सुबह 08:31 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 07:04 से 09:09 बजे तक)
28 मई 2026, बृहस्पतिवार, गुरु प्रदोष व्रत: 28 मई सुबह 07:56 से 29 मई सुबह 09:50 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 07:12 से 09:15 बजे तक)
12 जून 2026, शुक्रवार, शुक्र प्रदोष व्रत: 12 जून शाम 07:36 से 13 जून दोपहर 04:07 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 07:36 से 09:20 बजे तक)
27 जून 2026, शनिवार, शनि प्रदोष व्रत: 26 जून रात 10:22 से 28 जून रात 12:43 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 07:23 से 09:23 बजे तक)
12 जुलाई 2026, रविवार, रवि प्रदोष व्रत: 12 जुलाई सुबह 02:04 से 12 जुलाई रात 10:29 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 07:22 से 09:24 बजे तक)
26 जुलाई 2026, रविवार, रवि प्रदोष व्रत: 26 जुलाई दोपहर 01:57 से 27 जुलाई शाम 04:14 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 07:16 से 09:21 बजे तक)
10 अगस्त 2026, सोमवार, सोम प्रदोष व्रत: 10 अगस्त सुबह 08:00 से 11 अगस्त सुबह 04:54 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 07:05 से 09:14 बजे तक)
25 अगस्त 2026, मंगलवार, भौम प्रदोष व्रत: 25 अगस्त सुबह 06:20 से 26 अगस्त सुबह 07:59 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 06:51 से 09:04 बजे तक)
8 सितम्बर 2026, मंगलवार, भौम प्रदोष व्रत: 8 सितम्बर दोपहर 02:42 से 9 सितम्बर दोपहर 12:30 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 06:35 से 08:52 बजे तक)
24 सितम्बर 2026, बृहस्पतिवार, गुरु प्रदोष व्रत: 23 सितम्बर रात 10:50 से 24 सितम्बर रात 11:18 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 06:16 से 08:39 बजे तक)
8 अक्टूबर 2026, बृहस्पतिवार, गुरु प्रदोष व्रत: 7 अक्टूबर रात 11:16 से 8 अक्टूबर रात 10:15 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 05:59 से 08:27 बजे तक)
23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार, शुक्र प्रदोष व्रत: 23 अक्टूबर दोपहर 02:35 से 24 अक्टूबर दोपहर 01:36 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 05:44 से 08:16 बजे तक)
6 नवम्बर 2026, शुक्रवार, शुक्र प्रदोष व्रत: 6 नवम्बर सुबह 10:30 से 7 नवम्बर सुबह 10:47 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 05:33 से 08:09 बजे तक)
22 नवम्बर 2026, रविवार, रवि प्रदोष व्रत: 22 नवम्बर सुबह 04:56 से 23 नवम्बर सुबह 02:36 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 05:25 से 08:06 बजे तक)
6 दिसम्बर 2026, रविवार, रवि प्रदोष व्रत: 6 दिसम्बर रात 12:51 से 7 दिसम्बर सुबह 02:22 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 05:24 से 08:07 बजे तक)
21 दिसम्बर 2026, सोमवार, सोम प्रदोष व्रत: 21 दिसम्बर शाम 05:36 से 22 दिसम्बर दोपहर 02:23 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 05:36 से 08:13 बजे तक)
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प्रदोष व्रत का संबंध सीधे भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने वाले भक्तों के जीवन से पाप और दुख समाप्त होते हैं। इस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से दोगुना फल मिलता है।
इस व्रत को करने से व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मिक बल मिलता है।
संतान प्राप्ति, विवाह और परिवारिक सुख के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना गया है।
शनि और मंगल से जुड़ी समस्याएं भी इस व्रत से दूर होती हैं।
जो लोग कर्ज या आर्थिक संकट में हैं, उनके लिए प्रदोष व्रत राहत लेकर आता है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि सरल और प्रभावशाली है।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
पूरे दिन उपवास रखने का संकल्प लें।
शाम के समय प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में शिवलिंग का जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत, पुष्प और फल भगवान शिव को अर्पित करें।
शिव मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
माता पार्वती की पूजा करें और दीप जलाएं।
व्रत कथा का श्रवण अवश्य करें।
अंत में आरती कर प्रसाद बांटें।
व्रत वाले दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
नकारात्मक विचार और क्रोध से दूर रहना चाहिए।
दिनभर सात्विक भोजन करना चाहिए या निर्जल उपवास रखना चाहिए।
शाम को केवल भगवान शिव का ध्यान करें और मनोरंजन से दूरी बनाएं।
दूसरों की सेवा करना और दान करना इस व्रत को सफल बनाता है।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, एक समय जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें से हलाहल नामक विष निकला। इस विष से संपूर्ण सृष्टि का नाश होने लगा। तभी देवताओं ने भगवान शिव को पुकारा। भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। इसके बाद देवताओं ने भगवान शिव की स्तुति की और त्रयोदशी तिथि को उनकी पूजा की। उस दिन से ही प्रदोष व्रत का प्रचलन शुरू हुआ।
यह कथा यह संदेश देती है कि भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
रोग, शोक और भय से मुक्ति मिलती है।
विवाह और संतान प्राप्ति की बाधाएं दूर होती हैं।
आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
पितृदोष और ग्रहदोष दूर होते हैं।
शनि और मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
क्या करें:
व्रत वाले दिन सात्विक भोजन करें।
शिवलिंग पर बेलपत्र, जल और दूध चढ़ाएं।
दान-पुण्य करें।
शिव मंत्र का जाप करें।
क्या न करें:
मांसाहार, शराब और नकारात्मक कार्यों से बचें।
किसी का अपमान या बुरा मत करें।
क्रोध, आलस्य और झूठ से बचें।
शिवलिंग पर तुलसी पत्र अर्पित न करें।
साल 2026 में कई प्रदोष व्रत सोमवार, मंगलवार और शनिवार को पड़ेंगे। ये विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।
सोम प्रदोष व्रत – विवाह और संतान प्राप्ति की बाधाओं को दूर करने वाला।
मंगल प्रदोष व्रत – कर्ज और आर्थिक संकट से छुटकारा दिलाने वाला।
शनि प्रदोष व्रत – शनि के प्रकोप और बाधाओं से रक्षा करने वाला।
इन खास दिनों पर प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
प्रदोष व्रत के उपाय:
व्रत वाले दिन गरीबों को भोजन कराएं।
शिवलिंग पर गंगाजल और दूध से अभिषेक करें।
बेलपत्र पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर अर्पित करें।
प्रदोष व्रत मंत्र:
ॐ नमः शिवाय
ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
इन मंत्रों का जाप प्रदोष व्रत पर करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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प्रदोष व्रत 2026 भक्तों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जब वे भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके अपने जीवन की परेशानियों को दूर कर सकते हैं। यह व्रत सरल है, लेकिन इसका महत्व बेहद गहरा है। पूजा विधि, कथा और नियमों का पालन करके आप इस व्रत का पूरा फल प्राप्त कर सकते हैं। जो भी भक्त नियमित रूप से प्रदोष व्रत करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।






| दिनाँक | Friday, 02 January 2026 |
| तिथि | शुक्ल चतुर्दशी |
| वार | शुक्रवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| सूर्योदय | 7:14:41 |
| सूर्यास्त | 17:36:27 |
| चन्द्रोदय | 16:19:1 |
| नक्षत्र | मृगशिरा |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 20 : 5 : 18 |
| योग | शुक्ल |
| योग समाप्ति समय | 13 : 7 : 27 |
| करण I | वणिज |
| सूर्यराशि | धनु |
| चन्द्रराशि | वृष |
| राहुकाल | 11:07:50 to 12:25:34 |