वट सावित्री पूजा में बरगद को क्या चढ़ाएं? जानें 4 शुभ चीजें और पूजा विधि

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वट सावित्री पूजा में बरगद को क्या चढ़ाएं? जानें 4 शुभ चीजें और पूजा विधि

Vat Savitri Pooja: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं। ज्येष्ठ मास में आने वाला यह पावन व्रत माता सावित्री और सत्यवान की अमर कथा से जुड़ा हुआ है, जो प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक मानी जाती है।

इस दिन महिलाएं व्रत रखकर बरगद यानी वट वृक्ष की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष में त्रिदेवों का वास होता है और इसकी पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि वट सावित्री पूजा में बरगद के पेड़ को कौन-सी चीजें अर्पित करनी चाहिए ताकि व्रत का पूरा फल मिल सके।

वट सावित्री पूजा में बरगद को अर्पित करें ये 4 चीजें

ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि पूजा के दौरान कुछ विशेष वस्तुएं वट वृक्ष को अर्पित की जाएं, तो पूजा अधिक फलदायी मानी जाती है। आइए जानते हैं कि वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ को कौन-सी 4 चीजें अर्पित करनी चाहिए और उनका धार्मिक महत्व क्या है।

1. कच्चा सूत या लाल मौली

वट सावित्री पूजा में बरगद के पेड़ पर कच्चा सूत या लाल मौली बांधना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए सूत लपेटती हैं और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।

धार्मिक महत्व

कच्चा धागा पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। यह प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने की भावना को दर्शाता है।

कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?

अधिकतर महिलाएं 7, 11 या 21 बार वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। परिक्रमा करते समय सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना भी शुभ माना जाता है।

2. जल और दूध अर्पित करें

वट वृक्ष की जड़ में जल और थोड़ा दूध अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता

हिंदू धर्म में पेड़-पौधों को देवतुल्य माना गया है। जल अर्पित करना जीवन और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि दूध पवित्रता और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।

क्या लाभ मिलता है?

  • घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है

  • वैवाहिक जीवन में सुख बना रहता है

  • परिवार में शांति और समृद्धि आती है

  • पूजा पूर्ण मानी जाती है

जल चढ़ाते समय महिलाएं अपने पति और परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।

3. रोली, अक्षत और फूल

वट सावित्री पूजा में बरगद के पेड़ को रोली, अक्षत यानी चावल और फूल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

रोली का महत्व

रोली को सौभाग्य और मंगल का प्रतीक माना जाता है। यह पूजा में सकारात्मकता और शुभता लाती है।

अक्षत का महत्व

अक्षत यानी साबुत चावल पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। पूजा में अक्षत चढ़ाने से जीवन में स्थिरता और सुख की प्राप्ति की मान्यता है।

फूल का महत्व

फूल श्रद्धा, प्रेम और भक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। सुगंधित फूल चढ़ाने से पूजा का वातावरण पवित्र और शांत बनता है।

4. मिठाई और भोग

वट वृक्ष को मिठाई, फल, भीगे चने या घर में बने पकवान का भोग लगाना भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

धार्मिक मान्यता

भोग अर्पित करना भगवान और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक है। इससे पूजा पूर्ण मानी जाती है और व्रत का पुण्य फल बढ़ता है।

कौन-से भोग शुभ माने जाते हैं?

  • भीगे हुए चने

  • पूड़ी और हलवा

  • फल

  • मिठाई

  • सूखे मेवे

भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार और जरूरतमंद लोगों में बांटना शुभ माना जाता है।

वट सावित्री पूजा की सही विधि

वट सावित्री व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा की तैयारी करें।

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि

व्रत का संकल्प लें: भगवान और माता सावित्री का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

पूजा सामग्री तैयार करें

पूजा की थाली में:

  • रोली

  • अक्षत

  • फूल

  • धूप-दीप

  • मिठाई

  • जल

  • कच्चा सूत रखें।

वट वृक्ष की पूजा करें: बरगद के पेड़ के पास जाकर जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद रोली और अक्षत चढ़ाएं।

परिक्रमा करें: कच्चा सूत लपेटते हुए वट वृक्ष की परिक्रमा करें और पति की लंबी आयु की कामना करें।

वट सावित्री व्रत कथा सुनें: सावित्री और सत्यवान की कथा सुनना या पढ़ना व्रत का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है। मान्यता है कि कथा सुनने से व्रत पूर्ण माना जाता है और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

वट सावित्री व्रत आरती करें: अंत में दीपक जलाकर वट सावित्री व्रत की आरती करें और पति की लंबी आयु तथा परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

वट सावित्री व्रत में किन बातों का ध्यान रखें?

  • पूजा श्रद्धा और शांत मन से करें

  • व्रत के दौरान क्रोध और विवाद से बचें

  • साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें

  • बरगद के पेड़ को नुकसान न पहुंचाएं

  • कथा सुनना न भूलें

  • जरूरतमंदों को दान करें

क्या अविवाहित महिलाएं भी वट सावित्री पूजा कर सकती हैं?

जी हां, कई स्थानों पर अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए वट सावित्री पूजा करती हैं। हालांकि यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं का माना जाता है।

वट सावित्री व्रत के आध्यात्मिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत केवल पति की लंबी उम्र के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और पारिवारिक सुख के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

पूजा से मिलने वाले लाभ:

  • वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है

  • परिवार में सकारात्मक ऊर्जा आती है

  • मानसिक तनाव कम होता है

  • अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है

  • घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है

वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इस दिन बरगद के पेड़ को कच्चा सूत, जल-दूध, रोली-अक्षत और भोग अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि विधिपूर्वक और श्रद्धा के साथ की गई पूजा से पति की लंबी आयु, वैवाहिक सुख और परिवार की समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

वट वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि सनातन परंपरा में जीवन, स्थिरता और आस्था का प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन पूरे श्रद्धा भाव और नियमों के साथ पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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