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Vat Savitri Vrat Aarti: वट सावित्री व्रत की आरती इस पवित्र पर्व का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यह आरती केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि सुहागिन महिलाओं की श्रद्धा, विश्वास और अपने पति की लंबी आयु की कामना का प्रतीक है। वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं वट वृक्ष (बरगद) की पूजा करने के बाद विधि-विधान से आरती करती हैं और माता सावित्री से सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगती हैं।
इस आरती के माध्यम से भक्त अपने मन की भक्ति को प्रकट करते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई आरती से वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।
ओम जय जय सावित्री, ओम जय जय गायत्री
अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
ओम जय जय सावित्री, ओम जय जय गायत्री
अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
ओम जय जय सावित्री।
तुम ही रक्षक सबका, प्राणों का तुम प्राण
भक्तजन मिले सारे, नित्य करें तेरा ध्यान
ओम जय जय सावित्री, ओम जय जय गायत्री
भक्त तरसे तुम हो सभी विधि करें उपकार
अंतर्मन से सुमिर लो, सुने वो तभी पुकार,
ओम जय जय सावित्री।।
भक्तों का दुख भंजन रक्षा करें आठों याम,
दिव्य ज्योति तुम्हारी, रहें सदा अविराम
ओम जय जय सावित्री। ओम जय जय गायित्री।।
चारों विधि के मंत्रों का गुरु मंत्र तुम्हे कहते।
ऋषि मुनि योगी सारे गुणगान तुम्हारा करें।
ओम जय जय सावित्री। ओम जय जय गायित्री।।
अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
ओम जय जय सावित्री।
हृदय विराजो हे मां, भटक न जाऊ किसी ओर
ले लो अपनी शरण में, न छूटे कभी डोर।
ओम जय जय सावित्री। ओम जय जय गायित्री।।
अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
ओम जय जय सावित्री।
वट सावित्री व्रत की आरती करना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई आरती से जीवन में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि आरती करने से माता सावित्री प्रसन्न होती हैं और सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन में सुख का आशीर्वाद मिलता है।
आरती के नियमित पाठ से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। साथ ही परिवार में खुशहाली, समृद्धि और आपसी प्रेम बढ़ता है। यह आरती व्यक्ति के आत्मविश्वास को भी मजबूत करती है और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देती है। इसलिए वट सावित्री व्रत के दिन आरती करना विशेष महत्व रखता है।
वट सावित्री व्रत की आरती का पाठ करना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और पारिवारिक महत्व छिपा होता है। इस आरती का पाठ करने से आप माता सावित्री के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं, जिससे उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आरती का पाठ इसलिए करना चाहिए क्योंकि यह मन को शांति देता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। जब आप पूरे विश्वास और सच्चे मन से आरती करते हैं, तो आपके वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और समझ मजबूत होती है। मान्यता है कि इससे पति की आयु लंबी होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं।
इसके अलावा, आरती का नियमित पाठ आपके मन से नकारात्मक विचारों को दूर करता है और आत्मबल बढ़ाता है। परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसलिए वट सावित्री व्रत के दिन आरती का पाठ करना आपके जीवन को संतुलित और खुशहाल बनाने में मदद करता है।
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