माता शैलपुत्री की आरती (Mata Shailputri Ki Aarti)

माता शैलपुत्री की आरती (Mata Shailputri Ki Aarti)

Mata Shailputri Ki Aarti: नवरात्रि के नौ दिनों में माता के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसमें पहला दिन माता शैलपुत्री को समर्पित होता है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से माता शैलपुत्री की पूजा और आरती गाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ‘शैलपुत्री’ का मतलब पर्वतराज हिमालय की बेटी है। माता शैलपुत्री को सृष्टि की मूल शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि नवरात्रि के पहले दिन भक्त माता की पूजा और आरती से अपने दिन की शुरुआत करते हैं। ऐसी मान्यता है कि पहले दिन माता शैलपुत्री की आरती करने से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति, स्थिरता और देवी की कृपा प्राप्त होती है।  

इस पेज पर आपको माता शैलपुत्री की आरती और उसके महत्व से जुड़ी जानकारी मिलेगी। इसकी मदद से आप श्रद्धा और सही विधि से माता की आराधना कर सकते हैं।      

माता शैलपुत्री की आरती (Mata Shailputri Ki Aarti)

नवरात्रि के पहले दिन भक्त माता शैलपुत्री की पूजा के साथ उनकी आरती गाते हैं। आरती गाने से माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त की जाती है। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से आरती करने पर माता अपने भक्तों की मनोकामनाएं सुनती हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

नीचे मां शैलपुत्री की आरती के लोकप्रिय बोल दिए गए हैं, जिन्हें भक्त पूजा के समय गाते हैं:

शैलपुत्री मां बैल असवार।
करें देवता जय जयकार।।

शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।

पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।।

ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू।।

सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी।।

उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।

घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।।

श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।

जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।

मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।

भक्त इस आरती को दीप जलाकर, भोग अर्पित करके और पूरे श्रद्धा भाव से गाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस आरती के माध्यम से माता शैलपुत्री की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद बना रहता है।

माता शैलपुत्री की आरती और पूजा नवरात्रि की शुरुआत को पवित्र और मंगलमय बनाती है। नवदुर्गा के पहले स्वरूप के रूप में माता शैलपुत्री शक्ति, स्थिरता और भक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। सच्चे मन से उनकी आरती और स्मरण करने से भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

यदि आप श्रद्धा और विश्वास के साथ माता शैलपुत्री की पूजा करते हैं और उनकी आरती गाते हैं, तो यह न केवल आध्यात्मिक रूप से आपको मजबूत बनाता है बल्कि जीवन में सुख और समृद्धि का मार्ग भी खोलता है।

नवरात्रि के पावन दिनों में माता शैलपुत्री की आरती गाकर उनके आशीर्वाद को प्राप्त करें और भक्ति के इस सुंदर अनुभव का आनंद लें। 

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