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Katyayani Devi Aarti: नवरात्रों में छठवें दिन माता कात्यायनी की पूजा और आरती की जाती है। ऐसी मान्यता है कि माता कात्यायनी की आरती करने से आपके जीवन में साहस, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा आती है। माता की आरती को आप केवल एक धार्मिक कार्य के रूप में नहीं देख सकते, यह माता के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करने का सबसे सरल और असरदार माध्यम है। मां कात्यायनी की आरती आपके लिए अपने जीवन से दुख, भय और नकारात्मकता को दूर करने में प्रभावी साबित हो सकती है। नवरात्रि के दौरान आप सुबह या शाम माता कात्यायनी की आरती गाकर, अपने दिन को शुभ बना सकते हैं।
यहां इस पेज पर आपके लिए माता कात्यायनी की संपूर्ण आरती दी गई है। यदि आप इस नवरात्रि में माता कात्यायनी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो यहां दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित सकती हैं।
नीचे माता कात्यायनी की प्रसिद्ध आरती दी गई है। भक्त नवरात्रि के छठे दिन या किसी भी शुभ अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ इस आरती का पाठ कर सकते हैं।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी,
जय जगमाता, जग की महारानी।बैजनाथ स्थान तुम्हारा,
वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं,
यह स्थान भी तो सुखधाम है।हर मंदिर में जोत तुम्हारी,
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।हर जगह उत्सव होते रहते,
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।कात्यायनी रक्षक काया की,
ग्रंथि काटे मोह माया की।झूठे मोह से छुड़ाने वाली,
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।जय जगमाता, जग की महारानी,
अपना नाम जपाने वाली।बृहस्पतिवार को पूजा करियो,
ध्यान कात्यायनी का धरियो।हर संकट को दूर करेगी,
भंडारे भरपूर करेगी।जो भी मां को भक्त पुकारे,
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।जय जय अम्बे, जय कात्यायनी,
जय जगमाता, जग की महारानी।
माता कात्यायनी की आरती भक्ति, विश्वास और समर्पण का एक सुंदर माध्यम है। जब भक्त सच्चे मन से माता का स्मरण करते हैं और आरती गाते हैं, तो उन्हें मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। नवरात्रि के छठे दिन इस आरती का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन भक्त चाहें तो इसे किसी भी दिन माता की पूजा के समय गा सकते हैं।
नियमित रूप से माता कात्यायनी की आरती करने से भक्तों का विश्वास और भक्ति और भी मजबूत होती है। ऐसा माना जाता है कि माता अपने भक्तों के जीवन से कठिनाइयों को दूर करती हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाती हैं। इसलिए जब भी आप माता की पूजा करें, पूरे श्रद्धा भाव से उनकी आरती गाएँ और उनके आशीर्वाद की कामना करें।
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