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जगत के पालनहार भगवान विष्णु की आराधना के लिए भक्त अलग-अलग माध्यमों को अपनाते हैं। कोई भजन करता है तो कोई मंत्र उच्चारण करता है। इसमें सबसे प्रभावी उपाय नारायण कवच के पाठ को माना जाता है। नारायण कवच भक्तों के लिए श्री हरि की पूजा-उपासना को फलदायी बनाता है।
नारायण कवच के बारे में आपको कई पुराणों में जानने को मिलता है। जो लोग जीवन में संकटों से घिरे हैं या भक्ति की राह में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए यह कवच बहुत महत्वपूर्ण है। इस विष्णु कवच के पाठ से आपको भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है। अगर आप पूरी श्रद्धा से विष्णु कवच (vishnu kavach) का पाठ करते हैं तो भगवान विष्णु आपके सारे कष्ट दूर कर सकते हैं और आपको सुख-समृद्धि व सौभाग्य का आशीर्वाद दे सकते हैं। तो आइए जानते हैं नारायण कवच के बारे में?
ॐ हरिर्विदध्यान्मम सर्वरक्षां न्यस्ताङ्घ्रिपद्मः पतगेन्द्रपृष्ठे।
दरारिचर्मासिगदेषुचापाशान् दधानोsष्टगुणोsष्टबाहुः।।
जलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्तिर्यादोगणेभ्यो वरूणस्य पाशात्।
स्थलेषु मायावटुवामनोsव्यात् त्रिविक्रमः खेऽवतु विश्वरूपः।।
दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयुथपारिः।
विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुर्न्यपतंश्च गर्भाः।।
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोन्नीतधरो वराहः।
रामोऽद्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सलक्ष्मणोsव्याद् भरताग्रजोsस्मान्।।
मामुग्रधर्मादखिलात् प्रमादान्नारायणः पातु नरश्च हासात्।
दत्तस्त्वयोगादथ योगनाथः पायाद् गुणेशः कपिलः कर्मबन्धात्।।
सनत्कुमारो वतु कामदेवाद्धयशीर्षा मां पथि देवहेलनात्।
देवर्षिवर्यः पुरूषार्चनान्तरात् कूर्मो हरिर्मां निरयादशेषात्।।
धन्वन्तरिर्भगवान् पात्वपथ्याद् द्वन्द्वाद् भयादृषभो निर्जितात्मा।
यज्ञश्च लोकादवताज्जनान्ताद् बलो गणात् क्रोधवशादहीन्द्रः।।
द्वैपायनो भगवानप्रबोधाद् बुद्धस्तु पाखण्डगणात् प्रमादात्।
कल्किः कले कालमलात् प्रपातु धर्मावनायोरूकृतावतारः।।
मां केशवो गदया प्रातरव्याद् गोविन्द आसङ्गवमात्तवेणुः।
नारायण प्राह्ण उदात्तशक्तिर्मध्यन्दिने विष्णुररीन्द्रपाणिः।।
देवोsपराह्णे मधुहोग्रधन्वा सायं त्रिधामावतु माधवो माम्।
दोषे हृषीकेश उतार्धरात्रे निशीथ एकोsवतु पद्मनाभः।।
श्रीवत्सधामापररात्र ईशः प्रत्यूष ईशोऽसिधरो जनार्दनः।
दामोदरोऽव्यादनुसन्ध्यं प्रभाते विश्वेश्वरो भगवान् कालमूर्तिः।।
चक्रं युगान्तानलतिग्मनेमि भ्रमत् समन्ताद् भगवत्प्रयुक्तम्।
दन्दग्धि दन्दग्ध्यरिसैन्यमासु कक्षं यथा वातसखो हुताशः।।
गदेऽशनिस्पर्शनविस्फुलिङ्गे निष्पिण्ढि निष्पिण्ढ्यजितप्रियासि।
कूष्माण्डवैनायकयक्षरक्षोभूतग्रहांश्चूर्णय चूर्णयारीन्।।
त्वं यातुधानप्रमथप्रेतमातृपिशाचविप्रग्रहघोरदृष्टीन्।
दरेन्द्र विद्रावय कृष्णपूरितो भीमस्वनोऽरेर्हृदयानि कम्पयन्।।
त्वं तिग्मधारासिवरारिसैन्यमीशप्रयुक्तो मम छिन्धि छिन्धि।
चर्मञ्छतचन्द्र छादय द्विषामघोनां हर पापचक्षुषाम्।।
यन्नो भयं ग्रहेभ्यो भूत् केतुभ्यो नृभ्य एव च।
सरीसृपेभ्यो दंष्ट्रिभ्यो भूतेभ्योंऽहोभ्य एव वा।।
सर्वाण्येतानि भगन्नामरूपास्त्रकीर्तनात्।
प्रयान्तु संक्षयं सद्यो ये नः श्रेयः प्रतीपकाः।।
गरूड़ो भगवान् स्तोत्रस्तोभश्छन्दोमयः प्रभुः।
रक्षत्वशेषकृच्छ्रेभ्यो विष्वक्सेनः स्वनामभिः।।
सर्वापद्भ्यो हरेर्नामरूपयानायुधानि नः।
बुद्धिन्द्रियमनः प्राणान् पान्तु पार्षदभूषणाः।।
यथा हि भगवानेव वस्तुतः सद्सच्च यत्।
सत्यनानेन नः सर्वे यान्तु नाशमुपाद्रवाः।।
यथैकात्म्यानुभावानां विकल्परहितः स्वयम्।
भूषणायुद्धलिङ्गाख्या धत्ते शक्तीः स्वमायया।।
तेनैव सत्यमानेन सर्वज्ञो भगवान् हरिः।
पातु सर्वैः स्वरूपैर्नः सदा सर्वत्र सर्वगः।।
विदिक्षु दिक्षूर्ध्वमधः समन्तादन्तर्बहिर्भगवान् नारसिंहः।
प्रहापयँल्लोकभयं स्वनेन ग्रस्तसमस्ततेजाः।।
श्री नारायण कवच का पाठ करने वाले साधक को इसका महत्वपूर्ण लाभ और प्रभाव अनुभव करने को मिलता है। यह कवच आपको जीवन में चल रहे संकटों से सुरक्षित रखने और भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ने में मदद करता है। चलिए जानते हैं कि विष्णु कवच का पाठ करने से भक्तों को किस तरह के लाभ प्राप्त होते हैं:
संकटों से मुक्ति
नारायण कवच आपको जीवन में आने वाले आर्थिक, सामाजिक, शारीरिक और मानसिक संकटों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका पाठ करने से चारों ओर एक दिव्य सुरक्षा चक्र बन जाता है, जो सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जो पारिवारिक कलह, नौकरी की अनिश्चितता या आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
धन-समृद्धि
इस कवच का पाठ करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है। इनका आशीर्वाद आपको आर्थिक रूप से मजबूत बनने में मदद करता है। श्री नारायण कवच के पाठ के माध्यम से साधक को धन, संपत्ति, वाहन, और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। यदि किसी के जीवन में आर्थिक तंगी हो या व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो, तो नारायण कवच का पाठ उसे आर्थिक स्थिरता प्रदान कर सकता है।
वैवाहिक सुख
यदि आपको ऐसा लग रहा है कि आपके विवाह में देरी हो रही है, मनचाहा जीवनसाथी नहीं मिल रहा है, या वैवाहिक जीवन में लगातार समस्याएं बनी हुई हैं, तो नारायण कवच का पाठ रामबाण साबित हो सकता है। यह वैवाहिक जीवन को सुखद और मधुर बनाता है। कुंडली के मांगलिक दोष, शनि की साढ़े साती या राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से उत्पन्न समस्याओं के समाधान में भी यह पाठ बहुत उपयोगी है।
आध्यात्मिक ऊर्जा
नारायण कवच का पाठ आपको आध्यात्मिक रूप से जागृत करने में मदद करता है। अगर आप इस कवच का पाठ सच्चे मन से करते हैं तो यह आपके मन को शुद्ध और शांत करता है। यह मोक्ष प्राप्ति के मार्ग पर आपको आगे बढ़ाता है और आपको ईश्वर से जोड़ता है। पिछले जन्म के पापों से मुक्ति और आत्मिक शांति की प्राप्ति नारायण कवच के पाठ का महत्वपूर्ण लाभ है।
अच्छा स्वास्थ्य
नारायण कवच के नियमित पाठ से साधक को अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है। यह शारीरिक बीमारियों को दूर करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है। जिन लोगों के जीवन में बार-बार स्वास्थ्य समस्याएं आती हैं, उनके लिए यह कवच एक अद्वितीय औषधि की तरह कार्य करता है।
बुरी शक्तियों से बचाव
नारायण कवच दुश्मनों और बुरी शक्तियों से बचाने में अत्यंत प्रभावशाली है। जिन लोगों के जीवन में बार-बार शत्रु बाधाएं पैदा करते हैं, उन्हें इस कवच का पाठ जरूर करना चाहिए। यह सभी प्रकार की तांत्रिक बाधाओं और अशुभ ग्रह प्रभावों को समाप्त करता है।
इच्छाओं की पूर्ती
जो लोग रोज़ सच्चे मन से नारायण कवच का पाठ करते हैं, उनकी सभी इच्छाएं धीरे-धीरे पूर्ण होने लगती हैं। चाहे वह करियर से जुड़ी हो, परिवार में सुख-शांति का माहौल बनाना हो, या समाज में मान-सम्मान प्राप्त करना हो, यह कवच हर प्रकार से सहायता करता है।
जब आप नारायण कवच का पाठ कर रहे हों तो एक उचित विधि से करने का प्रयास करें, ताकि इसका पूर्ण लाभ प्राप्त हो। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। ऐसे में शुभ परिणामों के लिए आपको नारायण कवच के पाठ के लिए गुरूवार का दिन चुनना चाहिए।
नारायण कवच में भगवान विष्णु के अलग-अलग रूपों का वर्णन किया गया है। इस कवच का उल्लेख वेदों और पुराणों में भी मिलता है। इसके बारे में आप विशेष रूप से आप विष्णु पुराण और भागवत पुराण में पढ़ सकते हैं।
यह कवच भगवान विष्णु की शक्ति और उनके भक्तों की रक्षा के लिए उनकी करुणा का प्रमाण है। ऐसा माना जाता है कि यह कवच देवताओं को संकट के समय दिया गया था। इंद्र देव ने इस कवच के प्रभाव से असुरों को हराकर स्वर्ग को पुनः प्राप्त किया।