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Shree Narasimha kavach: भगवान विष्णु के सभी अवतारों में से नृसिंह अवतार को सबसे उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। कहा जाता है कि जब भी भक्तों पर संकट आता है या दुष्ट शक्तियाँ हावी होने लगती हैं, तब-तब भगवान विष्णु नृसिंह का रूप लेकर उनकी रक्षा के लिए प्रकट होते हैं।
नृसिंह अवतार में, उन्होंने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अत्याचारी राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था। नृसिंह भगवान के स्वरूप में अद्भुत शक्ति और तेज है, जिससे समस्त नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियाँ दूर हो जाती हैं। नृसिंह कवच का पाठ (narsingh kavach paath) करने से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाएँ दूर होने लगती हैं। भूत-प्रेत, दुष्ट आत्माएँ और तंत्र-मंत्र का असर मात्र भगवान नृसिंह के नाम से ही खत्म होने लगता है। यदि किसी व्यक्ति को बार-बार किसी अनहोनी का डर सताता है या भविष्य में किसी बड़े संकट की आशंका हो, तो नृसिंह कवच का पाठ (Narasimha kavach paath) करने से उसे इन सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। यह भगवान नृसिंह का दिव्य कवच है, जिसके विधिपूर्वक पाठ करने से भक्त हर प्रकार की परेशानी से बच जाता है।
विनयोग
ॐ अस्य श्रीलक्ष्मीनृसिंह कवच महामंत्रस्यब्रह्माऋिषः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीनृसिंहोदेवता, ॐ क्षौ बीजम्, ॐ रौं शक्तिः, ॐ ऐं क्लीं कीलकम्मम सर्वरोग, शत्रु, चौर, पन्नग,व्याघ्र, वृश्चिक, भूत-प्रेत, पिशाच, डाकिनी-शाकिनी, यन्त्र मंत्रादि, सर्व विघ्न निवाराणार्थे श्री नृसिहं कवचमहामंत्र जपे विनयोगः।।
अथ ऋष्यादिन्यास
ॐ ब्रह्माऋषये नमः शिरसि।
ॐ अनुष्टुप् छन्दसे नमो मुखे।
ॐ श्रीलक्ष्मी नृसिंह देवताये नमो हृदये।
ॐ क्षौं बीजाय नमोनाभ्याम्।
ॐ शक्तये नमः कटिदेशे।
ॐ ऐं क्लीं कीलकाय नमः पादयोः।
ॐ श्रीनृसिंह कवचमहामंत्र जपे विनयोगाय नमः सर्वाङ्गे॥
अथ करन्यास
ॐ क्षौं अगुष्ठाभ्यां नमः।
ॐ प्रौं तर्जनीभ्यां नमः।
ॐ ह्रौं मध्यमाभयां नमः।
ॐ रौं अनामिकाभ्यां नमः।
ॐ ब्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
ॐ जौं करतलकर पृष्ठाभ्यां नमः।
अथ हृदयादिन्यास
ॐ क्षौ हृदयाय नमः।
ॐ प्रौं शिरसे स्वाहा।
ॐ ह्रौं शिखायै वषट्।
ॐ रौं कवचाय हुम्।
ॐ ब्रौं नेत्रत्रयाय वौषट्।
ॐ जौं अस्त्राय फट्।
नृसिंह ध्यान
ॐ सत्यं ज्ञान सुखस्वरूप ममलं क्षीराब्धि मध्ये स्थित्।
योगारूढमति प्रसन्नवदनं भूषा सहस्रोज्वलम्।
तीक्ष्णं चक्र पीनाक शायकवरान् विभ्राणमर्कच्छवि।
छत्रि भूतफणिन्द्रमिन्दुधवलं लक्ष्मी नृसिंह भजे॥
ॐ नमोनृसिंहाय सर्व दुष्ट विनाशनाय सर्वंजन मोहनाय सर्वराज्यवश्यं कुरु कुरु स्वाहा।
ॐ नमो नृसिंहाय नृसिंहराजाय नरकेशाय नमो नमस्ते।
ॐ नमः कालाय काल द्रष्ट्राय कराल वदनाय च।
ॐ उग्राय उग्र वीराय उग्र विकटाय उग्र वज्राय वज्र देहिने रुद्राय रुद्र घोराय भद्राय भद्रकारिणे ॐ ज्रीं ह्रीं नृसिंहाय नमः स्वाहा !!
ॐ नमो नृसिंहाय कपिलाय कपिल जटाय अमोघवाचाय सत्यं सत्यं व्रतं महोग्र प्रचण्ड रुपाय।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं ॐ ह्रुं ह्रुं ह्रुं ॐ क्ष्रां क्ष्रीं क्ष्रौं फट् स्वाहा।
ॐ नमो नृसिंहाय कपिल जटाय ममः सर्व रोगान् बन्ध बन्ध, सर्व ग्रहान बन्ध बन्ध, सर्व दोषादीनां बन्ध बन्ध, सर्व वृश्चिकादिनां विषं बन्ध बन्ध, सर्व भूत प्रेत, पिशाच, डाकिनी शाकिनी, यंत्र मंत्रादीन् बन्ध बन्ध, कीलय कीलय चूर्णय चूर्णय, मर्दय मर्दय, ऐं ऐं एहि एहि, मम येये विरोधिन्स्तान् सर्वान् सर्वतो हन हन, दह दह, मथ मथ, पच पच, चक्रेण, गदा, वज्रेण भष्मी कुरु कुरु स्वाहा।
ॐ क्लीं श्रीं ह्रीं ह्रीं क्ष्रीं क्ष्रीं क्ष्रौं नृसिंहाय नमः स्वाहा।
ॐ आं ह्रीं क्ष्रौं क्रौं ह्रुं फट्।
ॐ नमो भगवते सुदर्शन नृसिंहाय मम विजय रुपे कार्ये ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल असाध्यमेनकार्य शीघ्रं साधय साधय एनं सर्व प्रतिबन्धकेभ्यः सर्वतो रक्ष रक्ष हुं फट् स्वाहा।
ॐ क्षौं नमो भगवते नृसिंहाय एतद्दोषं प्रचण्ड चक्रेण जहि जहि स्वाहा।
ॐ नमो भगवते महानृसिंहाय कराल वदन दंष्ट्राय मम विघ्नान् पच पच स्वाहा।
ॐ नमो नृसिंहाय हिरण्यकश्यप वक्षस्थल विदारणाय त्रिभुवन व्यापकाय भूत-प्रेत पिशाच डाकिनी-शाकिनी कालनोन्मूलनाय मम शरीरं स्तम्भोद्भव समस्त दोषान् हन हन, शर शर, चल चल, कम्पय कम्पय, मथ मथ, हुं फट् ठः ठः।
ॐ नमो भगवते भो भो सुदर्शन नृसिंह ॐ आं ह्रीं क्रौं क्ष्रौं हुं फट्।
ॐ सहस्त्रार मम अंग वर्तमान ममुक रोगं दारय दारय दुरितं हन हन पापं मथ मथ आरोग्यं कुरु कुरु ह्रां ह्रीं ह्रुं ह्रैं ह्रौं ह्रुं ह्रुं फट् मम शत्रु हन हन द्विष द्विष तद पचयं कुरु कुरु मम सर्वार्थं साधय साधय।
ॐ नमो भगवते नृसिंहाय ॐ क्ष्रौं क्रौं आं ह्रीं क्लीं श्रीं रां स्फ्रें ब्लुं यं रं लं वं षं स्त्रां हुं फट् स्वाहा।
ॐ नमः भगवते नृसिंहाय नमस्तेजस्तेजसे अविराभिर्भव वज्रनख वज्रदंष्ट्र कर्माशयान् रंधय रंधय तमो ग्रस ग्रस ॐ स्वाहा।
अभयमभयात्मनि भूयिष्ठाः ॐ क्षौम्।
ॐ नमो भगवते तुभ्य पुरुषाय महात्मने हरिंऽद्भुत सिंहाय ब्रह्मणे परमात्मने।
ॐ उग्रं उग्रं महाविष्णुं सकलाधारं सर्वतोमुखम्।
नृसिंह भीषणं भद्रं मृत्युं मृत्युं नमाम्यहम्।
इति नृसिंह कवच !! ब्रह्म सावित्री संवादे नृसिंह पुराण अर्न्तगत कवच सम्पूर्णम !!
1. नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
नृसिंह कवच के पाठ से भूत-प्रेत, दुष्ट आत्माएं, पिशाच, और अन्य बुरी शक्तियाँ व्यक्ति के आस-पास भी नहीं भटकतीं। जिन लोगों को बार-बार किसी अनजान भय का अनुभव होता है, वे इस कवच का नियमित रूप से जाप करें।
2. ग्रह दोषों का निवारण
जिन जातकों की कुंडली में किसी भी प्रकार का ग्रह दोष जैसे- राहु-केतु की महादशा, शनि की साढ़े साती, मंगल दोष या कालसर्प दोष है, उनके लिए नृसिंह कवच अत्यंत लाभकारी है। इसका नियमित जाप करने से ग्रह बाधाओं का प्रभाव कम हो जाता है।
3. आर्थिक परेशानियों का समाधान
अगर आप किसी भी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, धन हानि हो रही है, व्यापार में नुकसान हो रहा है, या बार-बार पैसे रुक रहे हैं, तो नृसिंह कवच का पाठ करना अत्यंत लाभदायक होगा। इससे व्यवसाय में वृद्धि होती है और रुका हुआ धन प्राप्त होने लगता है।
4. मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि
यह कवच मन को स्थिर करता है और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। जो लोग मानसिक तनाव या किसी अनजाने भय से परेशान हैं, उन्हें नृसिंह कवच का नित्य पाठ करना चाहिए।
5. शत्रुओं और बाधाओं से मुक्ति
अगर कोई व्यक्ति बार-बार शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के मामलों, या किसी प्रकार की साजिशों का शिकार हो रहा है, तो नृसिंह कवच का पाठ उसे हर संकट से मुक्त करता है।
नृसिंह कवच का पाठ करने से पहले इसकी विधिपूर्वक पूजा करना आवश्यक है। इस कवच को मंगलवार या शनिवार से प्रारंभ करना शुभ माना जाता है।
पूजन विधि
इस कवच का पाठ ब्रह्ममुहूर्त में करना सर्वोत्तम माना जाता है।
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजन स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
भगवान लक्ष्मी-नृसिंह की मूर्ति या चित्र को लाल कपड़े पर स्थापित करें।
तांबे के लोटे में जल भरकर रखें और उस पर रोली एवं अक्षत लगाएं।
दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
शुद्ध आसन पर बैठकर इस कवच का जाप करें।
भगवान नृसिंह का ध्यान करें और 11 बार नृसिंह कवच का पाठ करें।
पाठ के पश्चात जल को पूरे घर में छिड़क दें।
यह प्रक्रिया लगातार 33 दिनों तक करें।
इस उपाय से व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियाँ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।
पाठ करने से पहले नृसिंह भगवान को पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। शुद्ध आसन पर बैठकर इस कवच का जाप करें। किसी योग्य ब्राह्मण से इसका संकल्प करवाकर विधि अनुसार इसके पाठ को शुरू करें।
यह कवच भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार से संबंधित है, जो भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रकट हुए थे। इस कवच का नियमित रूप से पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति आती है और भय खत्म होता है। कई साधक इसे तांत्रिक बाधाओं को समाप्त करने के लिए विशेष रूप से प्रयोग करते हैं। यदि कोई व्यक्ति अचानक परेशानियों से घिर जाए या जीवन में असफलताओं का सामना कर रहा हो, तो नृसिंह कवच का पाठ (Narasimha kavach paath) करने से उसे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यदि कोई अपने शत्रुओं से परेशान हो और उन पर विजय प्राप्त करना चाहता हो, तो यह कवच विशेष रूप से लाभकारी होता है।
भगवान नृसिंह की कृपा प्राप्त करने और जीवन की सभी बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए नृसिंह कवच का पाठ करना अत्यंत लाभकारी है। इस दिव्य कवच का पाठ और धारण अवश्य करें। इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।