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Shiv kavach in hindi: भगवान शिव को अनेकों रूप में पूजा जाता है। शिव को देवों के देव महादेव की उपाधि प्राप्त है। इसलिए लोग महादेव को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग माध्यमों का उपयोग करते हैं। ऐसा माना जाता है कि शिव कि पूजा-उपासना से आपको आध्यात्मिक और भौतिक जगत की सही समझ प्राप्त होती है। शिव पूजा किसी भी दिन की जा सकती है लेकिन सोमवार का दिन शिव की आराधना के लिए सबसे विशेष माना जाता है। शिव पूजा के रूप में अमोघ शिव कवच (amogh shiv kavach) के पाठ को एक बहुत ही प्रभावशाली स्तोत्र माना जाता है। इस कवच के पाठ से भगवान शिव की कृपा मिलती है। अगर आप शिव कवच (shiv kavach) का पाठ करते हैं तो आपके जीवन की समस्त बाधाएं दूर हो सकती हैं और आप पर भोलेनाथ की कृपा हमेशा बनी रह सकती है। इस कवच का प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र में सुख-समृद्धि प्रदान करता है और इसे करने से साधक को अपार शक्ति प्राप्त होती है। शिव कवच का पाठ करने से साधक स्वयं को हर प्रकार की बुरी शक्तियों, ग्रह दोषों और आकस्मिक दुर्घटनाओं से सुरक्षित रख सकता है। यह कवच हमें यह विश्वास दिलाता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा हर परिस्थिति में करते हैं।
वज्र-दंष्ट्रं त्रि-नयनं काल-कण्ठमरिन्दमम् ।
सहस्र-करमत्युग्रं वंदे शंभुमुमा-पतिम् ॥
मां पातु देवोऽखिल-देवतात्मा, संसार-कूपे पतितं गंभीरे ।
तन्नाम-दिव्यं वर-मंत्र-मूलं, धुनोतु मे सर्वमघं ह्रदिस्थम् ॥
सर्वत्र मां रक्षतु विश्व-मूर्तिर्ज्योतिर्मयानन्द-घनश्चिदात्मा ।
अणोरणीयानुरु-शक्तिरेकः, स ईश्वरः पातु भयादशेषात् ॥
यो भू-स्वरूपेण बिभात विश्वं, पायात् स भूमेर्गिरिशोऽष्ट-मूर्तिः ।
योऽपां स्वरूपेण नृणां करोति, सञ्जीवनं सोऽवतु मां जलेभ्यः ॥
कल्पावसाने भुवनानि दग्ध्वा, सर्वाणि यो नृत्यति भूरि-लीलः ।
स काल-रुद्रोऽवतु मां दवाग्नेर्वात्यादि-भीतेरखिलाच्च तापात् ॥
प्रदीप्त-विद्युत् कनकावभासो, विद्या-वराभीति-कुठार-पाणिः ।
चतुर्मुखस्तत्पुरुषस्त्रिनेत्रः, प्राच्यां स्थितं रक्षतु मामजस्रम् ॥
कुठार-खेटांकुश-पाश-शूल-कपाल-ढक्काक्ष-गुणान् दधानः ।
चतुर्मुखो नील-रुचिस्त्रिनेत्रः, पायादघोरो दिशि दक्षिणस्याम् ॥
कुन्देन्दु-शङ्ख-स्फटिकावभासो, वेदाक्ष-माला वरदाभयांङ्कः ।
त्र्यक्षश्चतुर्वक्त्र उरु-प्रभावः, सद्योऽधिजातोऽवस्तु मां प्रतीच्याम् ॥
वराक्ष-माला-भय-टङ्क-हस्तः, सरोज-किञ्जल्क-समान-वर्णः ।
त्रिलोचनश्चारु-चतुर्मुखो मां, पायादुदीच्या दिशि वाम-देवः ॥
वेदाभ्येष्टांकुश-पाश-टङ्क-कपाल-ढक्काक्षक-शूल-पाणिः ।
सित-द्युतिः पञ्चमुखोऽवताम् मामीशान-ऊर्ध्वं परम-प्रकाशः ॥
मूर्धानमव्यान् मम चंद्र-मौलिर्भालं ममाव्यादथ भाल-नेत्रः ।
नेत्रे ममाव्याद् भग-नेत्र-हारी, नासां सदा रक्षतु विश्व-नाथः ॥
पायाच्छ्रुती मे श्रुति-गीत-कीर्तिः, कपोलमव्यात् सततं कपाली ।
वक्त्रं सदा रक्षतु पञ्चवक्त्रो, जिह्वां सदा रक्षतु वेद-जिह्वः ॥
कण्ठं गिरीशोऽवतु नील-कण्ठः, पाणि-द्वयं पातु पिनाक-पाणिः ।
दोर्मूलमव्यान्मम धर्म-बाहुर्वक्ष-स्थलं दक्ष-मखान्तकोऽव्यात् ॥
ममोदरं पातु गिरीन्द्र-धन्वा, मध्यं ममाव्यान्मदनान्त-कारी ।
हेरम्ब-तातो मम पातु नाभिं, पायात् कटिं धूर्जटिरीश्वरो मे ॥
ऊरु-द्वयं पातु कुबेर-मित्रो, जानु-द्वयं मे जगदीश्वरोऽव्यात् ।
जङ्घा-युगं पुङ्गव-केतुरव्यात्, पादौ ममाव्यात् सुर-वन्द्य-पादः ॥
महेश्वरः पातु दिनादि-यामे, मां मध्य-यामेऽवतु वाम-देवः ।
त्र्यम्बकः पातु तृतीय-यामे, वृष-ध्वजः पातु दिनांत्य-यामे ॥
पायान्निशादौ शशि-शेखरो मां, गङ्गा-धरो रक्षतु मां निशीथे ।
गौरी-पतिः पातु निशावसाने, मृत्युञ्जयो रक्षतु सर्व-कालम् ॥
अन्तः-स्थितं रक्षतु शङ्करो मां, स्थाणुः सदा पातु बहिः-स्थित माम् ।
तदन्तरे पातु पतिः पशूनां, सदा-शिवो रक्षतु मां समन्तात् ॥
तिष्ठन्तमव्याद् भुवनैकनाथः, पायाद् व्रजन्तं प्रथमाधि-नाथः ।
वेदान्त-वेद्योऽवतु मां निषण्णं, मामव्ययः पातु शिवः शयानम् ॥
मार्गेषु मां रक्षतु नील-कंठः, शैलादि-दुर्गेषु पुर-त्रयारिः ।
अरण्य-वासादि-महा-प्रवासे, पायान्मृग-व्याध उदार-शक्तिः ॥
कल्पान्तकाटोप-पटु-प्रकोप-स्फुटाट्ट-हासोच्चलिताण्ड-कोशः ।
घोरारि-सेनार्णव-दुर्निवार-महा-भयाद् रक्षतु वीर-भद्रः ॥
पत्त्यश्व-मातङ्ग-रथावरूथ-सहस्र-लक्षायुत-कोटि-भीषणम् ।
अक्षौहिणीनां शतमाततायिनाश्छिन्द्यान्मृडो घोर-कुठार-धारया ॥
निहन्तु दस्यून् प्रलयानिलार्च्चिर्ज्ज्वलन् त्रिशूलं त्रिपुरांतकस्य ।
शार्दूल-सिंहर्क्ष-वृकादि-हिंस्रान् सन्त्रासयत्वीश-धनुः पिनाकः ॥
दुःस्वप्न-दुःशकुन-दुर्गति-दौर्मनस्य-दुर्भिक्ष-दुर्व्यसन-दुःसह-दुर्यशांसि ।
उत्पात-ताप-विष-भीतिमसद्-गुहार्ति-व्याधींश्च नाशयतु मे जगतामधीशः॥
अमोघ शिव कवच, भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए बहुत ही प्रभावी मन्त्र है। इस कवच के दैनिक पाठ से आपको कई तरह के लाभ प्राप्त हो सकते हैं, जो यहाँ दिए गए हैं:
बुरी नज़र से बचाव: अमोघ शिव कवच से आपको हर प्रकार की बुरी शक्तियों, नकारात्मक ऊर्जाओं, तंत्र बाधाओं और बुरी नजर से सुरक्षा मिलती है। यह शिव कवच (shiv kavach) न केवल बाहरी शक्तियों से आपकी रक्षा करता है, बल्कि आंतरिक रूप से भी आपको आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।
ग्रहों का शुभ प्रभाव: अगर आपकी कुंडली में शनि, राहु, केतु या अन्य ग्रहों के कारण आपको किसी तरह के अशुभ फल प्राप्त होते हैं, तो इस कवच के नियमित पाठ से वे शांत हो जाते हैं और ग्रहों का शुभ प्रभाव बढ़ने लगता है।
धन-समृद्धि: यह कवच आपको आर्थिक समृद्धि भी प्रदान करता है। इसके प्रभाव से जीवन में स्थिरता आती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है। विशेष रूप से वे लोग जो लगातार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, उन्हें इस कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए।
नकारात्मक विचारों से मुक्ति: अगर आप इस कवच का पाठ करते हैं तो आपको मानसिक रूप से शांति का एहसास हो सकता है। इस अमोघ शिव कवच (amogh shiv kavach) के माध्यम से आपके मन में उत्पन्न होने वाले नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। जो लोग अपने जीवन में मानसिक तनाव, चिंता, या भय जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह कवच बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है।
अच्छा स्वास्थ्य: अमोघ शिव कवच को स्वास्थ्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस कवच का पाठ करने से शारीरिक और मानसिक रोग समाप्त होते हैं। यह शिव कवच शरीर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
भय से छुटकारा: इस कवच का एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह अकाल मृत्यु से भी रक्षा करता है। कई लोग आकस्मिक दुर्घटनाओं या अनहोनी घटनाओं से भयभीत रहते हैं। ऐसे में, यदि वे इस कवच का नियमित रूप से पाठ करें तो यह कवच उन्हें हर प्रकार की अनहोनी से सुरक्षित रखता है और दीर्घायु प्रदान करता है।
अमोघ शिव कवच अपने असंख्य लाभों के लिए जाना जाता है। हालांकि इसके लाभ आपको तभी देखने को मिलते हैं जब आप इस कवच का पाठ करने के लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करते हैं। इसे प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व या संध्या के समय किया जाए तो सर्वोत्तम फल प्राप्त होते हैं। सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। पाठ से पूर्व स्नान करना, स्वच्छ वस्त्र धारण करना और मन एवं शरीर को शुद्ध रखना आवश्यक होता है।
पाठ को शिवलिंग के समक्ष बैठकर किया जाए तो अधिक लाभ प्राप्त होता है। जल, बेलपत्र, दूध और धूप-दीप अर्पित करने के पश्चात इस कवच का श्रद्धा पूर्वक पाठ करना चाहिए। यदि साधक किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए इस कवच का पाठ कर रहा है, तो 21, 51 या 108 बार पाठ करना अधिक प्रभावशाली होता है। विशेष रूप से पूर्णिमा, अमावस्या और महाशिवरात्रि के दिन इस कवच का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्रद्धा और भक्ति के साथ कवच का पाठ करें। संयम और पवित्रता का पालन करें। अहंकार या स्वार्थ की भावना से पाठ न करें। अनुष्ठान के दौरान मांस-मदिरा का सेवन न करें। असत्य वचन, निंदा या क्रोध से बचें। ध्यान रहे बिना नियमों के पाठ करने से इसका प्रभाव कम हो सकता है।
विभिन्न पुराणों और शास्त्रों में आपको शिव कवच के बारे में जानने को मिलता है। यह कवच भगवान शिव के रुद्र रूप की महिमा का बखान करता है। स्कंद पुराण में इस कवच की शक्ति और प्रभाव का वर्णन किया गया है। यह कवच विशेष रूप से उन भक्तों के लिए लाभकारी माना जाता है जो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। यह कवच शिव (shiv kavach) के उन भक्तों के लिए भी उपयोगी है जो कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।