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2017 विधानसभा चुनावों में किसके पलड़े को भारी कर रहे हैं ग्रह



2017 विधानसभा चुनावों में किसके पलड़े को भारी कर रहे हैं ग्रह

नया साल हर लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। जीवन के हर क्षेत्र से नव वर्ष में नई उम्मीदें जुड़ने लगती हैं। नई आशंकाएं भी उभरती हैं। अपने जीवन के हालातों के साथ-साथ देश दुनिया में क्या हो सकता है इसके अनुमान भी लगाये जाने लगते हैं। राजनीति से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष तौर पर हम प्रभावित होते हैं इसलिये आने वाले साल में राज्य व देश की राजनीति क्या मोड़ ले सकती है, उसके क्या हालात हो सकते हैं यह सवाल तो मन में उठते ही हैं, इन सवालों का समाधान तो नहीं लेकिन काफी हद तक इसका अनुमान हमारे ज्योतिषाचार्य लगा सकते हैं। वर्ष 2017 तो राजनीति के लिहाज से वैसे भी महत्वपूर्ण है उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित देश के पांच राज्यों में चुनाव का बिगुल बज चुका हैं। ऐसे में प्रमुख राजनीतिक दलों की स्थिति इन चुनावों में कैसी रह सकती है। वर्ष 2017 व राज्यों व राजनीतिक दलों के स्थापना दिवस पर आधारित राशियों के अनुसार आकलन कर एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों ने इसका पूर्वानुमान लगाया है जिसे अपने पाठकों के लिये अपने इस लेख में हम प्रस्तुत कर रहे हैं। यदि आप अपनी कुंडली के बारे में भी देश के जाने माने ज्योतिषियों से परामर्श करना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें।


ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भारत की कुंडली वृषभ लग्न व कर्क राशि की है। आंगल वर्ष के अनुसार नववर्ष 2017 के स्वामी सूर्य देव हैं जो कि स्वयं राजा का प्रतिनिधित्व करते हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले चुनावों पर ग्रह, देशकाल, राजनीतिक पार्टियों की ग्रह दशाओं के अनुसार ही चुनावी नतीज़े रहेंगें।

2017 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का आगाज़ फरवरी में होने जा रहा है। इस समय भारत की कुंडली में चंद्रमा की महादशा में राहू का अंतर होगा।  

उपरोक्त पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा व राजनीतिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। यहां पर मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी जो कि सत्ता में है और बहुजन समाज पार्टी जो पूर्व में सत्ता में रही है, कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी आदि चार पार्टियों का मुकाबला है। इन चारों पार्टियों की राशि के अनुसार विश्लेषण कुछ इस प्रकार है-

उत्तर प्रदेश में वर्तमान में समाजवादी पार्टी की सरकार है। इस पार्टी का स्थापना दिवस 4 अक्तूबर 1992 है जिसके अनुसार इसकी राशि धनु है। धनु राशि वर्ष 2017 की राशि से 12वीं है। वर्ष की राशि से 12वें घर में होने से समाजवादी पार्टी की स्थिति वर्ष 2017 में कमजोर रहने की संभावना है। वहीं बहुजन समाज पार्टी यानि बीएसपी 14 अप्रैल 1984 में अस्तित्व में आई। इस तिथि के अनुसार इसकी राशि कन्या है जो वर्ष राशि से 9वीं है। इस पार्टी की स्थिति समाजवादी पार्टी से मजबूत रहने के आसार हैं। बीजेपी यानि भारतीय जनता पार्टी 2014 के लोकसभा चुनावों में अपनी ताकत का अहसास करवा चुकी है जिसने अधिकतर सीटों पर कब्जा जमाया था। 6 अप्रैल 1980 में बनी भाजपा का राशि वृश्चिक है। वर्ष 2017 की राशि से यह ग्यारहवें घर में है जो कि लाभ घर का संकेतक है। उपरोक्त दोनों पार्टियों से भाजपा ज्यादा बलवती नज़र आ रही है। चौथी मुख्य पार्टी कांग्रेस है। कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है 28 दिसंबर 1885 को कांग्रेस की स्थापना हुई थी। इसके अनुसार कांग्रेस की राशि भी कन्या है। जो कि वर्ष 2017 में 9वें स्थान पर है। यह भी भाग्य का संकेतक है।

कुल मिलाकर बसपा व कांग्रेस की राशियां एक समान हैं। राशि में बृहस्पति विद्यमान हैं जो कि चुनाव के दौरान वक्री होंगे। ज्योतिषीय आकलन के अनुसार कांग्रेस व बसपा की स्थिति लगभग एक समान रह सकती है। सभी पार्टियों की ग्रहदशा, शनि, मंगल व बृहस्पति के प्रभाव के अनुसार आकलन करने पर ज्योतिषाचार्य भारतीय जनता पार्टी को लाभ की स्थिति में देख रहे हैं।

यदि उत्तर प्रदेश की जन्म कुंडली को देखा जाये तो उत्तर प्रदेश की स्थापना 25 जनवरी 1950 को दोपहर बाद 3 बजे हुई थी। इस तिथि व समय के अनुसार उत्तर प्रदेश की कुंडली मिथुन लग्न और मेष राशि की बनती है जो कि सभी पार्टियों से भिन्न है। प्रदेश की कुंडली प्रथम लाभ समाजवादी पार्टी को दर्शा रही है और दूसरे नंबर पर भाजपा को बलि दिखाती है। लेकिन भाजपा के लिये एक लाभ यह भी है कि भाजपा व उत्तर प्रदेश का राशि स्वामी मंगल है। जिससे ज्योतिषाचार्य समाजवादी पार्टी व भाजपा में कड़ी टक्कर रहने का अनुमान लगा रहे हैं।

हालांकि चुनाव में पार्टियों की सटीक स्थिति का आकलन उम्मीद्वारों की कुंडली के अनुसार उनके ग्रहों की दशाओं पर भी निर्भर करेगा। लेकिन फिलहाल पलड़ा भारतीय जनता पार्टी का भारी नजर आ रहा है। बाकि संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता है। समय का चक्र क्या खेल खेलता है देखना होगा।

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