Skip Navigation Links
फाल्गुन – फाल्गुन मास के व्रत व त्यौहार


फाल्गुन – फाल्गुन मास के व्रत व त्यौहार

फाल्गुन यह मास हिंदू पंचाग का आखिरी महीना होता है इसके पश्चता हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। हिंदू पंचाग के बारह महीनों में पहला महीना चैत्र का होता है तो फाल्गुन आखिरी। फाल्गुन मास को मस्त महीने के तौर पर जाना जाता है। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार यह महीना फरवरी या मार्च में पड़ता है। इस वर्ष यह मास 11 फरवरी से लेकर 12 मार्च तक रहेगा।

दरअसल यह समय बसंत ऋतु का समय होता है। इस समय प्रकृति की विविध छटाएं देखने को मिलती हैं असल में पूरे वातावरण में एक अलग सी मादकता छायी रहती है। हर और नवजीवन का संचार नज़र आता है। सर्दी जा रही होती है और गर्मी आने की आहट होने लगती है यानि ना ही सर्दी और ना ही गर्मी इस तरह का मौसम खासकर उत्तरी भारत में होता है। प्रकृति के नज़रिये से यह मास जितना महत्वपूर्ण है उतना ही धार्मिक महत्व भी इस मास का होता है। फाल्गुन मास में 2 बड़े ही लोकप्रिय त्यौहार आते हैं जिन्हें देशभर में बड़े स्तर पर मनाया जाता है। भगवान भोलेनाथ की आराधना का त्यौहार महाशिवरात्रि व रंगों का त्यौहार होली इसी महीने में मनाये जाते हैं। तो आइये जानते हैं इस मास के महत्व व इसमें आने वाले त्यौहारों के बारे में।

 

फाल्गुन मास का महत्व


फाल्गुन मास में महाशिवरात्रि व होली जैसे बड़े त्यौहार मनाये जाते हैं इस कारण इस मास का धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है। एक और इसमें भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है तो वहीं भगवान द्वारा अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के लिये भी भगवान की पूजा करते हुए होलिका का दहन किया जाता है। इसके अलावा देश भर के नर नारी इससे अगले दिन रंग वाली होली मनाते हैं। यह पर्व भेदभाव को भूलाकर हमारी सांस्कृतिक एकता के महत्व को भी दर्शाता है। मान्यता है कि चंद्रमा की उत्पति अत्रि और अनुसूया से फाल्गुन मास की पूर्णिमा को हुई थी इस कारण गाजे-बाजे के साथ नाचते गाते हुए चंद्रोदय की पूजा भी की जाती है। चूंकि यह हिंदू वर्ष का अंतिम महीना होता है इस कारण अधिकरत धार्मिक वार्षिकोत्सव इसी महीने में आयोजित होते हैं। दक्षिण भारत में उत्तिर नाम का मंदिरोत्सव फाल्गुन मास की पूर्णिमा को आयोजित किया जाता है। इतना ही नहीं फाल्गुन द्वादशी यदि श्रवण नक्षत्र युक्त हो तो इस दिन भगवान विष्णु का उपवास करने की मान्यता भी है।


फाल्गुन मास के व्रत व त्यौहार


इस मास में प्रकृति में हर और उत्साह का संचार नजर आता है तो इस समय लोगों में भी एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा होता है। इसी उर्जा और उत्साह से लोग फाल्गुन में इन प्रमुख त्यौहारों को मनाते हैं-

जानकी जयंती (सीता अष्टमी) – फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को माता सीता की जयंती के रूप मनाया जाता है। इस अष्टमी को जानकी जयंती और सीता अष्टमी के नाम से जाना जाता है।

विजया एकादशी – फाल्गुन कृष्ण पक्ष एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। एकादशी व्रत का अपना विशिष्ट महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उपवास रखा जाता है।

महाशिवरात्रि – फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान भोलेनाथ की आराधना का यह महापर्व मनाया जाता है।

फाल्गुनी अमावस्या – फाल्गुनी अमावस्या का भी धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। दान पुण्य तर्पण आदि के लिये अमावस्या के दिन को विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

आमलकी एकादशी – फाल्गुन शुक्ल एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस उपवास करना बहुत ही शुभ माना जाता है। सुख समृद्धि व मोक्ष की कामना हेतु इस दिन उपवास किया जाता है व भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। रात्रि को जागरण करते हुए द्वादशी के दिन व्रत का पारण किया जाता है।

होली – फाल्गुन पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है इस दिन होलिका पूजन कर सांय के समय होलिका दहन किया जाता है। होली दहन के अगले दिन रंग वाली होली खेली जाती है। होली का डंडा मघा पूर्णिमा के दिन गाड़ा जाता है और फाल्गुन पूर्णिमा तक इसके इर्द-गिर्द झाड़ व लकड़ियां इकट्ठी कर होलिका बनाई जाती है। होलिका दहन के समय दहकती हुई होलि से भक्त प्रह्लाद के प्रतीक के रूप में डंडे को जलने से बचाया जाता है आम तौर पर डंडा एरंड या गूलर वृक्ष की टहनी का होता है।

संबंधित लेख


होली 2017   |   ​महाशिवरात्रि 2017   |   माघ – स्नान-दान से मिलता है मोक्ष   |   माघ - इस माह का है हर दिन पवित्र   |  

होलिका दहन की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त   |   होली - पर्व एक रंग अनेक




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

हरियाली तीज 2017 - जानें श्रावणी तीज की व्रत कथा व पूजा विधि

हरियाली तीज 2017 -...

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को “श्रावणी तीज” कहते हैं। परन्तु ज्यादातर लोग इसे हरियाली तीज के नाम से जानते हैं। यह त्यौहार मुख्य रूप स...

और पढ़ें...
नाग पंचमी 2017 - भगवान शिव और नागों की पूजा का दिन है

नाग पंचमी 2017 - भ...

नाग पंचमी एक  हिन्दू पर्व है जिसमें नागों और सर्पों की पूजा की जाती है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में यह पर्व पूरे देश में पूर्ण...

और पढ़ें...
शुक्र राशि परिवर्तन – किसको मिलेगा लाभ किसको होगी हानि जानें राशिफल

शुक्र राशि परिवर्त...

किसी भी जातक की कुंडली में लाभ, सुख-समृद्धि आदि के कारक शुक्र माने जाते हैं इसलिये शुक्र का गोचर भी ज्योतिषीय दृष्टिकोण से खास अहमियत रखता है...

और पढ़ें...
राशिनुसार कैसे करें शिव की पूजा

राशिनुसार कैसे करे...

शिव भक्तों के लिये सावन माह सभी महीनों में सबसे पवित्र माह होता है। इसलिये इस माह को भगवान शिव की उपासना के लिये सर्वोत्तम भी माना जाता है। इ...

और पढ़ें...
श्रावण सोमवार 2017 - जानें सावन सोमवार की व्रतकथा व पूजा विधि

श्रावण सोमवार 2017...

सावन माह का नाम आते ही हमारे मन में भी बादल घुमड़ने लगते हैं, ठंडी हवाओं के झौंके सुकून देने लगते हैं, तपती ज्येष्ठ और आषाढ़ में गरमी से बेहा...

और पढ़ें...