गणेश विसर्जन 2021 - गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ

bell icon Thu, Sep 16, 2021
टीम एस्ट्रोयोगी टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
Ganesh Visarjan 2021 - गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ

इन दिनों पूरे देशभर में गणेश चतुर्थी की धूम है। चारों तरफ गणपति पंडाल और "गणपति बप्पा मोरैया" से वातावरण गुंजायमान है। इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व  10 सितंबर से शुरू होकर 19 सितंबर को समाप्त होगा। इसका मतलब है कि 19 सितंबर को गणेश विसर्जन किया जाएगा। 19 सितंबर को "गणपति बप्पा मोरैया अगली बरस तू जल्दी आ" के साथ सभी गणपति भक्त भगवान विघ्नहर्ता का विसर्जन करेंगे। 

लेख में दी गई गणपति विसर्जन की पूजन विधि सामान्य है। यदि आप कुंडली या ग्रह के अनुसार विधिपूर्वक विसर्जन करना चाहते हैं तो आप अनुभवी ज्योतिषाचार्यों से परामर्श कर सकते हैं।

वहीं गणेशोत्सव के 10 दिन के पर्व में कुछ लोग गणपति की स्थापना 1.5 दिन के लिए, 3 दिन के लिए, 5 दिन के लिए, 7 दिन के लिए, 9 दिन के लिए और 11 दिन के लिए करते हैं और उसके बाद विधि विधान से विघ्नहर्ता का जल में विसर्जन कर देते हैं और उनसे अगली बरस दोबारा आने की कामना भी करते हैं।

 

गणपति विसर्जन शुभ मुहुर्त

इस बार 19 सितंबर 2021 यानि अनंत चतुर्दर्शी के दिन गणपति विसर्जन का शुभ पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषीयों के अनुसार गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त है। 

  • गणेश विसर्जन प्रात: 07:40 से दोपहर 12:15 तक
  • अपराह्न मुहूर्त - दोपहर 01:46 से दोपहर 03:18 तक
  • सायं मुहूर्त- शाम 06:21 से रात 10:46 तक
  • चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - 19 सितंबर 2021 को सुबह 05 बजकर 59 मिनट से
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त - 20 सितम्बर 2021 को सुबह 05 बजकर 28 मिनट तक

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गणेश प्रतिमा के विसर्जन का महत्व

गणेश चतुर्थी में भगवान गणेश के विसर्जन का अपना ही एक अलग महत्व है। इस विसर्जन में एक संदेश छिपा होता है। मान्यता है कि देवी-देवताओं की मूर्तियों का जल में विसर्जन करने से उनका अंश मूर्ति से निकलकर अपने लोक पहुंच जाता है यानी परम ब्रह्म में लीन हो जाता है। साथ ही गणपति को विसर्जित करने का एक सार यह भी है कि जिंदगी नश्वर है जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है। प्रकृति रूपी ब्रह्म से जीवन मिला है और एक दिन उसे परम ब्रह्म रूपी प्रकृति में ही मिल जाना है। 
 

गणेश प्रतिमा विसर्जन की विधि

गणेश चतुर्थी के दिन घर या पंडालों में गणपति की प्रतिमा को स्थापित किया जाता है और 10वें दिन विघ्नहर्ता का विधि पूर्वक विसर्जन किया जाता है। अब आपके मन में सवाल होगा कि हम उन्हें विदाई कैसे देते हैं? तो चलिए हम आपको बताते हैं कि शुभ फल पाने के लिए श्रीगणेश का विसर्जन विधिपूर्वक कैसे करें...

  • सबसे पहले 10 दिन तक भगवान गणपति की पूजा-अर्चना करें। गणपति विसर्जन से पहले एक स्वच्छ चौकी लें और उसे गंगाजल से पवित्र करें। चौकी पर एक पीला, गुलाबी या लाल वस्त्र बिछाएं। तत्पश्चात  स्वास्तिक बनाएं और उस पर अक्षत यानि चावल रखें। इस पर गुलाब की पंखुरियां बिखेरें। साथ ही चौकी के चारों कोनों पर 4 सुपारी रखें।
  • इसके बाद श्रीगणेश को गणपति बप्पा मोरैया जयघोष के साथ स्थापना वाले स्थान से उठाएं और प्रतिमा को चौकी पर विराजित करें। चौकी पर गणपति को विराजित करने के उपरांत विघ्नहर्ता को फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा और 5 मोदक अर्पित करें। यदि आप चाहते हैं कि गणपति विसर्जन बिना परेशानी के पूर्ण हो सके तो एक छोटी लकड़ी लें, उस पर चावल, गेंहू और पंच मेवा की पोटली बनाकर बांधे और दक्षिणा रखें। 
  • गणपति के विसर्जन से पूर्व भगवान की आरती करें। इसके बाद नदी, तालाब या पोखर में प्रतिमा का विसर्जन करें और विसर्जन के साथ-साथ उनसे धन, सुख, शांति और  समृद्धि की कामना करें और भूल-चूक के लिए माफी मांगे। 
  • विसर्जन के वक्त याद रखें कि गणपति प्रतिमा को फेंके नहीं बल्कि पूरे आदर और सम्मान के साथ पहले उनके वस्त्र और फिर समस्त सामग्री को धीरे-धीरे विसर्जित करें।

अगर आप इको फ्रेंडली गणपति को स्थापित करते हैं और उनका विधि पूर्वक विसर्जन करते हैं तो गणपति पूर्णतया पानी में विलीन हो जाते हैं और आपको पूरा पुण्य मिलता है। 

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