Garuda Purana - गरुण पुराण का स्वरूप और उसकी महत्वपूर्ण बातें

08 सितम्बर 2020

हिंदू धर्म में 18 महापुराणों का जिक्र है, जिसमें से एक गरुण महापुराण (Garuda Purana) है। हिंदू धर्म में इस पुराण की काफी मान्यता है।  गरुण  पुराण वैष्णव सम्प्रदाय से संबंध रखता है और इसके अधिष्ठातृदेव भगवान विष्णु (Lord Vishnu) है। गरुण  पुराण में विष्णु-भक्ति का विस्तार से वर्णन है। भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों का वर्णन ठीक उसी प्रकार यहां प्राप्त होता है, जिस प्रकार 'श्रीमद्भागवत' में उपलब्ध होता है। 

 

गरुण पुराण का स्वरूप

गरुण  पुराण में उन्नीस हजार श्लोक कहे जाते हैं, लेकिन वर्तमान समय में उपलब्ध पाण्डुलिपियों में लगभग आठ हजार श्लोक ही मिलते हैं। गरुण पुराण (Garuda Purana) के दो भाग हैं- पूर्वखण्ड तथा उत्तरखण्ड। पूर्वखण्ड में 229 अध्याय हैं तो वहीं उत्तरखण्ड में अलग-अलग पाण्डुलिपियों में अध्यायों की सख्या 37 से लेकर 49 तक है। इस प्रकार गरुण पुराण का लगभग 90 प्रतिशत सामग्री पूर्वखण्ड में है और केवल 10 प्रतिशत सामग्री उत्तरखण्ड में।

 

गरुण  पुराण के पहले भाग में विष्णु भक्ति और उपासना की विधियों का उल्लेख है। इसके अलावा मृत्यु के बाद 'गरूड़ पुराण' के श्रवण का प्रावधान है। वहीं दूसरे भाग में भूत-पिशाचों का विस्तार से वर्णन करते हुए विभिन्न नरकों में जीव के पड़ने का वृत्तान्त है। इसमें मरने के बाद मनुष्य की क्या गति होती है, उसका किस प्रकार की योनियों में जन्म होता है, प्रेत योनि से मुक्त कैसे पाई जा सकती है, श्राद्ध और पितृ कर्म किस तरह करने चाहिए तथा नरकों के दारूण दुख से कैसे मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है आदि का विस्तारपूर्वक वर्णन प्राप्त होता है।

 

गरुण पुराण की महत्वपूर्ण बातें उसे अपने आप में काफी विशेष बनाती हैं:-

 

1. मृत्यु के बाद गरुण पुराण का होता है श्रवण

सनातन हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद गरुण  पुराण का श्रवण किया जाता है। इसमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार, निष्काम कर्म की महिमा के साथ यज्ञ, दान, तप तीर्थ आदि शुभ कर्मों में सर्व साधारण को प्रवृत्त करने के लिये अनेक लौकिक और पारलौकिक फलों का वर्णन किया गया है। इसके अलाव गरुण पुराण में आयुर्वेद, नीतिसार आदि विषयों के वर्णन के साथ मृत जीव के अन्तिम समय में किये जाने वाले कृत्यों का विस्तार से निरूपण किया गया है।

 

2. इन पापों से लिप्त मनुष्य को मिलता है नर्क

गरुण पुराण में मनुष्य को उसके पापों के हिसाब से मिलने वाली सजा का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि ब्राह्मण और पंडित को मारना, किसी व्यक्ति को नशे की हालत में छोड़कर चले जाना, किसी पवित्र कसमों और वादों को तोड़ना, भ्रूण की हत्या करना या फिर भ्रूण को नष्ट करना आदि को गरुण पुराण (Garuda Purana) में गंभीर पाप माना गया है। ऐसा करने वाले मनुष्य को जीवन में जरूर यमलोक(नर्क) में अपने कर्मो की सज़ा पाने के लिए तैयार रहना होगा।

 

3. महिला पर अत्याचार करने वालों को भी भोगना होता है नर्क

किसी महिला की हत्या करना, महिला को प्रताड़ित (Oppressed) करना, या फिर उसकी इज्जत को लुटते हुए देखना या फिर किसी गर्भवती महिला को मारना-पीटना, किसी के विश्वास को धोखा देना और किसी की हत्या करने के लिए हथियार के रूप में ज़हर का इस्तेमाल करना। ये सब गरुण  पुराण में घोर पाप माने गए हैं, जिनके लिए सिर्फ नर्क ही एकमात्र द्वार है।

 

4.  पराए मर्द से संबंध स्थापित करने वाली स्त्री को मिलती है ये सजा

गरुण  पुराण में स्त्रियों के लिए भी सजा का जिक्र है। इसमें लिखा है कि यदि कोई स्त्री अपने पति को छोड़कर किसी पराए मर्द के साथ संबंध स्थापित करती है तो वो पाप की भागीदार मानी जाती है। मृत्य के बाद ऐसी आत्मा को यमलोक की यातना सहनी पड़ती है और छिपकली, सांप या चमगादड़ के रूप में नया जन्म मिलता है।

 

5. गौहत्या करना घोर पाप है गरुण  पुराण में

पवित्र या धार्मिक स्थलों को बुरी दृष्टि से देखने वाले लोगों या फिर पवित्र अग्नि, पवित्र पानी, बगीचे या गौशाला में मलमूत्र का त्याग करने वाले और गौहत्या करने वाले लोगों के लिए गरुण  पुराण में सख्त सजा का जिक्र किया गया है। इन पापों के लिए खुद यमराज सजा देते हैं और पाप करने वाले को नरक में भेज देते हैं। इसके अलावा हरे-भरे वन, जंगल, फसल और पेड़-पौधों की हरियाली नस्ट करना और प्रकृति के नये जन्म का विनाश (Destruction) करना गरुण  पुराण में पाप की श्रेणी में आता है।

 

गरुण  पुराण की कथा

महर्षि कश्यप के पुत्र पक्षीराज गरुण  को भगवान विष्णु का वाहन माना जाता है। कथा के अनुसार, एक बार पक्षीराज गरुण  ने भगवान विष्णु से मृत्यु के बाद प्राणियों की स्थिति, जीव की यमलोक-यात्रा, विभिन्न कर्मों से प्राप्त होने वाले नरकों, योनियों तथा पापियों की दुर्गति से संबंधित प्रश्न पूछे थे। उस समय भगवान विष्णु ने गरुण  के सवालों का जवाब देते हुए जो उपदेश दिया था, उसका जिक्र इसे पुराण में दिया गया है। गरुण  के माध्यम से ही भगवान विष्णु की श्रीमुख से मृत्यु के उपरांत के गूढ़ तथा परम कल्याणकारी वचन प्रकट हुए थे, इसलिए इस पुराण को ‘गरुण  पुराण’ कहा गया है।

 

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