Skip Navigation Links
संत सिपाही गुरु गोबिंद सिंह की 351वीं जयंती



संत सिपाही गुरु गोबिंद सिंह की 351वीं जयंती

"जब-जब होत अरिस्ट अपारा। तब-तब देह धरत अवतारा।"

गुरु गोबिंद सिंह जी के यह वचन श्रीमद भगवत गीता के अध्याय 4 के श्लोक 7

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।।

की याद दिलाते हैं। गुरु गोबिंद सिंह का जन्म जूलियन कलेंडर के अनुसार 22 दिसंबर सन् 1666 को व ग्रेगोरियन कलेंडर के अनुसार 1 जनवरी 1667 को हुआ। हिंदू कलेंडर के अनुसार यह तिथि 1723 विक्रम संवत् के पौष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी थी। इस वर्ष गुरु गोबिंद सिंह जी की 351वीं जयंती 25 दिसंबर को मनायी को जा रही है। जैसा कि खुद गुरु गोबिंद सिंह ने कहा था, कि जब-जब अत्याचार बढता है, तब-तब भगवान मानव देह का धारण कर पीड़ितों व शोषितों के दुख हरने के लिए आते हैं।

गुरु गोबिंद सिंह की उदारता के किस्से बचपन से ही मशहूर हो गए थे। वे एक निस्संतान बुढिया के साथ शरारत करते व उसकी सूत की पिन्नियों को बिखेर देते। बुढिया गुरु माता गुजरी के पास गुरु गोबिंद सिंह की शिकायत लेकर जाती तो माता उन्हें पैसे देकर उन्हें खुश कर देती। माता गुजरी ने एक दिन गुरु साहब से पूछा तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से कहा यदि वे उन्हें तंग नहीं करेंगें तो वह आपके पास कैसे आएगी? और जब आपके पास नहीं आएगी तो उसे पैसे कैसे मिलेंगें?


9 साल की उम्र में संभालानी पड़ी गुरु गद्दी

जब गुरु गोबिंद सिंह 9 साल के थे तब पिता गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों की फरियाद पर दिल्ली के चांदनी चौंक में अपना बलिदान दिया। उसके बाद गुरु गोबिंद सिंह को गद्दी पर बैठाया गया।

9 साल के इस बालक ने गुरु गद्दी की लाज रखते हुए युद्ध कौशल के साथ-साथ संस्कृत, अरबी, फारसी व पंजाबी आदि कई भाषाओं में महारत हासिल की। अत्याचार के खिलाफ विरोध में खड़े हुए।


वाहे गुरु जी का ख़ालसा, वाहे गुरु जी की फतेह

गुरु गोबिंद सिंह के अनुसार जब सारे साधन निष्फल हो जायें, तब तलवार ग्रहण करना न्यायोचित है। गुरु गोबिन्द सिंह ने 1699 ई. में धर्म एवं समाज की रक्षा हेतु ही ख़ालसा पंथ की स्थापना की थी। उनका कहना था देश धर्म व मानवता की रक्षा के लिए जो तन-मन-धन सब न्यौछावर कर दे। जो निर्धनों, असहायों और अनाथों की रक्षा के लिए सदा आगे रहे वही सच्चा ख़ालसा है। ये संस्कार गुरु जी ने, उनकी परीक्षा पर खरे उतरे पंच प्यारों को अमृत छकाकर उनमें भर दिये। गरु जी ने सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया। इतना ही नहीं धर्म की रक्षा के लिए गुरु जी के दो बड़े साहिबजादे 17 वर्षीय बाबा अजित सिंह, 15 वर्षीय बाबा जुझार सिंह ने युद्ध भूमि में अपनी शहादत दी तो 7 वर्षीय जोरावर सिंह और 5 वर्षीय फतेह सिंह को सरहंद में नवाब वजीर खां ने धर्मांतरण न करने पर दिवारों में जिंदा चुनवा दिया। माता गुजरी ने भी जो कि वजीर खां की कैद में थी, इसके बाद गुरु को याद कर अपनी देह त्याग दी थी।


महान विद्वान एवं ग्रंथकार

उन्होंने सिख्ख कानून को सूत्रबद्ध किया, काव्य की रचना की, गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा किया व इसे गुरु रुप में सुशोभित किया। जफरनामा, विचित्र नाटक, चण्डी चरित्र, जाप साहिब, आदि उनकी महान कृतियां हैं। भाई मणि सिंह ने दसम ग्रंथ में उनकी सभी रचनाओं का संकलन किया।


2017 में गुरु गोबिंद सिंह की जयंती

भारतीय पंचाग के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पौष मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनायी जाती है। 2017 में यह तिथि दो बार आयेगी इसलिये यह वर्ष गुरु साहब के अनुयायियों के लिये बहुत ही पावन है। 2017 में संत सिपाही गुरु गोबिंद सिंह की 350वीं जयंती 5 जनवरी को मनायी गई थी। इसी वर्ष 25 दिसंबर को पौष मास की शुक्ल सप्तमी तिथि होने से उनकी 351वीं जयंती मनायी जा रही है। 


संबंधित लेख

गुरु नानक जयंती - सतगुरु नानक प्रगटिया, मिटी धुंध जग चानण होआ   |   गुरु पूर्णिमा - गुरु की पूजा करने का पर्व   |   कबीर जयंती – जात जुलाहा नाम कबीरा

गोस्वामी तुलसीदास – राम के नाम को घर घर पंहुचाने वाला कवि   |   महर्षि वाल्मीकि - विश्व विख्यात ‘रामायण` के रचयिता   ।   महावीर जयंती 




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

चंद्र ग्रहण 2018 - 2018 में कब है चंद्रग्रहण?

चंद्र ग्रहण 2018 -...

चंद्रग्रहण और सूर्य ग्रहण के बारे में प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही विज्ञान की पुस्तकों में जानकारी दी जाती है कि ये एक प्रकार की खगोलीय स्थिति...

और पढ़ें...
माघ पूर्णिमा 2018 – सब पापों का नाश करता है माघी पूर्णिमा स्नान

माघ पूर्णिमा 2018 ...

हिंदू धर्म में माघ महीने का बहुत ही खास महत्व होता है। इस मास का वैसे तो हर दिन पवित्र माना जाता है लेकिन पूर्णिमा का माहात्मय तो सभी दिनों स...

और पढ़ें...
संत रविदास जयंती 2018 – माघ पूर्णिमा को हुआ था गुरु रविदास का जन्म

संत रविदास जयंती 2...

भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग कहा जाता है और कहा भी क्यों न जाये आखिर कबीर, रैदास, सूर, तुलसी इसी युग की तो देन हैं जिन्होंने भगवान ...

और पढ़ें...
बसंत पंचमी 2018 – वसंत पंचमी पर कब करें सरस्वती पूजा

बसंत पंचमी 2018 – ...

जब खेतों में सरसों फूली हो/ आम की डाली बौर से झूली हों/ जब पतंगें आसमां में लहराती हैं/ मौसम में मादकता छा जाती है/ तो रुत प्यार की आ जाती है...

और पढ़ें...
मंगल राशि परिवर्तन – क्या होगा असर आपकी राशि पर?

मंगल राशि परिवर्तन...

ज्योतिष में मंगल को वैसे तो पाप ग्रह माना जाता है। लेकिन शुभ कार्यों के लिये, जीवन में उन्नति के लिये मंगल का मंगलकारी होना भी जरुरी है। ऊर्ज...

और पढ़ें...