Hindu Nav Varsh 2026: कब शुरू होगा संवत्सर 2083? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

Tue, Mar 17, 2026
टीम एस्ट्रोयोगी
 टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
Tue, Mar 17, 2026
Team Astroyogi
 टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
article view
480
Hindu Nav Varsh 2026: कब शुरू होगा संवत्सर 2083? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

Hindu Nav Varsh 2026: वैसे तो दुनिया भर में नया साल 1 जनवरी को ही मनाया जाता है लेकिन भारतीय कैलेंडर के अनुसार नया साल 01 जनवरी से नहीं बल्कि चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से होता है। इसे नव संवत्सर भी कहते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह अक्सर मार्च-अप्रैल के महीने से आरंभ होता है। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि भारतीय कैलेंडर की गणना सूर्य और चंद्रमा के अनुसार होती है। माना जाता है कि दुनिया के तमाम कैलेंडर किसी न किसी रूप में भारतीय कैलेंडर का ही अनुसरण करते हैं। मान्यता तो यह भी है कि विक्रमादित्य के काल में सबसे पहले भारतीयों द्वारा ही कैलेंडर यानि कि पंचाग का विकास हुआ। इसना ही 12 महीनों का एक वर्ष और सप्ताह में सात दिनों का प्रचलन भी विक्रम संवत से ही माना जाता है। कहा जाता है कि भारत से नकल कर युनानियों ने इसे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैलाया।

सप्तर्षि संवत है सबसे प्राचीन

माना जाता है कि विक्रमी संवत से भी पहले लगभग सड़सठ सौ ई.पू. हिंदूओं का प्राचीन सप्तर्षि संवत अस्तित्व में आ चुका था। हालांकि इसकी विधिवत शुरूआत लगभग इक्कतीस सौ ई. पू. मानी जाती है। इसके अलावा इसी दौर में भगवान श्री कृष्ण के जन्म से कृष्ण कैलेंडर की शुरुआत भी बतायी जाती है। तत्पश्चात कलियुगी संवत की शुरुआत भी हुई।

विक्रमी संवत या नव संवत्सर

विक्रम संवत को नव संवत्सर भी कहा जाता है। संवत्सर पांच तरह का होता है जिसमें सौर, चंद्र, नक्षत्र, सावन और अधिमास आते हैं। विक्रम संवत में यह सब शामिल रहते हैं। हालांकि विक्रमी संवत के उद्भव को लेकर विद्वान एकमत नहीं हैं लेकिन अधितर 57 ईसवीं पूर्व ही इसकी शुरुआत मानते हैं।

सौर वर्ष के महीने 12 राशियों के नाम पर हैं इसका आरंभ मेष राशि में सूर्य की संक्राति से होता है। यह 365 दिनों का होता है। वहीं चंद्र वर्ष के मास चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ आदि हैं इन महीनों का नाम नक्षत्रों के आधार पर रखा गया है। चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है इसी कारण जो बढ़े हुए दस दिन होते हैं वे चंद्रमास ही माने जाते हैं लेकिन दिन बढ़ने के कारण इन्हें अधिमास कहा जाता है। नक्षत्रों की संख्या 27 है इस प्रकार एक नक्षत्र मास भी 27 दिन का ही माना जाता है। वहीं सावन वर्ष की अवधि लगभग 360 दिन की होती है। इसमें हर महीना 30 दिन का होता है।

हिंदू नववर्ष 2083 का महत्व

आज भले ही अंग्रेजी कैलेंडर का प्रचलन व्यापक हो गया हो, लेकिन भारतीय पंचांग की महत्ता आज भी उतनी ही बनी हुई है। हमारे व्रत-त्योहार, पर्व, महापुरुषों की जयंती-पुण्यतिथि, विवाह संस्कार और अन्य सभी शुभ कार्यों के मुहूर्त आज भी भारतीय कैलेंडर के अनुसार ही निर्धारित किए जाते हैं।

हिंदू नववर्ष 2083 का आरम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हो रहा है, जिसे बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है। इसी दिन से वासंती नवरात्र की शुरुआत होती है, जब मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व रहता है। देश के विभिन्न भागों में यह पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है—महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा और आंध्र प्रदेश व कर्नाटक में उगादी के रूप में उत्साह के साथ मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए यह तिथि सृजन, नव आरंभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।

वर्ष 2083 ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष है, क्योंकि इसका आरम्भ गुरुवार से हो रहा है, जिससे इस वर्ष के राजा गुरु ग्रह माने जा रहे हैं। साथ ही, अधिक मास होने के कारण इस वर्ष 13 महीने होंगे, जो इसे और भी खास बनाते हैं।

इस प्रकार हिंदू नववर्ष 2083 (Hindu New Year) केवल एक नया साल नहीं, बल्कि नई ऊर्जा, नई आशा और नए संकल्पों के साथ जीवन को आगे बढ़ाने का शुभ अवसर है। इसे श्रद्धा, उत्साह और सकारात्मकता के साथ मनाना चाहिए।

हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 कब शुरू होगा?

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नव संवत्सर कैलेंडर आरंभ होता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा19 मार्च 2026 को है। 

  • नव संवत्सर विक्रम संवत - 2083
  • नव संवत्सर आरंभ - 19 मार्च 2026
  • प्रतिपदा तिथि आरंभ -  प्रातः 06:50 मिनट से (19 मार्च 2026)
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त - प्रातः 04:53 मिनट तक (20 मार्च 2026)

हिन्दू कलेंडर 2083 के अनुसार मास

वर्ष 2083 के अनुसार इस नववर्ष की शुरुआत गुरुवार से हो रही है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब वर्ष का आरम्भ गुरुवार से होता है, तब उस वर्ष के राजा गुरु ग्रह बृहस्पति हैं। इसके साथ ही यह वर्ष विशेष रहेगा, क्योंकि इसमें 13 महीने होंगे। इसका कारण यह है कि इस वर्ष अधिक मास पड़ रहा है। ज्येष्ठ मास में एक अतिरिक्त अधिक मास जुड़ने से कुल महीनों की संख्या 13 हो जाएगी। इस प्रकार वर्ष 2083 ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण और विशेष फलदायक माना जा रहा है।

1. चैत्र मास, 2. वैशाख मास, 3. ज्येष्ठ मास, 4.  अतिरिक्त ज्येष्ठ "अधिक मास" 5. आषाढ़ मास, 6. श्रावण मास, 7. भाद्रपद मास, 8.आश्विन मास, 9. कार्तिक मास, 10. मार्गशीर्ष मास, 11. पौष मास, 12. माघ मास, 13.फाल्गुन मास. 

  1. चैत्र मास: 19 मार्च 2026 — 17 अप्रैल 2026

  2. वैशाख मास: 18 अप्रैल 2026 — 16 मई 2026

  3. ज्येष्ठ मास: 17 मई 2026 — 14 जून 2026

  4. अतिरिक्त ज्येष्ठ (अधिक मास): 15 जून 2026 — 13 जुलाई 2026 *

  5. आषाढ़ मास: 14 जुलाई 2026 — 12 अगस्त 2026

  6. श्रावण मास: 13 अगस्त 2026 — 10 सितंबर 2026

  7. भाद्रपद मास: 11 सितंबर 2026 — 9 अक्टूबर 2026

  8. आश्विन मास: 10 अक्टूबर 2026 — 7 नवंबर 2026

  9. कार्तिक मास: 8 नवंबर 2026 — 6 दिसंबर 2026

  10. मार्गशीर्ष मास: 7 दिसंबर 2026 — 4 जनवरी 2027

  11. पौष मास: 5 जनवरी 2027 — 2 फरवरी 2027

  12. माघ मास: 3 फरवरी 2027 — 3 मार्च 2027

  13. फाल्गुन मास: 4 मार्च 2027 — 1 अप्रैल 2027

नव संवत्सर में सुख व समृद्धि आपके घर कैसे आयेगी एस्ट्रोयोगी पर इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से ले गाइडेंस।

article tag
Hindu Astrology
Vedic astrology
article tag
Hindu Astrology
Vedic astrology
नये लेख

आपके पसंदीदा लेख

अपनी रुचि का अन्वेषण करें
आपका एक्सपीरियंस कैसा रहा?
facebook whatsapp twitter
ट्रेंडिंग लेख

ट्रेंडिंग लेख

और देखें

यह भी देखें!