ज्योतिष के आधार पर भारत के साथ कैसे रहेंगे बाइडन के रिश्ते? जानिए

10 नवम्बर 2020

अमेरिका के 2 बार उपराष्ट्रपति बनने और 50 साल तक सार्वजनिक तौर पर काम करने के बाद अमेरिका के नये निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन बन गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बहुमत साबित करते हुए 270 इलेक्टोरल कॉलेज वोटों का आंकड़ा पार कर लिया है। हालांकि बाइडन और ट्रंप के बीच वोटों का ज्यादा अंतर नहीं है लेकिन बाइडन के राष्ट्रपति पद तक पहुंचने के बीच उनके ग्रह-नक्षत्र की चाल और एस्ट्रोयोगी ज्योतिषी द्वारा उनकी कुंडली के आकलन के आधार पर हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्यों जो बाइडन को जीत मिली और क्यों डोनाल्ड ट्रंप को हार का सामना करना पड़ा? 

 

कैसे अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए जो बाइडन?

दरअसल जो बाइडन का जन्म 20 नवंबर 1942 को पेंसिल्वेनिया राज्य के स्क्रैंटॉन में हुआ था। ज्योतिष के अनुसार, जो बाइडेन का जन्म मकर लग्न में हुआ है। बाइडन की चंद्र राशि मेष बनती है। अश्विनी नक्षत्र के चौथे चरण में उनका जन्म हुआ है। वर्तमान में महादशा गुरु की चल रही है, अंतर्दशा राहु की और प्रत्यंतर में सूर्य देव चल रहे हैं, जिसकी वजह से बाइडन के लिए साल 2020 बहुत अच्छा गया है। इसके अलावा लग्न में ही शनि लग्नेश हो गये हैं, जिसने बाइडन को जीतने में मदद की। यदि गोचर की बात करें तो मंगल भी दशम में चंद्रमा को देखकर लक्ष्मीनारायण योग बना रहा था। साथ ही मंगल बुध का केन्द्र त्रिकोण राजयोग बनाना कुल मिलाकर बाइडन के राष्ट्रपति चुनाव में जीत का कारक माना जा रहा है। पराक्रम का स्वामी बृहस्पति उच्च का होकर के सूर्य को देख रहा है। सूर्य की दृष्टि भी पराक्रम स्थान पड़ रही है। सूर्य प्रत्यंतर में चल रहे थे और अक्टूबर से लेकर मार्च 2021 तक सूर्य देव रहने वाले है, जो बड़ी सफलता इनको देने वाले है।

 

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क्यों हार का सामना करना पड़ा ट्रंप को?

अब बात करते है ट्रंप को दुबारा से  राष्ट्रपति बनने का सौभाग्य क्यों प्राप्त नहीं हुआ? दरअसल अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जन्म 14 जून 1946 में क़ुईन्स, न्यूयॉर्क में हुआ था। ज्योतिष के अनुसार, उनका जन्म सिंह लग्न में हुआ है और उनकी चंद्र राशि वृश्चिक है। ज्येष्ठा नक्षत्र के चौथे चरण में उनका जन्म हुआ है। वर्तमान में गुरु की महादशा चल रही है, अंतर्दशा बुध की और प्रत्यंतर में भी बुध ही चल रहे है। चंद्रमा व सूर्य पर ग्रहण व कुंडली में कालसर्प दोष भी बन रहा है, जिसके कारण उनको हार का सामना करना पड़ा। वहीं मंगल व राहु का कुंडली में अच्छा होने के कारण उनका साथ तो मिला, लेकिन कालसर्प दोष के कारण उनको हार का सामना करना पड़ा।

 

पीएम मोदी और बाइडन के कैसे रहेंगे रिश्ते?

अगर बात पीएम मोदी और बाइडन के रिश्ते की जाए तो, नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन वृश्चिक लग्न में हुआ है उनकी राशि वृश्चिक बनती है। वर्तमान में चंद्रमा की महादशा में सूर्य का अंतर चल रहा है। सूर्य, बुध के साथ एक बुधादित्य योग बना रहा है, जो मान-सम्मान देने वाला है। वहीं गुरु की दृष्टि कार्य क्षेत्र पर पड़ना कार्य क्षेत्र में नाम रोशन करने का योग बना देता है और कार्य क्षेत्र का स्वामी बुध का सूर्य के साथ एक अच्छा योग देश विदेश में मान-सम्मान की प्राप्ति कराने वाला बना देता है। चंद्रमा भी लग्न में मंगल के साथ एक लक्ष्मी नारायण योग बना रहा है। इसके अलावा पीएम मोदी की कुंडली में लक्ष्मी नारायण योग, केंद्र त्रिकोण का राजयोग, बुधादित्य योग 2028 तक पीएम पद का सुख भोगने की ओर संकेत कर रहा है। 

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की कुंडली का हम अगर कैलकुलेशन करते हैं तो उनके ग्रहों में एक समानता है। दरअसल जो बाइडन का भी ग्यारहवें घर में सूर्य और शुक्र का एक केंद्र त्रिकोण राजयोग बन रहा है जबकि नरेंद्र मोदी की कुंडली में भी सूर्य और बुध का राजयोग उसी हाउस में बनता है। इसलिए कार्य क्षेत्र में इन दोनों का एक मेल रहेगा। डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन की कुंडली का हम अगर कैलकुलेशन करते हैं, तो डोनाल्ड ट्रंप की अपेक्षा जो बाइडन भारत के साथ रिश्ते और मजबूत बना सकते हैं। भारत की नीतियों या आर्थिक गतिविधियों में बाइडन पूर्ण सहयोग करेंगे। वहीं डोनाल्ड ट्रंप से कहीं ज्यादा बेहतर रिश्ते भारत के बाइडन के साथ हो सकते हैं। 

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