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महाभारत – किसने लिया किसका अवतार


महाभारत – किसने लिया किसका अवतार

महाभारत एक ग्रंथ हैं जिसे भारतीय समाज के जीवन दर्शन का मार्गदर्शक कहा जा सकता है विशेषकर हिंदू समाज के लिये। महाभारत कर्तव्यपरायणा का उपदेशक ग्रंथ जिसमें श्री मदभगवद्गीता का संदेश निहित है। जिसमें जीवन का सार छिपा है। जैसे माना जाता है कि महाभारत काल में भगवान श्री विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में अवतार धारण किया। तो क्या अन्य पात्रों के बारे में भी आप जानते हैं? नहीं ना? तो आइये जानते हैं महाभारत के मुख्य पात्रों के बारे में कि कौन किसका अवतार था।

मान्यता है कि महाभारत की कथा में जितने भी पात्र हैं उनमें अधिकतर किसी न किसी देवता, गंधर्व, यक्ष, रूद्र, वसु, अप्सरा एवं ऋषि आदि के अंशावतार थे। मुख्य पात्रों के अवतार इस प्रकार हैं-

भगवान श्री कृष्ण –  वैसे तो भगवान श्री कृष्ण इस सृष्टि के ही सर्वेसर्वा हैं और महाभारत में उन्होंने कहा भी है कि जो कुछ घट रहा है वह सब उन्हीं की मर्जी से हो रहा है। सभी कृत्यों के पिछे असली सूत्रधार वही हैं। भगवान श्री कृष्ण विष्णु भगवान के पूर्णावतार माने जाते हैं। जिनमें ईश्वर की समस्त कलाएं मौजूद थीं।

बलराम –  भगवान श्री कृष्ण के सखा बलराम जिन्हें हलधर भी कहा जाता है। श्री विष्णु के आसन बने शेषनाग के अंश माने जाते हैं। हालांकि महाभारत के युद्ध में बलराम किसी भी पक्ष की ओर से नहीं लड़े मान्यता है कि वे युद्ध छोड़ तीर्थ यात्रा पर चले गये थे।

भीष्म पितामह –  महाभारत में भीष्म पितामह की महता को सभी जानते हैं और उनके बारे में यह भी सभी जानते हैं कि उन्होंने भीषण प्रतिज्ञा की थी जिसके कारण वे देवव्रत से भीष्म कहलाए गंगा मैया की कोख से जन्मे भीष्म 8 वसुओं में से एक थे। इनका नाम द्यो था। महर्षि वशीष्ठ के श्राप के कारण ही इन्हें मनुष्य के रूप में जन्म लेना पड़ा।

गुरु द्रोणाचार्य –  गुरु द्रोणाचार्य के बारे में माना जाता है कि स्वयं देवगुरु बृहस्पति ने ही द्रोणाचार्य के रूप में महाभारत काल में जन्म लिया था।

अश्वत्थामा – महाभारत में अश्वत्थामा एक ऐसे पात्र हैं जिनके बारे में यह प्रचलित है कि युद्ध के पश्चात उनके कृत्यों के कारण मिले श्राप से आज भी उनकी आत्मा भटक रही है। गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा के बारे में माना जाता है कि ये स्वयं महाकाल, यम, क्रोध, काल के अंशावतार थे।

दानवीर कर्ण – कर्ण वैसे तो कुंती के ज्येष्ठ पुत्र थे जो सूर्यदेव के आशीर्वाद से जन्मे थे, लेकिन अविवाहित कुंती ने लोकलाज के भय से कर्ण को छोड़ दिया था। मान्यता है कि पूर्व जन्म कर्ण एक असुर थे जिन्होंने अपने तप से एक हजार रक्षा कवच हासिल किये थे इसी कारण उसका नाम सहस्त्रकवच पड़ गया था।

दुर्योधन – महाभारत के मुख्य खलनायक दुर्योधन हैं हालांकि नाम इनका सुयोधन था लेकिन अपने कर्मों से दुर्योधन कहलाये। इन्हें पुलस्त्य वंशी राक्षस का अंशावतार माना जाता है।

अर्जुन – अर्जुन महाभारत के रण में जिसके सारथी स्वयं भगवान बने, जिनका जन्म इंद्र के आशीर्वाद से हुआ। मान्यता है कि अर्जुन इंद्र के ही अंशावतार थे।

द्रौपदी – द्रौपदी को इंद्र की पत्नी इंद्राणी का अवतार माना जाता है।

रुक्मणी – भगवान श्री कृष्ण जो विष्णु के अवतार थे, रूक्मणी उनकी पत्नी थी इसी कारण रूक्मणी को मां लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।

विदुर – विदुर का जन्म भी कर्ण की तरह ही शापित माना जा सकता है क्योंकि योग्यता के बावजूद भी उन्हें वो अधिकार नहीं मिला जिसके वे पात्र थे। पांडू, धृतराष्ट्र और विदुर तीनों ही महर्षि वेदव्यास की संतान थे, लेकिन धृतराष्ट्र व पांडू अंबिका व अंबालिका की कोख से जन्मे तो विदुर ने दासी की कोख से जन्म लिया, धृतराष्ट्र जन्मांध तो पांडू अशक्त पैदा हुए थे जबकि विदुर हष्ट पुष्ट लेकिन दासी से जन्म लेने के कारण वे राजा सिंहासन नहीं पा सके और ताउम्र अपमानित होना पड़ा। मान्यता है कि विदुर पूर्व जन्म में यमधर्म थे जिन्हें झगड़े के फलस्वरूप अणिमांडव्य ऋषि ने शाप दिया था।

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