मौनी अमावस्या 2020 - माघी अमवास्या को गंगाजल बनता है अमृत

माघ के महीने को हिंदू धर्म ग्रंथों में बहुत पवित्र माना जाता है। इस मास के हर दिन को स्नान-दानादि के लिये बहुत ही शुभ माना जाता है। लेकिन माघ मास के ठीक मध्य में अमावस्या के दिन का तो बहुत विशेष महत्व माना जाता है। दरअसल मान्यता यह है कि इस दिन पवित्र नदी और मां का दर्जा रखने वाली गंगा मैया का जल अमृत बन जाता है। इसलिये माघ स्नान के लिये माघी अमावस्या यानि मौनी अमावस्या को बहुत ही खास बताया है। क्योंकि इस दिन व्रती को मौन धारण करते हुए दिन भर मुनियों सा आचरण करना पड़ता है इसी कारण यह अमावस्या मौनी अमावस्या कहलाती है। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार वर्ष 2020 में मौनी अमावस्या का यह त्यौहार जनवरी 24 को शुक्रवार के दिन है। माघ मास की यह अमावस्या शुक्रवार के दिन पड़ने से और भी खास हो जाती है। क्योंकि शुक्रवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या भी कहा जाता है।

 

मौनी अमावस्या पर पितृ दोष शांति व जीवन में सुख समृद्धि के लिये ज्योतिषीय परामर्श लें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से।

 

मौनी अमावस्या का महत्व

साधु, संत, ऋषि, महात्मा सभी प्राचीन समय से प्रवचन सुनाते रहे हैं कि मन पर नियंत्रण रखना चाहिये। मन बहुत तेज गति से दौड़ता है, यदि मन के अनुसार चलते रहें तो यह हानिकारक भी हो सकता है। इसलिये अपने मन रूपी घोड़े की लगाम को हमेशा कस कर रखना चाहिये। मौनी अमावस्या का भी यही संदेश है कि इस दिन मौन व्रत धारण कर मन को संयमित किया जाये। मन ही मन ईश्वर के नाम का स्मरण किया जाये उनका जाप किया जाये। यह एक प्रकार से मन को साधने की यौगिक क्रिया भी है। मान्यता यह भी है कि यदि किसी के लिये मौन रहना संभव न हो तो वह अपने विचारों में किसी भी प्रकार की मलिनता न आने देने, किसी के प्रति कोई कटुवचन न निकले तो भी मौनी अमावस्या का व्रत उसके लिये सफल होता है। सच्चे मन से भगवान विष्णु व भगवान शिव की पूजा भी इस दिन करनी चाहिये। शास्त्रों में इस दिन दान-पुण्य करने के महत्व को बहुत ही अधिक फलदायी बताया है। तीर्थराज प्रयाग में स्नान किया जाये तो कहने ही क्या अन्यथा गंगा मैया का जल जहां भी हो वह तीर्थ के समान ही हो जाता है। पहले मन में धर कर गंगा मैया का ध्यान, स्वच्छ जल में गंगाजल के कुछ छींटे देकर फिर करें स्नान। एक मान्यता के अनुसार इस दिन मनु ऋषि का जन्म भी माना जाता है जिसके कारण इस दिन को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है।

 

मौनी अमावस्या कैसे करें व्रत

व्रत उपवास के लिये सबसे पहली और अहम जरूरत होती है तन मन का स्वच्छ होना, अपने तन मन की बाह्य और आंतरिक स्वच्छता, निर्मलता के लिये ही इस दिन मौन व्रत रखा जाता है व दिन भर प्रभु का नाम मन ही मन सुमिरन किया जाता है। साथ ही प्रात:काल पवित्र तीर्थ स्थलों पर स्नान किया जाता है। स्नान के बाद तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, वस्त्रादि किसी गरीब ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों का तर्पण करने से भी उन्हें शांति मिलती है।

 

मौनी अमावस्या 2020 तिथि व मुहूर्त

मौनी अमावस्या शुक्रवार, जनवरी 24, 2020

अमावस्या तिथि प्रारम्भ - जनवरी 24, 2020 को 02:17  बजे से 
अमावस्या तिथि समाप्त - जनवरी 25, 2020 को 03:11  बजे तक 

 

यह भी पढ़ें

2020 में कब कब हैं अमावस्या   |   गंगा मैया देती हैं जीवात्मा को मोक्ष   |   आरती श्री गंगा जी   |   श्री गंगा चालीसा   |  

माघ – स्नान-दान से मिलता है मोक्ष   |   माघ - इस माह का है हर दिन पवित्र   |   मोक्षदायिनी पौष पूर्णिमा   |  

पौष मास – जानें पौष मास के व्रत त्यौहार व महत्व के बारे में    |   सावन - शिव की पूजा का माह   |  

सावन के बाद आया, श्रीकृष्ण जी का माह ‘भादों‘   |   मार्गशीर्ष – जानिये मार्गशीर्ष मास के व्रत व त्यौहार   | 

 

एस्ट्रो लेख

हिन्दू-मुस्लिम ...

“जिस बाग में तरह-तरह के फूल हों, उसकी खूबसूरती अद्भुत होती है“ -स्वामी विवेकानंद हमारे देशरूपी बाग में अनेक धर्मों ने फूलों की तरह खिलकर इसे खूबसूरत गुलदस्ते का रूप दिया है। यही...

और पढ़ें ➜

श्री हनुमान जयन...

प्रभु श्री राम के भक्त, संकट मोचन, महावीर, बजरंग बलि हनुमान की महिमा सबसे न्यारी हैं। सूरज को निगलना, पर्वत को उठाकर उड़ना, रावण की सोने की लंका को फूंकना कितने ही ऐसे असंभव लगने व...

और पढ़ें ➜

हनुमान जी के इस...

क्या आपने कभी सुना या पढ़ा है कि भगवान भी अपने भक्त को किसी मांग के पूरा होने की गारंटी दे सकते हैं। जी हाँ, अपने ऐसा कभी सोचा भी नहीं होगा। लेकिन कर्नाटक राज्य के गुलबर्गा क्षेत्र ...

और पढ़ें ➜

गंधमादन पर्वत -...

श्री हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास ने भी लिखा है कि – ‘चारो जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा।’ इस चौपाई में साफ संकेत है कि हनुमान जी ऐसे देवता है, जो हर ...

और पढ़ें ➜