रथ सप्तमी 2021

16 फरवरी 2021

सनातन धर्म में रथ सप्तमी (rath saptami) को अचला सप्तमी भी कहा जाता है, जिसे धार्मिक रूप से प्रासंगिक त्योहारों में से एक माना जाता है। रथ सप्तमी को पूरे भारत में मनाया जाता है। रथ सप्तमी को अचला सप्तमी (Achala Saptami 2021 के अलावा 'माघ सप्तमी, 'माघ जयंती' और 'सूर्य जयंती' भी कहते हैं। रथ सप्तमी माघ महीने में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। इस तिथि को भगवान सूर्य के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस साल रथ सप्तमी 19 फरवरी 2021 के दिन बुधवार को पड़ रही है। यह तिथि भगवान सूर्य नारायण को समर्पित की जाती है। ज्योतिषी मानते हैं कि यदि यह तिथि रविवार को पड़ती है तो इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। रविवार के दिन माघ शुक्ल सप्तमी पड़ती है तो उसे अचला भानू सप्तमी कहा जाता है। 

 

रथ सप्तमी का महत्व

  • रथ सप्तमी का दिन अपने रथ में भगवान सूर्य की उत्तरी गोलार्द्ध की यात्रा को दर्शाता है। साथ ही इस दिन के बाद से गर्मी का आगमन माना जाता है। दक्षिणी भारत के क्षेत्रों में जलवायु परिस्थितियों में बदलाव का संकेत देता है। यह किसानों के लिए फसल के मौसम की शुरुआत का भी प्रतीक है।
  • रथ सप्तमी को सूर्य जयंती के रूप में मनाया जाता है, इसलिए इस जयंती का महत्व बहुत खास हो जाता है। कहते हैं कि इस विशेष दिन पर भगवान सूर्य ने अपनी गर्माहट और चमक से पूरे ब्रह्मांड को चमका दिया था।
  • शास्त्रों और आरोग्य की दुनिया में सूर्य को आरोग्यदायक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य की उपासना से शरीर के रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने और उगते सूर्य को जल देने का विधान है। मान्यता है कि सूर्य सप्तमी के दिन सूर्य की ओर मुख करके पूजा करने से चर्म रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है।
  • ज्योतिषशास्त्र में सूर्य का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि सूर्य की उपासना करने से पिता-पुत्र के संबंध मजबूत होते हैं और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। जिस तरह से हर त्योहार या व्रत के पीछे कोई न कोई पौराणिक आधार अवश्य होता है उसी प्रकार से अचला सप्तमी मनाने के पीछे भी एक आधार है और वो आधार है इसके पीछे की पौराणिक कथा

 

रथ सप्तमी की पौराणिक कथा

रथ सप्तमी की पौराणिक कथा इस प्रकार है कि भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने बाहुबल पर बहुत अधिक अभिमान था। इसी अभिमान के चलते एकबार शाम्ब ने  दुर्वासा ऋषि का अपमान कर दिया था। दुर्वासा ऋषि को शाम्ब की धृष्ठता के कारण क्रोध आ गया, जिसके पश्चात उन्होंने शाम्ब को कुष्ठ हो जाने का श्राप दे दिया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र शाम्ब से भगवान सूर्य नारायण की उपासना करने के लिए कहा। शाम्ब ने भगवान कृष्ण की आज्ञा मानकर सूर्य भगवान की आराधना करनी शुरू कर दी, जिसके सूर्य नारायण की कृपा से उन्हें अपने कुष्ठ रोग से मुक्ति प्राप्त हो गई। इसलिए सूर्य सप्तमी के दिन जो भी सूर्य भगवान की आराधना सच्चे हृदय से करता है उसे रोगों से मुक्ति प्राप्त होकर आरोग्य, पुत्र और धन की प्राप्ति होती है।

 

टैरो रीडर । अंक ज्योतिषी । वास्तु सलाहकार । फेंगशुई एक्सपर्ट । करियर एस्ट्रोलॉजर । लव एस्ट्रोलॉजर । फाइनेंशियल एस्ट्रोलॉजर । मैरिज एस्ट्रोलॉजर । मनी एस्ट्रोलॉजर । स्पेशलिस्ट एस्ट्रोलॉजर 

 

रथ सप्तमी के दिन व्रत करने की विधि

  • भारत देश में कई मंदिर और पवित्र स्थान ऐसे हैं, जहां भगवान सूर्य की भक्ति की जाती है। इन सभी स्थानों पर रथ सप्तमी की पूर्व संध्या पर विशाल समारोह और विशेष अनुष्ठान होते हैं। इनमें तिरुमाला, तिरुपति बालाजी मंदिर, श्री मंगूज मंदिर, मल्लिकार्जुन मंदिर है। आपको बता दें कि इस दिन व्रत करने का भी प्रावधान है। यह व्रत करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है। स्नान के बाद स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण करे।
  • सूर्योदय के समय तांबे के कलश से सूर्यदेव को 12 बार जल का अ‌र्घ्य दें। जल में लाल गुड़हल का पुष्प भी डालें या लाल चंदन डालें। अ‌र्घ्य देते समय सूर्य के 12 नामों का उच्चारण करें। यदि 12 नाम याद न हों तो ऊं सूर्याय नम: या ऊं घृणि: सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते रहें। जल की गिरती धारा के मध्य से सूर्यदेव को देखने का प्रयास करें। इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली सजाएं। पूजा स्थान में सूर्यदेव का सात घोड़ों वाले रथ पर सवार चित्र दीवार पर चिपकाकर पूजन करें। धूप, दीप, नैवेद्य सहित पूजन करें। इस दिन भोजन में नमक का प्रयोग नहीं किया जाता है।

 

रथ सप्तमी के दिन पूजा करने के लाभ

कहा जाता है कि रथ सप्तमी की पूर्व संध्या पर भगवान सूर्य की पूजा करने से, भक्त अपने अतीत और वर्तमान पापों से छुटकारा पाते हैं और मोक्ष प्राप्त करने के मार्ग के समीप एक कदम बढ़ाते हैं। साथ ही भगवान सूर्य दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य को प्रदान करते हैं और यह माना जाता है कि भक्तों को इसका आशीर्वाद मिलता है यदि वे इस शुभ अवसर पर देवता की पूजा करते हैं ।

 

रथ सप्तमी शुभ मुहूर्त

स्नान मुहूर्त - सुबह 5 बजकर 41 मिनट से सुबह 6 बजकर 55 मिनट तक

सप्तमी तिथि प्रारम्भ - 18 फरवरी 2021 को सुबह 08:17 बजे

सप्तमी तिथि समाप्त - 19 फरवरी 2021 को सुबह 10:58  बजे तक

 

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