Skip Navigation Links
विषयोग - इन तिथियों में बनेगा विष योग रहें सावधान!


विषयोग - इन तिथियों में बनेगा विष योग रहें सावधान!

आपके जीवन में सब कुछ सही चल रहा होता है लेकिन अचानक से कुछ दिन ऐसे खराब जाने लगते हैं कि आप सिर्फ सोचते रह जाते हैं यह क्या हुआ? कोई किसी अपने को खो देता है, तो कोई अपमानित महसूस करता है, कोई स्यवं को दुखिया मानने लगता है तो किसी अपनी माली हालत पर तरस आने लगता है। कुल मिलाकर भय और दुख-तकलीफों से स्वयं को घिरा हुआ महसूस करता है। ऐसी परिस्थितियां किसी के भी जीवन में आ सकती हैं लेकिन क्या ये सिर्फ परिस्थितियां होती हैं? व्यक्ति के अपने कर्म होते हैं? नहीं, कम से कम ज्योतिषशास्त्र के अनुसार तो ऐसा नहीं कहा जा सकता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जातक के कुंडली में ग्रहों के शुभाशुभ योगों से ही उसका जीवन प्रभावित होता है। ऊपर जिन स्थितियों के बारे में जिक्र किया गया है ऐसी ही स्थितियां पैदा हो जाती हैं यदि जातक विषयोग से प्रभावित हो? आइये जानते हैं क्या है विषयोग और कब-कब बना रहे हैं शनि चंद्रमा विष योग।


क्या है विषयोग?

जब चंद्रमा शनि के साथ गोचर करने लगता है तो वह विषयोग का निर्माण करता है। चूंकि चंद्रमा लगभग 27 दिनों में सभी 12 राशियों का एक चक्र पूरा कर लेता है इसलिये संभवत हर मास एक बार विषयोग जरूर बनाता है। जिन जातकों की जन्मकुंडली में ही विषयोग हो, उन्हें तो और भी संघर्ष जीवन में करने पड़ते हैं। जातक का स्वास्थ्य, जातक की आर्थिक हालत, मानसिक विचार माने जीवन के प्रत्येक पहलू में नकारात्मकता दिखाई देने लगती हैं। हालांकि कुछ शुभ ग्रहों के प्रभाव से हो सकता है कुछ जातकों के लिये यह बहुत अधिक प्रभावी न भी हो लेकिन इसका कुछ न कुछ असर जरूर दिखाई देता है? सिर्फ चंद्रमा व शनि की युति ही नहीं कुछ और स्थितियां भी हैं जिनसे विषयोग बनता है। मसलन यदि लग्न में चंद्रमा हो व तीसरी, सप्तम या दशम भाव से शनि की दृष्टि चंद्रमा पर पड़ रही हो तो ऐसे में भी विषयोग का निर्माण होता है। वहीं यदि शनि कर्क राशि पुष्य नक्षत्र में हो और चंद्रमा मकर राशि में श्रवण नक्षत्र का रहे या फिर शनि और चंद्रमा एक दूसरे के ठीक विपरीत हों और एक-दूसरे को देख रहे हों वैसी स्थिति भी विषयोग बनाती है।


चंद्रमा ही नहीं राहू भी बनाते हैं विषयोग

राहू यदि कुंडली में आठवें स्थान पर हों व मेष, कर्क, सिंह या वृश्चिक लग्न में शनि हों तो उस स्थिति में भी जातक विष योग से पीड़ीत माना जाता है।


चंद्रमा व शनि कब-कब बना रहे हैं विषयोग?

प्रत्येक मास में जब-जब चंद्रमा व शनि की युति होती है तो वह समय विशेष रूप से सावधानी बरतने का होता है। साल के बचे पांच महीनों में शनि व चंद्रमा कब-कब साथ आ रहे हैं आइये जानते हैं?


अगस्त माह में विषयोग

अगस्त माह में एक बार विषयोग बन रहा है जो कि माह के उतर्राध में है। 20 अगस्त को रात्रि 9 बजकर 42 मिनट से 23 अगस्त को सुबह 10 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

सितंबर माह में विषयोग

सितंबर माह में एक बार विषयोग बन रहा है जो कि 17 सितंबर को प्रात: 4 बजकर 56 मिनट से 19 सितंबर को सांय 5 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।


अक्तूबर माह में विषयोग

अक्तूबर माह में एक बार विषयोग बनेगा जो 14 अक्तूबर को दोपहर 1 बजकर 15 मिनट से 17 अक्तूबर को मध्यरात्रि पश्चात 1 बजकर 09 मिनट तक बनेगा।


नवंबर माह में विषयोग

नवंबर माह में भी एक बार ही विषयोग बन रहा है जो 11 नवंबर से 13 नवंबर तक रहेगा।


दिसंबर माह में विषयोग

दिसंबर माह में एक ही विषयोग बन रहा है जो कि 8 दिसंबर से 10 दिसंबर तक रहेगा।

यदि आपके बनते हुए काम अचानक से बिगड़ जाते हैं? सफलता के निकट पंहुच कर विफलता ही हाथ लगती है तो हो सकता है विषयोग के प्रभाव से ऐसा हो रहा हो? इस बारे में  ऐस्ट्रोयोगी पर इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से गाइंडेंस अवश्य लें।

अन्य लेख

क्या आपके बने-बनाये ‘कार्य` बिगड़ रहे हैं? सावधान ‘विष योग` से   |   कुंडली में संतान योग   |   कुंडली में विवाह योग   |   कुंडली में प्रेम योग

कुंडली का यह योग व्यक्ति को बना देता है राजा   |   कुंडली के वह योग जो व्यक्ति को एक्टर बना सकते हैं ! 

कुंडली के वह योग, जो व्यक्ति को बनाते हैं धनवान !   |   कुंडली के वह योग जो व्यक्ति को बनाते हैं एक सफल उद्यमी 




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

मोक्षदा एकादशी 2018 – एकादशी व्रत कथा व महत्व

मोक्षदा एकादशी 201...

एकादशी उपवास का हिंदुओं में बहुत अधिक महत्व माना जाता है। सभी एकादशियां पुण्यदायी मानी जाती है। मनुष्य जन्म में जाने-अंजाने कुछ पापकर्म हो जाते हैं। यदि आप इन पापकर्...

और पढ़ें...
गीता जयंती 2018 - कब मनाई जाती है गीता जयंती?

गीता जयंती 2018 - ...

कर्मण्यवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन |मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोSस्त्वकर्मणि ||मनुष्य के हाथ में केवल कर्म करने का अधिकार है फल की चिंता करना व्यर्थ अर्थात निस्वार्...

और पढ़ें...
विवाह पंचमी 2018 – कैसे हुआ था प्रभु श्री राम व माता सीता का विवाह

विवाह पंचमी 2018 –...

देवी सीता और प्रभु श्री राम सिर्फ महर्षि वाल्मिकी द्वारा रचित रामायण की कहानी के नायक नायिका नहीं थे, बल्कि पौराणिक ग्रंथों के अनुसार वे इस समस्त चराचर जगत के कर्ता-...

और पढ़ें...
मार्गशीर्ष – जानिये मार्गशीर्ष मास के व्रत व त्यौहार

मार्गशीर्ष – जानिय...

चैत्र जहां हिंदू वर्ष का प्रथम मास होता है तो फाल्गुन महीना वर्ष का अंतिम महीना होता है। महीने की गणना चंद्रमा की कलाओं के आधार पर की जाती है इसलिये हर मास को अमावस्...

और पढ़ें...
उत्पन्ना एकादशी 2018 - जानिये उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा व पूजा विधि

उत्पन्ना एकादशी 20...

एकादशी व्रत कथा व महत्व के बारे में तो सभी जानते हैं। हर मास की कृष्ण व शुक्ल पक्ष को मिलाकर दो एकादशियां आती हैं। यह भी सभी जानते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा...

और पढ़ें...