भाई न हो, तो रक्षाबंधन पर किसे बांधें राखी? जानें क्या है सही तरीका

Wed, Aug 26, 2026
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भाई न हो, तो रक्षाबंधन पर किसे बांधें राखी? जानें क्या है सही तरीका

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के संकल्प से जुड़ा है। लेकिन जिन बहनों का कोई भाई नहीं है, वे इस दिन राखी किसे बांधें, इसे लेकर अक्सर मन में सवाल रहता है। ऐसी स्थिति में कई लोग अलग अलग तरीके अपनाते हैं। इसके अलावा रक्षाबंधन पर राखी उपलब्ध न होने पर कौन-सा धागा इस्तेमाल करें। 

रक्षाबंधन पर भगवान को रक्षासूत्र क्यों बांधें?

जिन महिलाओं का कोई भाई नहीं है, वे रक्षाबंधन के दिन अपने इष्टदेव को रक्षासूत्र बांध सकती हैं। भगवान गणेश, देवी दुर्गा, हनुमान जी, श्रीकृष्ण, श्रीराम, भगवान शिव या जिस देवी-देवता को आप अपना आराध्य मानते हैं, उन्हें राखी बांधी जा सकती है।

इष्टदेव को रक्षासूत्र बांधते समय श्रद्धा के साथ अपनी और अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्रार्थना करें। पुरुष भी अपने इष्टदेव को रक्षासूत्र बांध सकते हैं। इसे भगवान के प्रति श्रद्धा और रक्षा की प्रार्थना के रूप में देखा जाता है।

किस इष्ट देव को किस रंग की राखी बांधनी चाहिए?

रक्षाबंधन पर कई लोग अपने इष्टदेव को भी रक्षा सूत्र अर्पित करते हैं। मान्यता है कि देवताओं को उनकी पसंद के रंग का रक्षा सूत्र अर्पित करने से पूजा का शुभ फल मिलता है। आइए जानते हैं किस इष्ट देव को किस रंग की राखी या रक्षा सूत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है।

1. भगवान गणेश को लाल या पीला रक्षा सूत्र

रक्षाबंधन पर कई घरों में सबसे पहले भगवान गणेश को राखी या रक्षा सूत्र अर्पित किया जाता है। गणेश जी को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। इसलिए उनके चरणों में रक्षा सूत्र चढ़ाकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। गणेश जी को लाल या पीले रंग का रक्षा सूत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।

2. भगवान शिव को सफेद या रुद्राक्ष वाला रक्षा सूत्र

रक्षाबंधन सावन की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इसलिए इस दिन कई भक्त शिवलिंग या भगवान शिव को रक्षा सूत्र अर्पित करते हैं। भगवान शिव को सफेद, लाल या रुद्राक्ष से बना रक्षा सूत्र चढ़ाने की परंपरा है। इसके पीछे परिवार की रक्षा, सुख और शांति की कामना का भाव होता है।

3. भगवान श्रीकृष्ण को पीला या मोरपंखी रक्षा सूत्र

रक्षाबंधन से जुड़ी भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा काफी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि जब श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त निकला, तब द्रौपदी ने अपने वस्त्र का एक टुकड़ा उनकी उंगली पर बांध दिया था। द्रौपदी के इस स्नेह और अपनत्व को श्रीकृष्ण ने रक्षा के भाव से जोड़ा। इसी कारण कई लोग रक्षाबंधन पर भगवान कृष्ण को राखी अर्पित करते हैं। उन्हें पीले या मोरपंखी रंग का रक्षा सूत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है।

4. भगवान हनुमान को लाल रक्षा सूत्र

भगवान हनुमान को शक्ति, साहस और संकटों से रक्षा करने वाला देवता माना जाता है। इसी भाव से रक्षाबंधन पर कई भक्त उन्हें रक्षा सूत्र अर्पित करते हैं। हनुमान जी को लाल रंग का रक्षा सूत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे बजरंगबली की कृपा और सुरक्षा का भाव जुड़ा रहता है।

5. भगवान विष्णु को पीला रक्षा सूत्र

भगवान विष्णु और रक्षाबंधन का संबंध राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि श्रावण पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर अपना भाई बनाया था। इसके बाद उन्होंने राजा बलि से भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ ले जाने का वर मांगा।

भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय माना जाता है और उनका संबंध पीतांबर से भी जोड़ा जाता है। इसलिए उन्हें पीले रंग का रक्षा सूत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।

राखी नहीं है तो क्या बांधें?

अगर बाजार वाली राखी या रक्षासूत्र उपलब्ध नहीं है तो रेशमी धागे का इस्तेमाल किया जा सकता है। रेशमी धागा भी न हो तो पूजा में इस्तेमाल होने वाला लाल धागा रक्षासूत्र के रूप में बांधा जा सकता है।

अगर इनमें से कुछ भी उपलब्ध नहीं है तो भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना की जा सकती है। रक्षाबंधन में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और शुभकामना को माना जाता है।

रक्षासूत्र बांधने का मंत्र और राजा बलि की कथा

रक्षासूत्र बांधते समय राजा बलि से जुड़े एक प्राचीन मंत्र का जाप करने की परंपरा है। इस मंत्र में दैत्यराज बलि का उल्लेख किया गया है और रक्षासूत्र के माध्यम से सुरक्षा, सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है। रक्षासूत्र बांधने का मंत्र और उसका अर्थ जानने के लिए इस विस्तृत मार्गदर्शिका को पढ़ें।

राजा बलि और भगवान विष्णु की कथा के अनुसार, वामन अवतार में भगवान विष्णु ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। बलि ने अपना सब कुछ अर्पित कर दिया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया। बाद में देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधकर अपना भाई बनाया और उनसे भगवान विष्णु को वैकुंठ लौटने देने का अनुरोध किया।

रक्षाबंधन से जुड़ी पूरी कहानी जानने के लिए यहां क्लिक करें।

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