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Raksha Bandhan Ka Mantra: रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है जो उसके प्यार और स्नेह का प्रतीक होती है। इस दौरान रक्षासूत्र मंत्र का उच्चारण करने की परंपरा है। यह मंत्र रक्षाबंधन की रस्म में रक्षा, मंगलकामना और शुभ संकल्प के भाव को व्यक्त करता है। इसलिए जरूरी है कि आपको सही मंत्र के साथ-साथ उसके अर्थ और उच्चारण का भी ज्ञान हो, ताकि इसे केवल याद करके नहीं, बल्कि उसके भाव को समझते हुए बोला जा सके।
यहां आपको रक्षाबंधन मंत्र संस्कृत में और उसका सरल हिंदी अर्थ जानने को मिलेगा। साथ ही, मंत्र के सही उच्चारण और जाप से जुड़ी जानकारी भी मिलेगी। इससे आप मंत्र को उसके अर्थ और भाव को समझते हुए श्रद्धा के साथ बोल सकेंगे और भाई के लिए की गई मंगलकामना को अधिक सार्थक बना सकेंगे।
ॐ येन बद्धो बली राजा
दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां प्रतिबध्नामि
रक्षे मा चल मा चल॥
उच्चारण: Om yena baddho Bali raja, danavendro mahabalah. Tena tvam pratibadhnami, rakshe ma chala ma chala.
इस रक्षासूत्र मंत्र में रक्षा और स्थिरता का भाव व्यक्त किया गया है। मंत्र में कहा गया है कि जिस रक्षासूत्र से महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षासूत्र से तुम्हें बांधता या बांधती हूं। हे रक्षासूत्र, तुम स्थिर रहो और अपने रक्षा-संकल्प से विचलित न हो। इस तरह मंत्र के शब्द रक्षासूत्र को सुरक्षा और शुभ संकल्प के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
येन- जिस रक्षासूत्र से
बद्धो- बांधा गया
बली राजा- राजा बलि
दानवेन्द्रो- दानवों के स्वामी या श्रेष्ठ
महाबलः- अत्यंत बलशाली
तेन- उसी से
त्वां- तुम्हें
प्रतिबध्नामि- मैं बांधता/बांधती हूं
रक्षे- हे रक्षासूत्र
मा चल, मा चल- स्थिर रहो, चलायमान मत हो
रक्षाबंधन मंत्र का उच्चारण करते समय शब्दों की स्पष्टता, सही गति और भाव पर ध्यान देना चाहिए।
- मंत्र को शांत भाव और सामान्य गति से बोलें। जल्दबाजी में शब्दों को मिलाने या छोड़ने से बचें।
- संस्कृत के शब्दों का यथासंभव शुद्ध उच्चारण करने का प्रयास करें। यदि उच्चारण पूरी तरह स्पष्ट न हो, तो मंत्र का अर्थ समझकर श्रद्धा से बोलना अधिक महत्वपूर्ण है।
- मंत्र का उच्चारण बहन स्वयं, परिवार का कोई बड़ा सदस्य या पुरोहित कर सकता है। इसके लिए किसी एक व्यक्ति का मंत्र बोलना ही आवश्यक नहीं माना जाता।
- यदि मंत्र पूरी तरह याद न हो, तो उसे देखकर पढ़ सकते हैं। केवल मंत्र के भाव और अर्थ को मन में रखते हुए श्रद्धा से बोलना भी पर्याप्त माना जाता है।
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रक्षाबंधन पर बोला जाने वाला रक्षासूत्र मंत्र केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि रक्षा, शुभकामना और संकल्प के भाव को व्यक्त करने वाला मंत्र माना जाता है। इसके शब्द रक्षासूत्र को सुरक्षा और मंगलकामना के प्रतीक के रूप में स्थापित करते हैं। इसलिए राखी बांधते समय मंत्र का अर्थ समझकर उसका उच्चारण करना इसके भाव को और गहरा बना सकता है।
रक्षासूत्र मंत्र का संबंध राजा बलि से जुड़ी एक प्रचलित मान्यता से भी बताया जाता है। एक अन्य प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु राजा बलि के यहां रहने लगे, तब माता लक्ष्मी ने बलि को अपना भाई मानकर उन्हें रक्षा-सूत्र बांधा। इसके बाद उन्होंने भाई के रूप में बलि से भगवान विष्णु को अपने साथ वापस ले जाने का वचन लिया। इस कथा में रक्षा-सूत्र भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और वचन का प्रतीक बनकर सामने आता है। यह कथा मंत्र के मूल पाठ की व्याख्या नहीं, बल्कि रक्षासूत्र से जुड़ी एक प्रचलित लोक-परंपरा के रूप में समझी जाती है।
मंत्र के साथ बांधा गया रक्षासूत्र केवल एक धागा नहीं रहता, बल्कि उसमें रक्षा, विश्वास और मंगलकामना का भाव जुड़ जाता है। मंत्र के प्रत्येक शब्द का अर्थ समझकर बोलने से इस भाव को अधिक गहराई से अनुभव किया जा सकता है।
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