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दशहरा या विजयादशमी हिन्दुओं के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। दशहरा अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है इसलिए इसे विजय दशमी भी कहा जाता है। इस त्योहार को आयुध पूजा के नाम भी जाना जाता है। दशहरा साल की तीन सबसे शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल और कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा। इस दिन सभी लोग नया कार्य प्रारंभ करते हैं और शस्त्र पूजा के साथ-साथ वाहन पूजा भी करते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी मनाई जाती है। शारदीय नवरात्रि के समाप्त होने के बाद दसवें दिन इस त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पुरुषोत्तम श्री राम ने लंकापति रावण का वध किया था। इस वजह से हर साल नवरात्रि के आखिरी दिन, दशमी या विजयादशमी के दिन रावण का पुतला जलाया जाता है। बड़े ही हर्षोल्लास के साथ दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है। दस सिरों वाले रावण के अंत की वजह से ही इसे दशहरा कहा जाता है
ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों के अनुसार दशहरा पूजन 5 अक्टूबर, बुधवार को दशमी तिथि विजय मुहूर्त के संयोग में भगवान श्री राम और शस्त्र पूजा करनी चाहिए। विजयदशमी को अबूझ मुहूर्त माना गया है। यानी दशहरा का दिन कोई भी नया काम करने के लिए अत्यंत शुभ होता है। यदि आप नया व्यापार शुरू कर रहे हैं या फिर कुछ नया खरीद रहे हैं तो यह बिलकुल उचित समय होता है। इसके अलावा इस दिन जमीन - जायदाद की खरीदारी, सोने के आभूषण, कार, मोटर साइकिल और हर तरह की खरीदारी की जा सकती है।
दशहरा 2022 तिथि : हिन्दू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 04 अक्टूबर 2022, मंगलवार की दोपहर 02 बजकर 20 मिनट से आरंभ होगी। दशमी तिथि का समापन 05 अक्टूबर 2022 को दोपहर 12 बजे होगा।
पूजा का समय : दोपहर एक बजकर 20 मिनट से दोपहर 3 बजकर 41 मिनट तक रहेगा।
विजय मुहूर्त : दोपहर 2 बजकर 7 मिनट से लेकर 2 बजकर 54 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा, जो कि पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
पूजा विधि
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे का संबंध भगवान विष्णु के अवतार श्री राम से है। इस दिन भगवान राम ने धरती पर अत्याचार कर रहे रावण का वध किया था। माता सीता के अपहरण के बाद श्री राम और रावण के बीच दस दिनों तक युद्ध चलता रहा था। रावण के पास बलशाली सेना से लेकर अस्त्र व शस्त्रों की कोई कमी नहीं थी। भगवान शिव का उपासक होने के कारण उसे अनेकों वरदान प्राप्त थे। दूसरी ओर प्रभु राम के पास केवल वानर सेना थी। राम ने अपनी पत्नी सीता को वापस लाने के लिए रावण से युद्ध किया था, जिसमें समस्त वानर सेना व हनुमान जी ने उनका का साथ दिया था। इस युद्ध में रावण के छोटे भाई विभीषण ने भी भगवान राम का साथ दिया था। अन्त में भगवान राम ने रावण को मार कर उसके घमंड का नाश किया था।
नवरात्रि के नौ दिन देश के विभिन्न स्थानों पर राम लीला का आयोजन किया जाता है। दसवें दिन रामलीला के समापन के साथ रावण का वध किया जाता है। जगह-जगह लोग रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाते हैं। किसी एक व्यक्ति को श्री राम का रूप दे कर उनके हांथ में तीर कमान दिया जाता है। वो व्यक्ति श्री राम की भांति उन पुतलों का दहन करता है। हर साल इसी तरह इस त्योहार को दस दिनों के लिए बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। जलते हुए पुतले लोगों को अपने भीतर छिपी बुराइयों का अंत करने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके साथ ही यह त्योहार आलस, क्रोध, अहंकार, हिंसा, चोरी, लोभ, मोह जैसी बुराइयों को त्यागने का प्रतीक है।
इस दिन भगवान श्री राम को रावण पर विजय प्राप्त हुई थी। रावण, माता सीता का अपहरण कर उन्हें लंका ले गया था। भगवान राम ने अपनी पत्नी सीता के बचाव में रावण के साथ युद्ध किया था। यह युद्ध दस दिनों तक चलता रहा था। युद्ध के दसवें दिन प्रभु राम ने रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी। मान्यता है की श्री राम ने इन दस दिनों तक माँ दुर्गा की उपासना की थी। मां दुर्गा से प्राप्त शस्त्र का उपयोग कर ही श्री राम ने अहंकारी रावण का अंत किया था। दशहरा लोगों को बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। साथ ही लोगों को बताता है कि अहंकार और दुष्ट लोग कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, सच्चाई और अच्छाई हमेशा जीत हासिल करती है। हर साल इस पावन अवसर पर दस दिनों तक रामलीला का आयोजन होता है। दसवें दिन रावण, मेघनाथ और कुंभकरण का पुतला जलाया जाता है। इस प्रकार, समाज में व्याप्त बुराइयों के अंत की कामना की जाती है।
इस दिन मां दुर्गा ने अत्याचारी महिषासुर का भी अंत किया था। देवताओं को उसके प्रकोप से मुक्त करवाया था। महिषासुर ने तीनों लोकों में उत्पात मचाया हुआ था। सभी देवी-देवताओं को इस दैत्य ने अपनी दुष्टता से परेशान कर दिया था। देवताओं के आह्वान पर आश्विन शुक्ल दशमी तिथि को मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। दशहरे के दिन दस दिनों से चल रही दुर्गा पूजा का समापन किया जाता है। इसके साथ ही मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन भी किया जाता है। विजयदशमी के दिन शस्त्र पूजा, दुर्गा पूजा और श्री राम पूजा का अधिक महत्व होता है।
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✍️ By- टीम एस्ट्रोयोगी