राहु-केतु गोचर 2026: इन राशियों की जिंदगी में आ सकता है बड़ा बदलाव, जानें असर

Wed, Sep 09, 2026
टैरो मेहर
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Team Astroyogi
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राहु-केतु गोचर 2026: इन राशियों की जिंदगी में आ सकता है बड़ा बदलाव, जानें असर

दिसंबर 2026 में राहु और केतु अपनी राशि बदलने जा रहे हैं। राहु कुंभ से मकर में, जबकि केतु सिंह से कर्क में गोचर करेंगे। यह राहु-केतु गोचर करीब 18 महीने तक प्रभावी रहेंगे। ये गोचर इसलिए भी खास हैं क्योंकि इसी राशि में आने में इन ग्रहों को पूरे 30 वर्ष का समय लगता है। इस दौरान नौकरी, कारोबार, परिवार, रिश्तों, धन, सोच और पूजा-पाठ की ओर रुझान में कई बदलाव आ सकते हैं। नीचे जानिए इस गोचर का अर्थ क्या है और आपकी राशि पर इसका क्या असर पड़ेगा।

कब होगा राहु-केतु गोचर 2026?

गोचर तिथि और समय
राहु-केतु गोचर 5 दिसम्बर 2026, शनिवार, शाम 07:28 बजे
स्पष्ट राहु-केतु गोचर 25 नवम्बर 2026, बुधवार, शाम 04:34 बजे

राहु-केतु गोचर 2026 क्यों है खास?

5 दिसंबर 2026 को राहु और केतु अपनी राशि बदलने जा रहे हैं। यह राहु-केतु गोचर लगभग 23 जून 2028 तक चलेगा। वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है। ये दोनों ग्रह हमेशा एक-दूसरे के सामने रहते हैं और लगभग 18 महीने में राशि परिवर्तन करते हैं।

जब भी राहु और केतु का गोचर होता है, इसका असर जीवन के कई हिस्सों पर पड़ता है। इस दौरान कुछ लोगों को नए मौके मिलते हैं, तो कुछ को अपनी पुरानी मेहनत का फल मिलता है। कई लोगों के जीवन में नई शुरुआत होती है, वहीं कुछ लोगों को पुरानी आदतें छोड़ने या पुराने रिश्तों से आगे बढ़ने का अवसर भी मिलता है।

मकर-कर्क राशि अक्ष पर राहु-केतु का क्या प्रभाव होगा?

इस बार राहु मकर राशि में प्रवेश करेगा। मकर राशि के स्वामी शनि हैं। इसलिए इस दौरान लोगों का ध्यान नौकरी, कारोबार, जिम्मेदारियों, भविष्य की योजना, पैसों की मजबूती और सफलता पर ज्यादा रहेगा।

वहीं, केतु कर्क राशि में रहेगा। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं, इसलिए राहु-केतु गोचर का असर परिवार, घर, भावनाओं और मन की शांति से जुड़े मामलों पर देखने को मिल सकता है। इस समय कई लोग पुरानी बातों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। यह गोचर सिखा सकता है कि सच्चा सुकून केवल धन या सुविधाओं से नहीं, बल्कि मन के संतुलन और अपने लोगों के साथ अच्छे रिश्तों से मिलता है।

राहु-केतु गोचर 2026 का फल किस लग्न से पढ़ें?

ज्योतिष में लग्न राशि से देखा गया भविष्यफल सबसे सटीक माना जाता है। यदि आपको अपनी लग्न राशि पता है, तो उसी के अनुसार भविष्यफल पढ़ें।

अगर आपको अपनी लग्न राशि नहीं पता है, तो लग्न कैलकुलेटर की मदद से आसानी से जानें कि आपकी लग्न राशि क्या है और इसी के अनुसार नीचे दिया गया भविष्यफल पढ़ें।

मेष लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 1 अंक लिखा है, तो आपका मेष लग्न है। इस गोचर में राहु आपके दसवें भाव में और केतु आपके चौथे भाव में प्रवेश करेंगे। दसवां भाव करियर, नौकरी, प्रतिष्ठा और सामाजिक पहचान का होता है, जबकि चौथा भाव माता, घर, परिवार, संपत्ति और मन की शांति से जुड़ा होता है।

अगले 18 महीने आपके करियर के लिए काफी महत्वपूर्ण रह सकते हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है या प्रमोशन के अवसर बन सकते हैं। अगर आप नेतृत्व की भूमिका चाहते हैं, तो यह समय आपके पक्ष में काम कर सकता है। कारोबार करने वालों को भी नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि काम की व्यस्तता बढ़ने से परिवार को लग सकता है कि आप पहले जितना समय नहीं दे पा रहे हैं। इसलिए काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाए रखें। मानसिक तनाव बढ़ने न दें और आराम के लिए भी समय निकालें।

उपाय : शनिवार के दिन “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र की 108 बार माला करें। सोमवार को शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें।

वृषभ लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 2 अंक लिखा है, तो आपका वृषभ लग्न है। इस गोचर में राहु आपके नौवें भाव में और केतु आपके तीसरे भाव में रहेंगे। नौवां भाव भाग्य, उच्च शिक्षा, धर्म और लंबी यात्राओं का होता है, जबकि तीसरा भाव साहस, संचार, भाई-बहन और प्रयासों का प्रतिनिधित्व करता है।

यह राहु-केतु गोचर आपको नई चीजें सीखने और अपने अनुभव बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा। उच्च शिक्षा, विदेश यात्रा या नए कौशल सीखने के अवसर मिल सकते हैं। आपकी सोच में भी बदलाव आ सकता है और जीवन को देखने का नजरिया पहले से अलग हो सकता है। दूर स्थानों से जुड़े कामों या विदेशी संपर्कों से आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहेगी। हालांकि भाई-बहनों या करीबी लोगों के साथ बातचीत करते समय धैर्य रखें। छोटी-छोटी बातों पर प्रतिक्रिया देने की बजाय समझदारी से काम लेना बेहतर रहेंगे।

उपाय : शनिवार को काले तिल या गर्म कंबल का दान करें। साथ ही भगवान गणेश की नियमित पूजा करें, ताकि निर्णय लेने की क्षमता और संवाद बेहतर बने रहें।

मिथुन लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 3 अंक लिखा है, तो आपका मिथुन लग्न है। इस गोचर में राहु आपके आठवें भाव में और केतु आपके दूसरे भाव में रहेंगे। आठवां भाव अचानक होने वाले बदलाव, शोध, गुप्त विषय और परिवर्तन का होता है, जबकि दूसरा भाव धन, बचत, परिवार और वाणी से जुड़ा होता है।

यह राहु-केतु गोचर आपके जीवन में गहरे बदलाव ला सकता है। कुछ ऐसे अवसर सामने आ सकते हैं, जिन पर पहले आपका ध्यान नहीं गया था। निवेश या लंबी अवधि की योजनाओं में लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि धन से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें। बिना पूरी जानकारी के निवेश करने या जोखिम उठाने से बचें। परिवार के साथ बातचीत में भी संयम रखें, क्योंकि छोटी बातों पर मतभेद हो सकते हैं।

उपाय : नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें। किसी भी तरह के गलत आर्थिक लेन-देन से बचें। बुधवार या शनिवार के दिन आवारा कुत्तों को भोजन खिलाएं।

कर्क राशि में केतु के गोचर का आपकी राशि पर क्या असर होगा? विस्तार से जानें

कर्क लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 4 अंक लिखा है, तो आपका कर्क लग्न है। इस गोचर में राहु आपके सातवें भाव में और केतु आपके पहले भाव में रहेंगे। सातवां भाव विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी और व्यापारिक संबंधों का होता है, जबकि पहला भाव व्यक्तित्व, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

अगले 18 महीने रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकते हैं। विवाहित लोगों और बिजनेस पार्टनर के साथ कुछ ऐसे अनुभव हो सकते हैं, जो आपसी समझ और विश्वास को मजबूत करने का मौका देंगे। अगर किसी रिश्ते में पहले से दूरी है, तो उसे समय देकर सुधारने की कोशिश करें। वहीं केतु के पहले भाव में आने से आप पहले की तुलना में अधिक शांत और आत्मचिंतन करने वाले हो सकते हैं। कई बार लोग आपसे भावनात्मक दूरी महसूस कर सकते हैं। इसलिए अपने करीबी लोगों से खुलकर बात करें और अपनी सेहत व मानसिक संतुलन का भी ध्यान रखें।

उपाय : मां दुर्गा की नियमित पूजा करें। शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

सिंह लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 5 अंक लिखा है, तो आपका सिंह लग्न है। इस गोचर में राहु आपके छठवें भाव में और केतु आपके द्वादश भाव में रहेंगे। छठा भाव नौकरी, प्रतियोगिता, शत्रु, कर्ज और दैनिक कार्यों का होता है, जबकि बारहवां भाव खर्च, विदेश, एकांत और नींद से जुड़ा होता है।

अगले 18 महीने चुनौतियों पर जीत हासिल करने के लिए अच्छे रह सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों, नौकरीपेशा लोगों और कानूनी मामलों से जुड़े लोगों को मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। कार्यस्थल पर आपका अनुशासन और लगातार प्रयास आपको आगे बढ़ाएंगे। हालांकि इस दौरान अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें। पर्याप्त नींद लें, तनाव कम रखें और खान-पान का विशेष ध्यान रखें। नियमित दिनचर्या अपनाने से आप बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।

उपाय : शनिवार के दिन काली उड़द का दान करें। नियमित रूप से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

कन्या लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 6 अंक लिखा है, तो आपका कन्या लग्न है। इस गोचर में राहु आपके पांचवें भाव में और केतु आपके ग्यारहवें भाव में रहेंगे। पांचवां भाव शिक्षा, रचनात्मकता, प्रेम और संतान का होता है, जबकि ग्यारहवां भाव आय, मित्र और इच्छाओं की पूर्ति से जुड़ा होता है।

यह राहु-केतु गोचर आपकी रचनात्मक सोच को नई दिशा दे सकता है। छात्र, लेखक, कलाकार, कंटेंट क्रिएटर और कारोबार करने वाले लोग अपनी प्रतिभा दिखाने के नए अवसर पा सकते हैं। नौकरी और व्यापार में नए विचार आपको आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। यदि आप कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करना चाहते हैं, तो सोच-समझकर फैसला लें। इससे लाभ मिल सकता है। वहीं इस दौरान आपका मित्र मंडली भी बदल सकता है। कुछ पुराने संबंध पीछे छूटेंगे और सच्चे लोगों से जुड़ने का मौका मिलेगा। प्रेम संबंधों में धैर्य और खुलकर बातचीत करना जरूरी रहेंगे।

उपाय : हर बुधवार पक्षियों को मिश्रित अनाज खिलाएं। भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।

तुला लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 7 अंक लिखा है, तो आपका तुला लग्न है। इस गोचर में राहु आपके चौथे भाव में और केतु आपके दसवें भाव में रहेंगे। चौथा भाव घर, माता, संपत्ति और मन की शांति से जुड़ा होता है, जबकि दसवां भाव करियर, काम और समाज में आपकी पहचान को दर्शाता है।

अगले 18 महीने आपका ध्यान परिवार, घर और संपत्ति से जुड़े मामलों पर अधिक रह सकता है। घर बदलने, नई संपत्ति लेने या किसी नए स्थान पर रहने के योग भी बन सकते हैं। करियर में कुछ समय के लिए असंतोष महसूस हो सकता है। इससे आप अपने भविष्य और लंबे समय के लक्ष्यों पर दोबारा विचार करेंगे। जल्दबाजी में नौकरी बदलने या बड़ा फैसला लेने से बचें। थोड़ा धैर्य रखेंगे तो बेहतर रास्ता खुद सामने आएगा।

उपाय : अपने पर्स में चांदी का सिक्का रखें। जरूरतमंद लोगों को दवाइयों का दान करें। साथ ही रोज पर्याप्त नींद लेने की आदत बनाए रखें।

मकर राशि में राहु का गोचर आपके जीवन में क्या बदलाव ला सकता है? विस्तार से पढ़ें

वृश्चिक लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 8 अंक लिखा है, तो आपका वृश्चिक लग्न है। इस गोचर में राहु आपके तीसरे भाव में और केतु आपके नौवें भाव में रहेंगे। तीसरा भाव साहस, संचार, प्रयास और छोटे भाई-बहनों का होता है, जबकि नौवां भाव भाग्य, धर्म, गुरु और लंबी यात्राओं से जुड़ा होता है।

यह राहु-केतु गोचर आपके आत्मविश्वास और संवाद की क्षमता को मजबूत करेगा। लेखक, पत्रकार, मार्केटिंग प्रोफेशनल, कंटेंट क्रिएटर, सोशल मीडिया से जुड़े लोग और कारोबार करने वालों के लिए यह समय अच्छे अवसर लेकर आ सकता है। अपने दम पर किए गए काम और नए संपर्कों से आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहेगी। हालांकि विचारों में मतभेद होने पर भी अपने गुरु और बड़ों का सम्मान बनाए रखें।

उपाय : आवारा कुत्तों को नियमित रूप से भोजन खिलाएं। बहते पानी में तांबे का छोटा टुकड़ा प्रवाहित करें। अपने गुरु और बड़ों का सम्मान करना न छोड़ें।

धनु लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 9 अंक लिखा है, तो आपका धनु लग्न है। इस गोचर में राहु आपके दूसरे भाव में और केतु आपके आठवें भाव में रहेंगे। दूसरा भाव धन, बचत, परिवार और वाणी का होता है, जबकि आठवां भाव शोध, गुप्त ज्ञान, अचानक होने वाले बदलाव और आध्यात्मिक विषयों से जुड़ा होता है।

अगले 18 महीने आपकी प्राथमिकता धन और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना हो सकती है। नौकरी, व्यापार, निवेश या संचार से जुड़े कामों के जरिए आमदनी के नए अवसर मिल सकते हैं। साथ ही ज्योतिष, ध्यान, योग, हीलिंग या मनोविज्ञान जैसे विषयों में आपकी रुचि बढ़ सकती है। आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें और लंबी अवधि की योजना पर ध्यान दें।

उपाय : शनिवार के दिन शराब और मांसाहार से परहेज करें। पूजा के बाद दाहिने हाथ की कलाई में पीला धागा बांधें।

मकर लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 10 अंक लिखा है, तो आपका मकर लग्न है। इस गोचर में राहु आपके पहले भाव में और केतु आपके सातवें भाव में रहेंगे। पहला भाव व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और जीवन की दिशा का होता है, जबकि सातवां भाव विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी का प्रतिनिधित्व करता है।

यह राहु-केतु गोचर आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि राहु आपकी ही लग्न राशि में प्रवेश कर रहा है। अगले 18 महीने आप अपने व्यक्तित्व में बदलाव लाने, नए लक्ष्य तय करने और नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। करियर में तेजी से आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं, खासकर अगर आप सोच-समझकर जोखिम उठाते हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा, लेकिन विनम्रता बनाए रखना आपके लिए सबसे बड़ी ताकत होगी। वहीं केतु के सातवें भाव में रहने से रिश्तों में कभी-कभी भावनात्मक दूरी महसूस हो सकती है। इसलिए अपने जीवनसाथी या बिजनेस पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करें और उन्हें समय दें।

उपाय :नियमित रूप से “ॐ कें केतवे नमः” मंत्र की 108 बार माला करें। शनिवार के दिन सरसों के तेल का दान करें।

कुंभ लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 11 अंक लिखा है, तो आपका कुंभ लग्न है। इस गोचर में राहु आपके द्वादश भाव में और केतु आपके छठवें भाव में रहेंगे। बारहवां भाव विदेश, खर्च, एकांत और आध्यात्मिकता का होता है, जबकि छठा भाव नौकरी, प्रतियोगिता, शत्रु और दैनिक कार्यों से जुड़ा होता है।

अगले 18 महीनों में विदेश से जुड़े अवसर मिलने की संभावना रहेगी। अगर आप किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करना चाहते हैं या विदेशी प्रोजेक्ट पर काम करने की योजना बना रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अनुकूल हो सकता है। नौकरी और करियर में धीरे-धीरे अच्छी प्रगति हो सकती है। वहीं केतु का छठे भाव में गोचर कार्यस्थल की परेशानियों को शांत तरीके से संभालने में मदद करेगा। बेवजह के विवादों से दूर रहकर आप अपने काम पर बेहतर ध्यान दे पाएंगे।

उपाय : अपने पर्स में चांदी का सिक्का रखें। जरूरतमंद लोगों को दवाइयों का दान करें। साथ ही रोज पर्याप्त नींद लेने की आदत बनाए रखें।

मीन लग्न

यदि आपकी जन्म कुंडली के पहले भाव में 12 अंक लिखा है, तो आपका मीन लग्न है। इस राहु गोचर और केतु गोचर में राहु आपके ग्यारहवें भाव में और केतु पांचवें भाव में रहेंगे। ग्यारहवां भाव आय, लाभ, मित्रों और मन की इच्छाओं के पूरे होने से जुड़ा होता है। वहीं, पांचवां भाव शिक्षा, प्रेम, संतान और नई सोच या नए कामों से जुड़ा माना जाता है।

यह राहु-केतु गोचर आर्थिक दृष्टि से आपके लिए अच्छे परिणाम लेकर आ सकता है। अगले 18 महीने नए संपर्क, साझेदारी और लंबे समय की योजनाओं से लाभ मिलने की संभावना रहेगी। आपकी आय बढ़ाने वाले नए अवसर भी सामने आ सकते हैं। हालांकि प्रेम संबंधों में कभी-कभी भावनात्मक दूरी महसूस हो सकती है। ऐसे समय में खुलकर बातचीत करना जरूरी रहेंगे। रचनात्मक कार्यों और पढ़ाई में सफलता पाने के लिए धैर्य और लगातार मेहनत बनाए रखें।

उपाय :शनिवार के दिन तिल मिलाकर कच्चा दूध शिवलिंग पर अर्पित करें। बच्चों या विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़ी सामग्री का दान करें।

यह राहु-केतु गोचर धैर्य रखने, सोच-समझकर फैसले लेने और अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का समय है। अगर आप सही योजना के साथ आगे बढ़ते हैं, तो इस गोचर का अच्छा लाभ मिल सकता है। लेख में बताए गए उपाय पारंपरिक वैदिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें श्रद्धापूर्वक और नियमित रूप से करने से मन शांत रखने और अच्छे परिणाम पाने में मदद मिल सकती है।

ध्यान रखें कि यह भविष्यफल वैदिक ज्योतिष के सामान्य नियमों पर आधारित है। हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, इसलिए इस गोचर का असर भी सभी लोगों पर एक जैसा नहीं होता। यदि आप जानना चाहते हैं कि यह राहु-केतु गोचर आपकी कुंडली को कैसे प्रभावित करेगा, तो एस्ट्रोयोगी की अनुभवी टैरो रीडर मेहर से व्यक्तिगत परामर्श लेना बेहतर रहेगा।

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