रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार का त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करती है। भाई भी अपनी बहन का साथ देने और जरूरत के समय उसकी मदद करने का वादा करता है। रक्षाबंधन हर साल सावन महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
रक्षाबंधन को लेकर कई पुरानी धार्मिक और मशहूर कहानियां सुनाई जाती हैं। अलग-अलग जगहों पर राखी से जुड़ी अलग-अलग कहानियां मिलती हैं। इनमें भगवान कृष्ण और द्रौपदी, इंद्र और इंद्राणी, राजा बलि और माता लक्ष्मी, सिकंदर और राजा पुरु की कहानियां काफी प्रसिद्ध हैं।
इनमें से कुछ कहानियां धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हैं, जबकि कुछ कहानियां इतिहास और लोककथाओं में सुनाई जाती हैं।
भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे मशहूर कहानियों में से एक है।
कहा जाता है कि एक बार भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लग गई और खून निकलने लगा। द्रौपदी ने जब यह देखा तो उन्होंने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया।
द्रौपदी का यह प्यार देखकर कृष्ण बहुत प्रभावित हुए। कहा जाता है कि कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा करने का वादा किया।
बाद में महाभारत की कहानी में जब द्रौपदी का राजदरबार में अपमान किया गया, तब कृष्ण ने उनकी लाज बचाई।
इसी वजह से कृष्ण और द्रौपदी की कहानी को भाई-बहन के प्यार और एक-दूसरे की मदद करने की भावना से जोड़ा जाता है।
रक्षाबंधन से जुड़ी एक और पुरानी कहानी इंद्र और इंद्राणी की है।
कहा जाता है कि एक समय देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में देवताओं की हालत खराब होने लगी। इंद्र भी मुश्किल में पड़ गए।
तब इंद्राणी ने इंद्र की सुरक्षा और जीत के लिए पूजा की। इसके बाद उन्होंने इंद्र की कलाई पर एक पवित्र धागा बांधा।
कहा जाता है कि इसके बाद इंद्र युद्ध में गए और उन्हें जीत मिली।
इस कहानी में कलाई पर बांधे गए धागे को सुरक्षा और अच्छे परिणामों की उम्मीद से जोड़ा गया है। इसी वजह से इसे राखी की पुरानी परंपरा से भी जोड़ा जाता है।
रक्षाबंधन से जुड़ी एक प्रसिद्ध कहानी राजा बलि, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु से जुड़ी है।
कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने वामन रूप में राजा बलि से तीन पग जमीन मांगी थी। तीन कदम में भगवान विष्णु ने राजा बलि का पूरा राज्य नाप लिया।
इसके बाद राजा बलि ने भगवान विष्णु से अपने साथ रहने के लिए कहा। भगवान विष्णु राजा बलि के साथ रहने लगे।
माता लक्ष्मी भगवान विष्णु को वापस लाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने राजा बलि को अपना भाई माना और उनकी कलाई पर राखी बांधी।
राजा बलि ने माता लक्ष्मी को बहन मान लिया और उनसे अपनी इच्छा बताने को कहा। तब माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने साथ ले जाने की इच्छा जताई।
राजा बलि ने उनकी बात मान ली और भगवान विष्णु को उनके साथ जाने दिया।
इसी कहानी की वजह से कुछ जगहों पर रक्षाबंधन को राजा बलि और माता लक्ष्मी से भी जोड़ा जाता है।
रक्षाबंधन से जुड़ी एक मशहूर कहानी सिकंदर और भारतीय राजा पुरु की भी है।
कहा जाता है कि जब सिकंदर भारत आया और उसका राजा पुरु से युद्ध हुआ, तब सिकंदर की पत्नी ने राजा पुरु को राखी भेजी थी। उसने राजा पुरु से अपने पति की जान बचाने का अनुरोध किया था।
कहानी के अनुसार, युद्ध के दौरान राजा पुरु ने राखी का सम्मान किया और सिकंदर को मारने से बचा लिया।
यह कहानी रक्षाबंधन से जुड़ी कई मशहूर कहानियों में सुनाई जाती है। लेकिन इस घटना के बारे में इतिहास में पक्का सबूत नहीं मिलता। इसलिए इसे एक मशहूर ऐतिहासिक कहानी के रूप में ही बताया जाता है।
रक्षाबंधन से जुड़ी एक और मशहूर कहानी रानी कर्णावती और हुमायूं की है।
कहा जाता है कि जब मेवाड़ पर संकट आया, तब रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी थी।
हुमायूं ने राखी को भाई-बहन के रिश्ते की निशानी माना और रानी की मदद के लिए आगे बढ़े।
इस कहानी से यह बात सामने आती है कि राखी का रिश्ता केवल सगे भाई-बहन तक ही सीमित नहीं माना जाता था। किसी को भाई या बहन मानकर भी यह रिश्ता बनाया जा सकता था।
हालांकि इस घटना के बारे में इतिहास में अलग-अलग बातें मिलती हैं और इसका पक्का सबूत नहीं मिलता। इसलिए इसे भी एक मशहूर ऐतिहासिक कहानी के रूप में देखा जाता है।
रक्षाबंधन से जुड़ी एक पुरानी कहानी यम और यमुना की भी है।
कहा जाता है कि यमुना अपने भाई यम को कई बार घर आने के लिए बुलाती थीं। एक दिन यम उनके घर पहुंचे।
यमुना ने अपने भाई का स्वागत किया, तिलक लगाया और उनकी कलाई पर रक्षा धागा बांधा। उन्होंने अपने भाई की अच्छी सेहत और लंबे जीवन की कामना की।
यमुना के प्यार से खुश होकर यम ने उन्हें वर मांगने के लिए कहा। यमुना ने कहा कि यम हर साल उनके घर आएं और भाई-बहन का यह प्यार बना रहे।
यह कहानी भाई-बहन के प्यार और एक-दूसरे से मिलने की खुशी को बताती है।
रक्षाबंधन से जुड़ी कुछ मशहूर कहानियों में भगवान गणेश और उनके पुत्र शुभ-लाभ का भी जिक्र मिलता है।
कहा जाता है कि शुभ और लाभ अपनी बहन चाहते थे। इसके बाद संतोषी माता को उनकी बहन के रूप में बताया गया।
संतोषी माता के आने के बाद शुभ और लाभ को बहन मिली। इससे परिवार में भाई-बहन के रिश्ते का भाव बना।
इस कहानी में संतोषी माता द्वारा शुभ और लाभ को राखी बांधने की बात भी कही जाती है।
यह एक मशहूर लोककहानी है। इसे रक्षाबंधन की शुरुआत की पक्की जानकारी नहीं माना जाता।
पुराने समय से ही किसी की सुरक्षा और अच्छे जीवन की कामना के लिए कलाई पर पवित्र धागा बांधने की परंपरा रही है।
पूजा-पाठ और दूसरे धार्मिक कामों में भी कलाई पर धागा बांधा जाता रहा है। समय के साथ राखी और भाई-बहन के रिश्ते की परंपरा एक-दूसरे से जुड़ती गई।
आज रक्षाबंधन मुख्य रूप से भाई-बहन के प्यार और रिश्ते का त्योहार बन गया है। इस दिन राखी बांधना, मिठाई खिलाना और एक-दूसरे को उपहार देना इसकी खास परंपराएं हैं।
रक्षाबंधन कब मनाया जाता है?
रक्षाबंधन सावन महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसकी तारीख हर साल बदलती है। राखी बांधने का सही समय जानने के लिए उस साल का पंचांग देखना चाहिए।
रक्षाबंधन की सबसे मशहूर कहानी कौन सी है?
भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे मशहूर कहानियों में से एक है। कहा जाता है कि द्रौपदी ने कृष्ण की चोट पर कपड़ा बांधा था और कृष्ण ने उनकी रक्षा करने का वादा किया था।
रक्षाबंधन को राखी का त्योहार क्यों कहते हैं?
रक्षाबंधन के दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है। इसी वजह से इसे आम भाषा में राखी का त्योहार भी कहा जाता है।
क्या रक्षाबंधन पर भाई ही बहन को उपहार देता है?
नहीं। ऐसा कोई जरूरी नियम नहीं है। भाई बहन को उपहार दे सकता है और बहन भी अपने भाई को उपहार दे सकती है। असली मायने प्यार और रिश्ते के हैं, उपहार की कीमत के नहीं।
क्या रक्षाबंधन केवल सगे भाई-बहन के लिए होता है?
रक्षाबंधन मुख्य रूप से भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है। लेकिन कई परिवारों और जगहों पर राखी का रिश्ता सगे भाई-बहन के अलावा दूसरे रिश्तों में भी देखने को मिलता है। लोग अपनी परिवार की परंपरा के अनुसार यह त्योहार मनाते हैं।
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