Purnima 2026: हिन्दू धर्म में कुछ विशेष तिथियों का बहुत महत्व होता है। इसमें पूर्णिमा तिथि भी शामिल है। जब आकाश में चमकता हुआ और पूरा चाँद दिखाई देता है, तो उस दिन को पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की समाप्ति और कृष्ण पक्ष शुरुआत के साथ पूर्णिमा तिथि आती है। इस प्रकार यह महीने में एक ही बार आती है। पूर्णिमा को बहुत ही शुभ और पवित्र तिथि माना जाता है। इस तिथि पर प्रमुख हिन्दू तीज-त्योहार भी मनाए जाते हैं। यह धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। पूर्णिमा तिथि का संबंध चंद्रमा से होता है। पूर्णिमा को ध्यान, पूजा-पाठ दान और व्रत के लिए बहुत अनुकूल माना जाता है। यह शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक है। अगर पूर्णिमा तिथि पर आप पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करते हैं तो यह आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है। तो चलिए जानते हैं कि साल 2026 में पूर्णिमा कब-कब है? साथ ही जानें पूर्णिमा तिथियों का समय और महत्व।
साल 2026 में आने वाली सभी प्रमुख पूर्णिमा व्रत तिथियां इस प्रकार हैं:
| पूर्णिमा तिथि | पूर्णिमा व्रत का नाम | तिथि प्रारम्भ और समाप्ति समय |
|---|---|---|
| 3 जनवरी 2026 | पौष पूर्णिमा व्रत | प्रारम्भ: 02 जनवरी, दोपहर 06:53 बजे | समाप्त: 03 जनवरी, दोपहर 03:32 बजे |
| 1 फ़रवरी 2026 | माघ पूर्णिमा व्रत | प्रारम्भ: 01 फ़रवरी, सुबह 05:52 बजे | समाप्त: 02 फ़रवरी, रात 03:38 बजे |
| 3 मार्च 2026 | फाल्गुन पूर्णिमा व्रत | प्रारम्भ: 02 मार्च, शाम 05:55 बजे | समाप्त: 03 मार्च, शाम 05:07 बजे |
| 2 अप्रैल 2026 | चैत्र पूर्णिमा व्रत | प्रारम्भ: 01 अप्रैल, सुबह 07:06 बजे | समाप्त: 02 अप्रैल, सुबह 07:04 बजे |
| 1 मई 2026 | वैशाख पूर्णिमा व्रत | प्रारम्भ: 30 अप्रैल, रात 09:12 बजे | समाप्त: 01 मई, रात 10:52 बजे |
| 31 मई 2026 | अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत | प्रारम्भ: 30 मई, सुबह 11:57 बजे | समाप्त: 31 मई, दोपहर 02:14 बजे |
| 29 जून 2026 | ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत | प्रारम्भ: 29 जून, रात 03:06 बजे | समाप्त: 30 जून, सुबह 05:26 बजे |
| 29 जुलाई 2026 | आषाढ़ पूर्णिमा व्रत (गुरु पूर्णिमा) | प्रारम्भ: 28 जुलाई, शाम 06:18 बजे | समाप्त: 29 जुलाई, रात 08:05 बजे |
| 28 अगस्त 2026 | श्रावण पूर्णिमा व्रत (रक्षाबंधन) | प्रारम्भ: 27 अगस्त, सुबह 09:08 बजे | समाप्त: 28 अगस्त, सुबह 09:48 बजे |
| 26 सितम्बर 2026 | भाद्रपद पूर्णिमा व्रत | प्रारम्भ: 25 सितम्बर, रात 11:06 बजे | समाप्त: 26 सितम्बर, रात 10:18 बजे |
| 26 अक्टूबर 2026 | आश्विन पूर्णिमा व्रत (शरद पूर्णिमा) | प्रारम्भ: 25 अक्टूबर, सुबह 11:55 बजे | समाप्त: 26 अक्टूबर, सुबह 09:41 बजे |
| 24 नवम्बर 2026 | कार्तिक पूर्णिमा व्रत | प्रारम्भ: 23 नवम्बर, रात 11:42 बजे | समाप्त: 24 नवम्बर, रात 08:23 बजे |
| 23 दिसम्बर 2026 | मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत | प्रारम्भ: 23 दिसम्बर, सुबह 10:47 बजे | समाप्त: 24 दिसम्बर, सुबह 06:57 बजे |
वैसे तो हिन्दू धर्म में हर महीने आने वाली पूर्णिमा तिथि को शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ प्रमुख और विशेष पर्व इसी तिथि पर मनाए जाते हैं।
गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई 2026): यह दिन गुरु और आचार्यों को समर्पित होता है। हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म में इसका विशेष महत्व है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं का सम्मान करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।
रक्षाबंधन (28 अगस्त 2026): श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं।
शरद पूर्णिमा (26 अक्टूबर 2026): इस दिन चांदनी रात का अत्यंत विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा से अमृत बरसता है। लोग खीर बनाकर खुले आकाश के नीचे रखते हैं और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। यह तिथि मां लक्ष्मी की उपासना के लिए भी खास होती है।
कार्तिक पूर्णिमा (24 नवम्बर 2026): इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। अनेक धार्मिक मेले और उत्सव इस दिन आयोजित होते हैं।
पूर्णिमा पर व्रत और पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। अगर संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें, वरना घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
सुबह भगवान विष्णु, शिव, लक्ष्मी या चंद्र देव की पूजा की जाती है। शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर उनकी आराधना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कई परिवारों में इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा भी आयोजित की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है।
दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। भोजन, वस्त्र, अनाज या तिल, चावल, गुड़ आदि का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। कुछ लोग इस दिन निराहार व्रत रखते हैं तो कुछ केवल फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
हर पूर्णिमा की होती है अलग-अलग विशेषता
प्रत्येक माह की पूर्णिमा का अपना अलग महत्व है। जैसे- पौष पूर्णिमा से माघ मास के स्नान और दान की शुरुआत होती है। माघ पूर्णिमा पर स्नान और दान पूर्ण फलदायी माना जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत का महत्व होता है। आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। वहीं आश्विन पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा मां लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा का विशेष अवसर होता है। कार्तिक पूर्णिमा तो सबसे पवित्र मानी जाती है, जब देशभर में बड़े-बड़े धार्मिक मेले लगते हैं।
पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। जब चंद्रमा अपनी संपूर्ण कलाओं के साथ चमकता है, तब उसकी ऊर्जा मन और आत्मा दोनों पर असर डालती है। यही कारण है कि ध्यान, जप और साधना का महत्व इस दिन कई गुना बढ़ जाता है।
कहा जाता है कि पूर्णिमा का उजाला ज्ञान और पवित्रता का प्रतीक है। इस दिन किया गया दान-पुण्य, व्रत और स्नान, साधारण दिनों की तुलना में अधिक फलदायी माना जाता है। साथ ही यह भी विश्वास है कि पूर्णिमा पर की गई प्रार्थना और साधना सीधे भगवान तक पहुँचती है और जीवन में समृद्धि, शांति और सौभाग्य लेकर आती है।
पूर्णिमा जीवन को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण दिन है। साल 2026 में आने वाली हर पूर्णिमा अपने साथ कोई न कोई विशेष महत्व और त्यौहार लेकर आएगी। यदि आप इस दिन स्नान, दान, व्रत और साधना करते हैं तो न केवल मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ मिलेगा बल्कि ईश्वरीय आशीर्वाद और जीवन में समृद्धि की प्राप्ति भी होगी।
साल 2026 की सभी व्रत-त्योहार तिथियों और शुभ मुहूर्त की जानकारी के लिए हमारा हिन्दू पंचांग देखें।
पूर्णिमा तिथि में जन्मे जातक बुद्धिमान और संपत्तिवान होते हैं। इन लोगों का मनोबल बहुत अधिक होता है, इसलिए परेशानियों से हार नहीं मानती हैं। इन व्यक्तियों में कल्पनाशक्ति की अच्छी होती है और भीड़ में अपनी अलग पहचान बना ही लेते हैं। चंद्रमा की वजह से ये जातक भावनात्मक, कलात्मक, सौंदर्यबोध, रोमांस, आदर्शवाद जैसी बातों पर अमल करते हैं। इस तिथि में जन्मे लोग महत्वाकांक्षी भी होते हैं लेकिन जल्दबाजी में बहुत रहते हैं।
सुख, सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति के लिए इस तिथि पर सत्यानारण का पाठ करवाना उत्तम रहता है।
पूर्णिमा तिथि पर गृह निर्माण, नया वाहन, गहने या कपड़ों की खरीदारी, शिल्प, मांगलिक कार्य, उपनयन संस्कार, सत्यनारायण की पूजा करना शुभ माना जाता है।
इस तिथि पर यात्रा करना भी अच्छा होता है।
वहीं दूसरी ओर ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा मन का कारक है। इस वजह से पूर्णिमा तिथि पर यह मन में काफी प्रभाव डालता है।
यह मन को बैचन करता है और क्रोध, चिड़चिड़ाहट और नकारात्मकता भी ला सकता है। इसलिए बेहतर है कि आप किसी से बहस कतई ना करें।
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