हिंदू पंचाग की तेरहवीं तिथि त्रयोदशी (Trayodasi) कहलाती है। इस तिथि का नाम जयकारा भी है। इसे हिंदी में तेरस भी कहा जाता है। यह तिथि चंद्रमा की तेरहवीं कला है, इस कला में अमृत का पान धन के देवता कुबेर करते हैं। त्रयोदशी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 145 डिग्री से 156 डिग्री अंश तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 313 से 336 डिग्री अंश तक होता है। त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव को माना गया है। जीवन में प्रेम और दांपत्य सुख प्राप्ति के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को कामदेव की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
| तिथि | वार | पक्ष व तिथि | तिथि का समय |
|---|---|---|---|
| 1 जनवरी 2026 | गुरुवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | रात 1:48 बजे से 1 जनवरी 2026, 10:22 बजे तक |
| 15 जनवरी 2026 | गुरुवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | शाम 8:17 बजे से 16 जनवरी 2026, 10:22 बजे तक |
| 30 जनवरी 2026 | शुक्रवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | दोपहर 11:09 बजे से 31 जनवरी 2026, 8:26 बजे तक |
| 14 फरवरी 2026 | शनिवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | दोपहर 4:02 बजे से 15 फरवरी 2026, 5:05 बजे तक |
| 28 फरवरी 2026 | शनिवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | रात 8:43 बजे से 1 मार्च 2026, 7:09 बजे तक |
| 16 मार्च 2026 | सोमवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (मधु कृष्ण) | सुबह 9:41 बजे से 17 मार्च 2026, 9:23 बजे तक |
| 30 मार्च 2026 | सोमवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | सुबह 7:10 बजे से 31 मार्च 2026, 6:56 बजे तक |
| 15 अप्रैल 2026 | बुधवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | रात 12:12 बजे से 15 अप्रैल 2026, 10:31 बजे तक |
| 28 अप्रैल 2026 | मंगलवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | शाम 6:52 बजे से 29 अप्रैल 2026, 7:52 बजे तक |
| 14 मई 2026 | गुरुवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | दोपहर 11:21 बजे से 15 मई 2026, 8:31 बजे तक |
| 28 मई 2026 | गुरुवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | सुबह 7:57 बजे से 29 मई 2026, 9:51 बजे तक |
| 12 जून 2026 | शुक्रवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | शाम 7:37 बजे से 13 जून 2026, 4:08 बजे तक |
| 26 जून 2026 | शुक्रवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | रात 10:22 बजे से 28 जून 2026, 12:43 बजे तक |
| 12 जुलाई 2026 | रविवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | रात 2:04 बजे से 12 जुलाई 2026, 10:30 बजे तक |
| 26 जुलाई 2026 | रविवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | दोपहर 1:58 बजे से 27 जुलाई 2026, 4:15 बजे तक |
| 10 अगस्त 2026 | सोमवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | सुबह 8:01 बजे से 11 अगस्त 2026, 4:54 बजे तक |
| 25 अगस्त 2026 | मंगलवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | सुबह 6:21 बजे से 26 अगस्त 2026, 7:59 बजे तक |
| 08 सितंबर 2026 | मंगलवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | दोपहर 2:43 बजे से 09 सितंबर 2026, 12:31 बजे तक |
| 23 सितंबर 2026 | बुधवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | रात 10:51 बजे से 24 सितंबर 2026, 11:18 बजे तक |
| 07 अक्टूबर 2026 | बुधवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | रात 11:17 बजे से 08 अक्टूबर 2026, 10:16 बजे तक |
| 23 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | दोपहर 2:36 बजे से 24 अक्टूबर 2026, 1:37 बजे तक |
| 06 नवंबर 2026 | शुक्रवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (धनत्रयोदशी) | सुबह 10:31 बजे से 07 नवंबर 2026, 10:48 बजे तक |
| 22 नवंबर 2026 | रविवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | सुबह 4:57 बजे से 23 नवंबर 2026, 2:37 बजे तक |
| 06 दिसंबर 2026 | रविवार | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | रात 12:52 बजे से 07 दिसंबर 2026, 2:22 बजे तक |
| 21 दिसंबर 2026 | सोमवार | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी | शाम 5:36 बजे से 22 दिसंबर 2026, 2:24 बजे तक |
यदि त्रयोदशी तिथि (Trayodasi Tithi) बुधवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा त्रयोदशी तिथि मंगलवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय कार्य सिद्धि की प्राप्ति होती है। बता दें कि त्रयोदशी तिथि जया तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है लेकिन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव का पूजन वर्जित है।
त्रयोदशी तिथि (trayodasi tithi) में जन्मे जातक महासिद्ध और परोपकारी होते हैं। इन्हें कई विद्याओं का ज्ञान होता है और अधिक से अधिक विद्या अर्जन करने में रुचि रखते हैं। इन लोगों को धार्मिक शास्त्रों का ज्ञान होता है और इनको सभी इंद्रियों को जीतने वाला माना जाता है। इस तिथि में जन्मे जातक में सहनशीलता बहुत कम होती है। ये लोग आत्मविश्वास के साथ आगे तो बढ़ते हैं लेकिन सफलता हाथ नहीं लगती है। ये लोग वाद-विवाद में तेज होते हैं और अपने तर्कों के आगे दूसरों को कुछ नहीं समझते हैं। ये लोग जीवन में संघर्ष बहुत करते हैं और तब ही उन्हें सफलता का स्वाद चखने को मिलता है।
शुभ कार्य
त्रयोदशी तिथि में यात्रा, विवाह, संगीत, विद्या व शिल्प आदि कार्य करना लाभप्रद रहता है। इसके अलावा किसी भी पक्ष की त्रयोदशी तिथि में उबटन लगाना औ बैंगन खाना वर्जित है।
हिंदू पंचांग के मुताबिक हर माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। कुल मिलाकर वर्ष में 24 प्रदोष व्रत पड़ते हैं और इस दिन भगवान शिव की साधना और आराधना करना शुभ माना जाता है। इस तिथि पर व्रत करने से पुत्ररत्न की प्राप्ति, ऋण से मुक्ति, सुख-सौभाग्य, आरोग्य आदि की प्राप्ति होती है।
अनंग त्रयोदशी पर्व मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। इसके अलावा चैत्र मास में भी आता है। इस तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही कामदेव और रति की भी पूजा का विधान है। इस तिथि पर व्रत करन से प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
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