Papamochani Ekadashi: पापमोचनी एकादशी एक महत्वपूर्ण वैष्णव व्रत है, जो पंचांग की परंपरा के अनुसार चैत्र या फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में आती है। यह व्रत हर वर्ष मार्च या अप्रैल के महीने में पड़ता है और दोनों ही पंचांगों में इसकी तिथि एक ही रहती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति की कामना की जाती है। एकादशी व्रत के साथ पारण के नियमों का पालन करना भी अत्यंत आवश्यक माना गया है। श्रद्धा और विधि से किया गया यह व्रत आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
पापमोचनी एकादशी रविवार, 15 मार्च 2026 को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। यह पावन एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक व्रत, पूजा और विष्णु नाम का स्मरण करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में पुण्य, शांति व आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। व्रती भक्त सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और अगले दिन शुभ समय में पारण करते हैं।
📅 15 मार्च 2026, रविवार
🕉️ एकादशी तिथि का समय
एकादशी तिथि प्रारंभ: 14 मार्च 2026, सुबह 08:10 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 15 मार्च 2026, सुबह 09:16 बजे
🌅 पारण का समय
पारण: 16 मार्च 2026, सुबह 06:31 बजे से सुबह 08:55 बजे तक
📌 द्वादशी तिथि समाप्ति
द्वादशी तिथि समाप्त: 16 मार्च 2026, सुबह 09:40 बजे
📅 पूरे साल की एकादशी व्रत सूची देखने के लिए यहाँ देखें।
अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से विनम्र भाव से कहा—हे मधुसूदन! आपने फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली आमलकी एकादशी का महत्व और व्रत विधि विस्तार से समझाई है। अब कृपया यह भी बताइए कि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में कौन-सी एकादशी आती है, उसका क्या नाम है और उसे किस विधि से करना चाहिए। मेरी इस जिज्ञासा को शांत कर मुझे इस पावन व्रत का संपूर्ण ज्ञान प्रदान करें।
पापमोचनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र व्रत है। यह दिन पापों से मुक्ति, मन की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धा, संयम और भक्ति भाव के साथ पूजा और व्रत किया जाता है।
एकादशी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई कर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। दीपक जलाकर तुलसी दल, फूल, फल और सात्त्विक भोग अर्पित करें। अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल व्रत या फलाहार व्रत रखें। इस दिन अनाज, दाल, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए।
दिनभर भगवान विष्णु के नाम का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और भजन-कीर्तन करें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहकर भगवान से अपने पापों की क्षमा माँगें।
अगले दिन द्वादशी तिथि को स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और निर्धारित पारण समय में व्रत खोलें। पहले दान करें, फिर सात्त्विक भोजन ग्रहण करें। सच्ची श्रद्धा से किया गया पापमोचनी एकादशी व्रत जीवन में शांति, पुण्य और सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
एकादशी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
अपने घर और विशेष रूप से पूजा स्थान की साफ-सफाई करें।
पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। माता लक्ष्मी के प्रतीक रूप में श्री यंत्र भी रख सकते हैं।
देशी घी का दीपक जलाएँ और भगवान विष्णु को तिलक लगाएँ।
भगवान को तुलसी दल और पीले फूलों की माला अर्पित करें।
व्रत कथा का पाठ करें और विष्णु मंत्रों का जाप करें।
संध्या समय भगवान विष्णु की आरती करें और भोग प्रसाद अर्पित करें।
जो भक्त निर्जल व्रत नहीं रख सकते, वे कुट्टू की पूरी, आलू की सब्ज़ी और सेंधा नमक से बने सात्त्विक भोजन का सेवन कर सकते हैं।
द्वादशी तिथि को निर्धारित पारण समय में व्रत का समापन करें।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
ॐ नमो लक्ष्मी नारायणाय नमः॥
अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं राम नारायणं जानकी वल्लभम्॥
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥
इन मंत्रों के श्रद्धापूर्वक जाप से मन को शांति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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