हिंदू पंचांग की दूसरी तिथि को द्वितीया (Dwitiya Tithi) कहा जाता है। यह तिथि सुमंगला मानी जाती है, क्योंकि इसमें किए गए कार्य शुभ फल प्रदान करते हैं। हिंदी में इसे दूज, दौज, बीया और बीज भी कहा जाता है।
द्वितीया तिथि चंद्रमा की दूसरी कला से संबंधित होती है। मान्यता है कि कृष्ण पक्ष में भगवान सूर्य अमृतपान कर स्वयं को ऊर्जावान रखते हैं और शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को वह अमृत चंद्रमा को लौटा देते हैं।
शुक्ल पक्ष में, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच 13° से 24° का अंतर होता है, तब द्वितीया तिथि बनती है।
कृष्ण पक्ष में, सूर्य और चंद्रमा के बीच 193° से 204° का अंतर होने पर द्वितीया तिथि का निर्माण होता है।
द्वितीया तिथि के स्वामी ब्रह्मा जी माने गए हैं। इस तिथि में जन्मे जातकों को ब्रह्मा जी का पूजन करना शुभ फल प्रदान करता है।
| तिथि और दिन | चंद्र पक्ष / तिथि | पालन समय एवं समाप्ति तिथि |
|---|---|---|
| 04 जनवरी 2026, रविवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 12:30 PM से 05 जनवरी 2026, 9:57 AM |
| 20 जनवरी 2026, बुधवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया | 2:14 AM से 21 जनवरी 2026, 2:43 AM |
| 03 फरवरी 2026, मंगलवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 1:52 AM से 04 फरवरी 2026, 12:41 AM |
| 18 फरवरी 2026, गुरुवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया | 4:58 PM से 19 फरवरी 2026, 3:59 PM |
| 04 मार्च 2026, बुधवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 4:49 PM से 05 मार्च 2026, 5:04 PM |
| 20 मार्च 2026, शुक्रवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया (चेटी चंड) | 4:52 AM से 21 मार्च 2026, 2:31 AM |
| 03 अप्रैल 2026, शुक्रवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 8:42 AM से 04 अप्रैल 2026, 10:09 AM |
| 18 अप्रैल 2026, शनिवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया | 2:11 PM से 19 अप्रैल 2026, 10:49 AM |
| 03 मई 2026, रविवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 12:50 AM से 04 मई 2026, 3:02 AM |
| 17 मई 2026, रविवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया | 9:41 PM से 18 मई 2026, 5:53 PM |
| 01 जून 2026, सोमवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 4:37 PM से 02 जून 2026, 7:01 PM |
| 16 जून 2026, मंगलवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया | 4:31 AM से 17 जून 2026, 12:52 AM |
| 01 जुलाई 2026, बुधवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 7:38 AM से 02 जुलाई 2026, 9:38 AM |
| 15 जुलाई 2026, बुधवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया | 11:51 AM से 16 जुलाई 2026, 8:53 AM |
| 30 जुलाई 2026, गुरुवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 9:30 PM से 31 जुलाई 2026, 10:32 PM |
| 13 अगस्त 2026, गुरुवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया | 8:42 PM से 14 अगस्त 2026, 6:47 PM |
| 29 अगस्त 2026, शनिवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 9:57 AM से 30 अगस्त 2026, 9:37 AM |
| 12 सितंबर 2026, शनिवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया | 7:46 AM से 13 सितंबर 2026, 7:08 AM |
| 27 सितंबर 2026, रविवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 8:59 PM से 28 सितंबर 2026, 7:14 PM |
| 11 अक्टूबर 2026, रविवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया | 9:31 PM से 12 अक्टूबर 2026, 10:13 PM |
| 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 7:02 AM से 28 अक्टूबर 2026, 4:07 AM |
| 10 नवंबर 2026, मंगलवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया (यम द्वितीया) | 2:00 PM से 11 नवंबर 2026, 3:53 PM |
| 25 नवंबर 2026, बुधवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 4:50 PM से 26 नवंबर 2026, 1:15 PM |
| 10 दिसंबर 2026, गुरुवार | शुक्ल पक्ष द्वितीया | 8:46 AM से 11 दिसंबर 2026, 11:23 AM |
| 25 दिसंबर 2026, शुक्रवार | कृष्ण पक्ष द्वितीया | 3:07 AM से 25 दिसंबर 2026, 11:26 PM |
भद्रेत्युक्ता द्वितीया तु शिल्पिव्यायामिनां हिता।
आरम्भे भेषजानां च प्रवासे च प्रवासिनाम्।।
आवाहांश्च विवाहाश्च वास्तुक्षेत्रगृहाणि च।
पुष्टिकर्मकरश्रेष्ठा देवता च बृहस्पतिः।।
इस श्लोक में द्वितीया तिथि के शुभ प्रभाव और इसके अंतर्गत आने वाले कार्यों का वर्णन किया गया है। शास्त्रों के अनुसार द्वितीया तिथि को भद्रा कहा गया है, अर्थात यह तिथि मंगलकारी और कल्याण प्रदान करने वाली होती है।
यह तिथि शिल्प कार्य, व्यायाम, औषधि आरंभ, तथा यात्रा के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। इसके अलावा इस दिन विवाह, देवताओं का आवाहन, वास्तु संबंधी कार्य, भूमि एवं गृह निर्माण तथा पुष्टि कर्म करना भी फलदायी माना गया है।
शास्त्रों में द्वितीया तिथि की अधिष्ठाता देवता के रूप में देवगुरु बृहस्पति को माना गया है। इसलिए इस तिथि पर किए गए कार्य ज्ञान, समृद्धि और स्थायित्व प्रदान करते हैं। विशेष रूप से शिक्षा, निर्माण और धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत के लिए द्वितीया तिथि को उत्तम माना गया है।
यदि द्वितीया तिथि सोमवार या शुक्रवार को पड़ती है, तो यह मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
यदि किसी माह में द्वितीया तिथि दोनों पक्षों में बुधवार को पड़े, तो इसे सिद्धिदा तिथि कहा जाता है। इस समय किए गए कार्यों से विशेष शुभ फल प्राप्त होते हैं।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद माह की द्वितीया शून्य तिथि मानी जाती है।
शुक्ल पक्ष की द्वितीया में भगवान शिव माता पार्वती के समीप रहते हैं, इसलिए इस दिन शिव पूजन से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।
वहीं कृष्ण पक्ष की द्वितीया में भगवान शिव का पूजन विशेष रूप से शुभ नहीं माना गया है।
द्वितीया तिथि में जन्मे जातक भावनात्मक रूप से संवेदनशील होते हैं और विपरीत लिंग के प्रति शीघ्र आकर्षित हो जाते हैं। इन्हें लंबी यात्राएँ करना पसंद होता है।
ये जातक परिश्रमी होते हैं और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं, लेकिन पारिवारिक मतभेद इनके जीवन में बने रह सकते हैं। मित्रों की अधिकता के कारण कभी-कभी ये गलत संगति में भी पड़ सकते हैं।
कृष्ण पक्ष की द्वितीया में यात्रा, विवाह, संगीत, विद्या और शिल्प से जुड़े कार्य करना लाभकारी माना जाता है।
शुक्ल पक्ष की द्वितीया में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
किसी भी पक्ष की द्वितीया तिथि को नींबू का सेवन और उबटन लगाना अशुभ माना गया है।
भाई दूज - दीपावली के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन यमराज की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। बहन द्वारा भाई को तिलक करने और यम पूजन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
जगन्नाथपुरी रथयात्रा - आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। इसमें भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की शोभायात्रा होती है।
अशून्य शयन व्रत - श्रावण कृष्ण पक्ष की द्वितीया को अशून्य शयन व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह व्रत स्त्रियों को सौभाग्य और दांपत्य सुख प्रदान करता है।
नारद जयंती- ब्रह्मा जी के मानस पुत्र देवर्षि नारद का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वितीया को हुआ था। इस कारण इस दिन नारद जयंती मनाई जाती है। इस अवसर पर नारद जी के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है।
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