करण

वैदिक ज्योतिष के अनुसार व्रत, पर्व को निर्धारित करने में पंचांग और मुहूर्त का महत्वपूर्ण स्थान है। इनके बिना, हिंदू धर्म में पर्व व धार्मिक अनुष्ठान करने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। करण पंचांग के पांच प्रमुख अंगों में से एक है। इसके बगैर पंचांग का निर्माण करना संभव नहीं है। आगे हम करण किसे कहते हैं, करण कितने प्रकार के हैं, इनका पंचांग में क्या कार्य है इस बारे में जानेंगे।

आज के करण - Aaj Ke Karan

आज के करण - Aaj Ke Karan
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18 October 2021 |
करण - बालव 26:43:48 तक

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करण किसे कहते हैं?

करण को एक तिथि का आधा हिस्सा माना जाता है। एक तिथि में दो करण होते हैं। यानी कि प्रत्येक 30 के महीने के लिए उस महीने में 60 करण मौजूद होते हैं। करण मुख्यतः दो प्रकार के हैं- अस्थायी और स्थायी। अस्थायी करण के प्रकार यह करण सात प्रकार के होते हैं। जो अस्थाई हैं यानि की कोई जातक इन करणों में जन्म लेता है तो उसकी प्रवृत्ति उस करण के गुण अथवा अवगुण के अनुसार निर्धारित होती है। यह कुंडली में कभी नहीं बदलता।

1. बव
इस करण में जन्मे जातकों का झुकाव धर्म की ओर अधिक होता है। ये धार्मिक व आध्यात्मिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। जातक ईमानदार, तेज, उदार और अनुशासन प्रिय होता है। किसी कार्य में ये जातक अपना सौ फीसदी देते हैं। ये अनैतिक व गलत कामों से खुद को दूर रखते हैं। इन गुणों के कारण बव करण में जन्मे लोग सभी का सम्मान और प्यार पाते हैं।

2. बालव
बालव करण में जन्मे जातक धार्मिक प्रकृति के होते हैं। ये अपना अधिकांश जीवन धर्म के प्रचार व प्रसार करने में व्यतीत करते हैं। ये जातक तीर्थयात्रा और धार्मिक गतिविधियों में पूरे समर्पण के साथ शामिल होते हैं। बालव करण के जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं और एक सफल जीवन जीते हैं। ये जातक खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों में रूचि रखते हैं।

3. कौलव
इस करण में जन्म लेने वाला व्यक्ति बहिर्मुखी (एक्स्ट्रोवर्ट) और बहुत सामाजिक होता है। जिसके चलते व्यक्ति की मित्रता बहुत से लोगों से होती है। ये लोगों की कद्र और अपने करीबियों प्रेम करते हैं। कौलव करण के जातक स्वाभिमानी होने के साथ- साथ काफी जिद्दी होते हैं।

4. तैत्तिल
इस करण में पैदा हुए लोग बहुत विनम्र और भाग्यशाली होते हैं। ये अपने जीवन आने वाले सभी परिक्षा में सफल होते हैं। ये जातक अपने दिल में जिसे जगह देते हैं उसका सम्मान करते हैं। उनकी हर छोटी से छोटी बातों व भावनाओं का ख्याल रखते हैं। संबंध के प्रति ईमानदार रहते हैं।

5. गर
इस करण में पैदा हुए जातक अपने कार्य के प्रति समर्पित व निष्ठावान होते हैं। ये जातक अपनी क्षमता से सफलता प्राप्त करने में विश्वास रखते हैं, ये कभी भी भाग्य पर निर्भर नहीं रहते हैं। गर करण के लोग कृषि और घरेलू कार्यों में कुशल होते हैं।

6. वनिज
इस करण में जन्मे जातक स्मार्ट और बुद्धिमान होते हैं। वे घूमने और नई जगहों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। जातक अपने कार्यक्षेत्र में विश्वनीय होते हैं और व्यावसायिकता के मापदंड को आश्चर्यजनक रूप से पूरा करते हैं। ये कार्यप्रिय होते हैं। इनकी ज्यादातर यात्राएं व्यावसायिक होती हैं, जो इन्हें बहुत ही पसंद होता है।

7. विष्टि
विष्टि करण को शुभ नहीं माना जाता है। इसे आम जन मानस भद्रा के नाम से जानते हैं। इस करण में जन्म लेने वालो जातकों को संदेहवादी और ज्यादातर मामलों में खतरनाक माना जाता है। इस करण की प्रवृत्ति हानिकारक है। विष्टि करण में पैदा हुए जातक अनैतिक कार्यों में संलग्न हो सकते हैं। ये अपने दुश्मनों से बदला लेने में संकोच नहीं करते।

स्थायी करण के प्रकार स्थायी करण चार प्रकार के होते हैं। इसका जातक पर गहरा प्रभाव होता है। माना जाता है कि इन करणों में कम ही लोगों का जन्म होता है।

8. शकुनि
इस करण में जन्म लेने वाले बहुत ही रचनात्मक प्रवृत्ति और सदैव सत्य का साथ देते हैं। ये जातक विवादों को सुलझाने, नकारात्मक स्थितियों को दूर करने की कला में निपुण होते हैं। ये बुद्धिमान व चतुर होने के साथ- साथ हर तरह की परिस्थितियों से निपटने की क्षमता रखते हैं। इन जातकों का अंतर्ज्ञान इन्हें किसी भी दुविधा को दूर करने में मदद करता है।

9. चतुष्पाद
चतुष्पाद करण में जन्मे लोग धार्मिक होते हैं जो परंपराओं और रिति-रिवाजों को मानते हैं। इस करण में पैदा हुए जातक ज्ञानी होते हैं और ज्ञानी व्यक्तियों के लिए अपने हृदय में बहुत ही सम्मान रखते हैं। ये पशु प्रेमी होते हैं और पशुओं की देखभाल करने के लिए अपने जीवन को समर्पित कर देते हैं।

10. नाग
ज्योतिष में नाग करण को अशुभ करणों में से एक माना जाता है। इस करण में पैदा हुए लोगों का जीवन कठिन होता है। इन्हें जीवन में कभी भी और कुछ भी आसानी से प्राप्त नहीं होता। इनका जीवन संघर्ष और कठिनाइयों से भरा होता है। किस्मत का उनकी उपलब्धियों से बहुत कम नाता होता है। सफलता पाने के लिए इन जातकों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।

11. किस्तुघ्न
किंस्तुघ्न करण में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वह व्यक्ति हमेशा शुभ कार्यों को करने में तत्पर रहता है। वह अपने पुरुषार्थ से अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करता है। जातक द्वारा किए गये सभी प्रयास लगभग सफल होते हैं। ये जातक जन सेवा और मानवीय कार्यों में अधिक रूचि रखते हैं। उच्च शिक्षा ग्रहण कर जीवन में हर प्रकार की सुख-समृद्धि को प्राप्त करते हैं।

पंचांग में करण का महत्व

सही करण चुनना किसी भी कार्य के लिए सही मुहूर्त निकालने का एक अनिवार्य हिस्सा है। करण जातक के व्यक्तित्व को निर्धारित करने में भी सहयोग करते हैं।

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