हिंदू पंचाग की आठवी तिथि अष्टमी (Ashtami) कहलाती है। इस तिथि का विशेष नाम कलावती है क्योंकि इस तिथि में कई तरह की कलाएं और विधाएं सीखना लाभकारी होता है। इसे हिंदी में अष्टमी, अठमी और आठें भी कहते हैं। यह तिथि चंद्रमा की आठवी कला है, इस कला में अमृत का पान अजेकपात नाम के देवता करते हैं। अष्टमी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 85 डिग्री से 96 डिग्री अंश तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 265 से 276 डिग्री अंश तक होता है। अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव माने गए हैं लेकिन अष्टमी तिथि देवी दुर्गा की शक्ति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। जीवन जीने की शक्ति और परेशानियों से लड़ने के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को भगवान शिव और मां दुर्गा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
| तिथि / दिन | पक्ष / तिथि | तिथि प्रारंभ एवं समाप्ति समय |
|---|---|---|
| 10 जनवरी 2026, शनिवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | सुबह 8:24 से 11 जनवरी, सुबह 10:20 तक |
| 25 जनवरी 2026, रविवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | रात 11:10 से 26 जनवरी, रात 9:18 तक |
| 9 फरवरी 2026, सोमवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | सुबह 5:01 से 10 फरवरी, सुबह 7:27 तक |
| 24 फरवरी 2026, मंगलवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | सुबह 7:02 से 25 फरवरी, सुबह 4:52 तक |
| 11 मार्च 2026, बुधवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | रात 1:54 से 12 मार्च, सुबह 4:19 तक |
| 25 मार्च 2026, बुधवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | दोपहर 1:50 से 26 मार्च, सुबह 11:49 तक |
| 9 अप्रैल 2026, गुरुवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | रात 9:20 से 10 अप्रैल, रात 11:16 तक |
| 23 अप्रैल 2026, गुरुवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | रात 8:49 से 24 अप्रैल, शाम 7:22 तक |
| 9 मई 2026, शनिवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | दोपहर 2:03 से 10 मई, दोपहर 3:07 तक |
| 23 मई 2026, शनिवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | सुबह 5:04 से 24 मई, सुबह 4:27 तक |
| 8 जून 2026, सोमवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | रात 3:25 से 9 जून, रात 3:24 तक |
| 21 जून 2026, रविवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | शाम 3:21 से 22 जून, शाम 3:40 तक |
| 7 जुलाई 2026, मंगलवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | दोपहर 1:25 से 8 जुलाई, दोपहर 12:22 तक |
| 21 जुलाई 2026, मंगलवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | सुबह 4:03 से 22 जुलाई, सुबह 5:17 तक |
| 5 अगस्त 2026, बुधवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | रात 8:42 से 6 अगस्त, शाम 6:53 तक |
| 19 अगस्त 2026, बुधवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | शाम 7:20 से 20 अगस्त, रात 9:18 तक |
| 4 सितंबर 2026, शुक्रवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | रात 2:25 से 5 सितंबर, रात 12:14 तक |
| 18 सितंबर 2026, शुक्रवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | दोपहर 1:01 से 19 सितंबर, दोपहर 3:27 तक |
| 3 अक्टूबर 2026, शनिवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | सुबह 8:00 से 4 अक्टूबर, सुबह 5:52 तक |
| 18 अक्टूबर 2026, रविवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | सुबह 8:28 से 19 अक्टूबर, सुबह 10:52 तक |
| 1 नवंबर 2026, रविवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | दोपहर 2:52 से 2 नवंबर, दोपहर 1:11 तक |
| 17 नवंबर 2026, मंगलवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | सुबह 4:20 से 18 नवंबर, सुबह 6:05 तक |
| 1 दिसंबर 2026, मंगलवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | रात 12:12 से रात 11:14 तक |
| 16 दिसंबर 2026, बुधवार | शुक्ल पक्ष अष्टमी | रात 10:46 से 17 दिसंबर, रात 11:26 तक |
| 30 दिसंबर 2026, बुधवार | कृष्ण पक्ष अष्टमी | दोपहर 12:36 से 31 दिसंबर, दोपहर 12:32 तक |
यदि अष्टमी तिथि (Ashtami Tithi) बुधवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा अष्टमी तिथि मंगलवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय कार्य सिद्धि की प्राप्ति होती है। बता दें कि अष्टमी तिथि जया तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं शुक्ल पक्ष की अष्टमी में भगवान शिव का पूजन करना वर्जित है लेकिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी में शिव का पूजन करना उत्तम माना गया है। चैत्र महीने के दोनों पक्षों में पड़ने वाली अष्टमी तिथि शून्य कही गई है।
अष्टमी तिथि में जन्मे जातक धार्मिक कार्यों में निपुण और दयावान भी होते हैं। इन्हें सदैव सत्य बोलना पसंद होता है। ये भौतिक सुख-सुविधाओं में विशेष रुचि लेते हैं। इस तिथि में जन्म लेने वाले लोग कई चीजों में विद्वान होते हैं। इनके मन में हमेशा समाज के कल्याण की इच्छा जागती रहती है। ये लोग किसी भी कार्य को करने के लिए मेहनत मे कमी नहीं छोड़ते हैं। इनको घूमना बहुत पसंद होता है। ये लोग उन कार्यों में भाग लेना ज्यादा पसंद करते हैं जिनमें बल का इस्तेमाल करना पड़ता हो। ये लोग मनमौजी स्वभाव के होते हैं अपनी मर्जी से नियम बनाते हैं और खुद ही पालन भी करते हैं।
शुभ कार्य
अष्टमी तिथि (ashtami tithi) में युद्ध, राजप्रमोद, लेखन, स्त्रियों को आभूषण, नये वस्त्र खरीदने जैसे कार्य करने चाहिए। मान्यता है कि इस तिथि में अभिनय, नृत्य, गायन कला सीखने के लिए प्रवेश लेना भी शुभ है। इस तिथि में आप वास्तुकर्म, घर बनवाना, शस्त्र बनवाने जैसे कार्य प्रारंभ कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी पक्ष की अष्टमी तिथि में नारियल नहीं खाना चाहिए।
अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक मास की कृष्णपक्ष की अष्टमी को आता है| इस दिन अहोई माता के पूजन का विधान है। इस तिथि पर महिलाएं पुत्र प्राप्ति और संतान सुख के लिए व्रत रखती हैं और शाम के वक्त तारे देखकर उपवास तोड़ा जाता है।
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इस तिथि पर शीतला माता की पूजा की जाती है, जिससे चिकन पॉक्स या चेचक जैसे रोग दूर रहें। इस दिन बासी भोजन खाया जाता है।
नवरात्र में अष्टमी के दिन देवी दुर्गा की आठवी शक्ति माता महागौरी का पूजन किया जाता है। इस दिन घरों में कन्याभोज भी कराया जाता है।
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सीता अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन धरती पर माता सीता का जन्म हुआ था। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए और अविवाहित कन्याओं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन राधा जी का जन्म हुआ था। इस तिथि पर राधारानी की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करने से आपको राधारानी के साथ भगवान कृष्ण की कृपा भी मिल जाती है।
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