हिंदू पंचांग की चौदवीं तिथि चतुर्दशी कहलाती है। इस तिथि का नाम करा भी है, क्योंकि इस तिथि पर शुभ कार्यों की शुरुआत करना वर्जित है। इसे हिंदी में चौदस भी कहा जाता है। यह तिथि चंद्रमा की चौदवीं कला है, इस कला में अमृत का पान भगवान शिव करते हैं। चतुर्दशी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 157 डिग्री से 168 डिग्री अंश तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 337 से 348 डिग्री अंश तक होता है। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव को माना गया है। जीवन में सर्व कल्याण और सभी पापों से मुक्ति के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को भगवान भोलेनाथ की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
| तिथि (दिन) | पक्ष / तिथि | समय (आरंभ से समाप्ति) |
|---|---|---|
| 6 जनवरी 2026 (मंगलवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी (संकष्टी चतुर्थी) | सुबह 8:02 बजे से 7 जनवरी 2026, सुबह 6:53 बजे तक |
| 22 जनवरी 2026 (गुरुवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | सुबह 2:47 बजे से 23 जनवरी 2026, सुबह 2:28 बजे तक |
| 5 फरवरी 2026 (गुरुवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | रात 12:10 बजे से 6 फरवरी 2026, रात 12:22 बजे तक |
| 20 फरवरी 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | दोपहर 2:38 बजे से 21 फरवरी 2026, दोपहर 1:01 बजे तक |
| 6 मार्च 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | शाम 5:53 बजे से 7 मार्च 2026, शाम 7:17 बजे तक |
| 21 मार्च 2026 (शनिवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | रात 11:56 बजे से 22 मार्च 2026, रात 9:17 बजे तक |
| 5 अप्रैल 2026 (रविवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | दोपहर 12:00 बजे से 6 अप्रैल 2026, दोपहर 2:11 बजे तक |
| 20 अप्रैल 2026 (सोमवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | सुबह 7:28 बजे से 21 अप्रैल 2026, सुबह 4:15 बजे तक |
| 5 मई 2026 (मंगलवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | सुबह 5:24 बजे से 6 मई 2026, सुबह 7:51 बजे तक |
| 19 मई 2026 (मंगलवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | दोपहर 2:18 बजे से 20 मई 2026, सुबह 11:07 बजे तक |
| 3 जून 2026 (बुधवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | रात 9:21 बजे से 4 जून 2026, रात 11:30 बजे तक |
| 17 जून 2026 (बुधवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | रात 9:39 बजे से 18 जून 2026, शाम 6:59 बजे तक |
| 3 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | सुबह 11:20 बजे से 4 जुलाई 2026, दोपहर 12:40 बजे तक |
| 17 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | सुबह 6:28 बजे से 18 जुलाई 2026, सुबह 4:43 बजे तक |
| 1 अगस्त 2026 (शनिवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | रात 11:07 बजे से 2 अगस्त 2026, रात 11:15 बजे तक |
| 15 अगस्त 2026 (शनिवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | शाम 5:29 बजे से 16 अगस्त 2026, शाम 4:53 बजे तक |
| 31 अगस्त 2026 (सोमवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | सुबह 8:51 बजे से 1 सितंबर 2026, सुबह 7:42 बजे तक |
| 14 सितंबर 2026 (सोमवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) | सुबह 7:07 बजे से 15 सितंबर 2026, सुबह 7:44 बजे तक |
| 29 सितंबर 2026 (मंगलवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | शाम 5:10 बजे से 30 सितंबर 2026, दोपहर 2:55 बजे तक |
| 13 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | रात 11:28 बजे से 15 अक्टूबर 2026, रात 1:13 बजे तक |
| 29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी (करवा चौथ) | रात 1:07 बजे से 29 अक्टूबर 2026, रात 10:10 बजे तक |
| 12 नवंबर 2026 (गुरुवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | शाम 6:09 बजे से 13 नवंबर 2026, रात 8:43 बजे तक |
| 27 नवंबर 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | सुबह 9:49 बजे से 28 नवंबर 2026, सुबह 6:40 बजे तक |
| 12 दिसंबर 2026 (शनिवार) | शुक्ल पक्ष चतुर्थी | दोपहर 2:06 बजे से 13 दिसंबर 2026, शाम 4:48 बजे तक |
| 26 दिसंबर 2026 (शनिवार) | कृष्ण पक्ष चतुर्थी | शाम 8:05 बजे से 27 दिसंबर 2026, शाम 5:13 बजे तक |
किसी भी पक्ष की चतुर्दशी में शुभ कार्य करना वर्जित हैं क्योंकि इसे क्रूरा कहा जाता है। इसके अलावा चतुर्दशी तिथि रिक्ता तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं दोनों पक्षों की चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस तिथि पर रात्रि में शिव मंत्र या जागरण करना उत्तम रहता है।
चतुर्दशी तिथि (Chaturdashi tithi) में जन्मे जातक मन से कोमल और बाहर से कठोर दिखाई देते हैं। इन लोगों को क्रोध बहुत आता है। ये जातक साहसी और कठोर कार्य करने में प्रवीण होते हैं। इन लोगों को जीवन में संघर्ष करना पड़ता है तब कहीं सफलता हाथ लगती है। ये लोग अपने ही बनाए गए नियमों पर चलना पसंद करते हैं। इस तिथि में जन्मा जातक साधु-संतों का आदर करता है और धार्मिक कार्यों में विश्वास रखता है। ये लोग अपना काम निकलवाने में माहिर होते हैं और अपनी काबिलियत के दम पर काम निकलवा भी लेते हैं।
शुभ कार्य
चतुर्दशी तिथि में विद्युत कर्म, बन्धन, शस्त्र विषय, अग्नि आदि से सम्बन्धित कार्य करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा किसी भी पक्ष की चतुर्दशी तिथि में बाल काटना या शेविंग करना वर्जित है। इस तिथि पर किसी कठोर कार्य को शुरू करना उचित रहता है जैसे हथियारों का निर्माण या उनका परीक्षण करना।
हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन शिव जी और माता पर्वती का विवाह हुआ था। इसके अलावा हिंदू पंचांग के मुताबिक हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इस तिथि पर भोलेनाथ के लिए व्रत रखना उत्तम फलदायक होता है।
यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस तिथि पर भगवान श्री हरि यानि भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन कलाई पर रेशम का धागा बांधा जाता है। इस तिथि पर व्रत करने से सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं और घर धन-धान्य से संपन्न रहता है।
दिवाली के एक दिन पहले मनाया जाने वाला पर्व नरक चतुर्दशी है। यह त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस तिथि पर मृत्यु के देवता यम की पूजा का विधान है। साथ ही शाम को दीपक जलाने का प्रावधान है।
बैकुंठ चौदस कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को ही मनाया जाता है। इस तिथि पर भगवान शिव और श्रीहरि की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है।
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